मंगलवार, 29 मार्च 2011

शौपिंग हैबिट कही नशा तो nahee

आजकल अनवाश्यक खरीदारी बढाती जा रही है। बाज़ार की चकाचौंध का असर लोगो के बजट पर भी पड़ रहा है। इस महंगाई में घर चलना क्रिकेट वर्ल्ड कप जीतने के बराबर है। लेकिन हर तरफ विज्ञापन के माया जाल में अगर आप घिर गये है तो निश्चित मानिये की ये विज्ञापन अनवाश्यक खरीदारी के लिए प्रेरित भी करते है। शोधो से यह पता चलता है की अनवाश्यक खरीदारी की ये आदत शोपींग हैबत बन जाती है जिसके चलते आप मानसिक रूप से बीमार पड़ जाएँगे। स्टेटस सिम्बल की फिक्र रिचमंड और इलिनियोस विश्विद्यालय के अलग -अलग शोधो से मालूम होया है कि धीरे-धीरे शोपिंग हैबिट आदमी में नशे का रूप ले लेता है। इस आदत के चलते लोग शोपिंग करते बड़ी से बड़ी कीमत चुकाने के लिए तैयार हो जाते है, फिर भी uhene संतोष नहीं मिलता बहुत से लोगो कि आदत hoti है कि शोपिंग हैबिट के चलते koi kharidi vashu ko chupate है। taki mahngi ya kharab vastu hone के karan लोग unka majak na banaye। aise लोग adhik adhik pase soping में kahrch करते है अगर inke pas paise nahee है तो dusro के sath unki शोपिंग के लिए बड़ी shvecha से sath में jayenge। के लिए शोपिंग karan कि आदत में shumar हो jata है.