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March, 2012 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

लाखों टीईटी अभ्यर्थियों के साथ धोखा ǃ

लाखों टीईटी अभ्यर्थियों के साथ धोखा ǃ


टीईटी निरस्त करने और अध्यापक चयन नियमावली बदलने की तैयारी चल रही है। पिछली सरकार के समय में प्राथमिक विद्यालय में 72825 शिक्षाकों की भर्ती विज्ञापन को निरस्त कर अभ्यर्थीयों का 500 रूपये वापस कर दिया जायेगा। यानि यह सरकार अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लेगी। लेकिन लाखों बेरोजगारों का क्या दोष जिन्होंने मेंहनत और ईंमानदारी से टीईटी परीक्षा उतीर्ण की और हजारों रूपये खर्च किया। और यह आशा रखी की भारत का लोकतांत्रिक ढांचा के तहत नौकरी मिल जाएगी। लेकिन सरकार के बदलते ही निर्णय भी बदल दिया गया। पिछली सरकार के समय में निकली विज्ञप्‍ति को निरस्त करने की मंशा के चलते लाखों लोगों का भविष्य दांव में लग गया है।  क्या टीईटी को निरस्त करना उचित हैॽ 
क्या यह सही है कि जिस टीईटी परीक्षा में इतने सवाल उठ रहे हैं तो ऐसे में सरकार को निश्पक्ष जांच कराकर दोषियों को सजा दिया जाना चाहिए। ऐसे लोगों को बाहर कर टीईटी से चयन करना चहिए जबकि किसी परीक्षा को निरस्त करना कहां की समझदारी है। वहीं टीईटी की मेरिट की हाईकोर्ट इलाहाबाद ने भी तारीफ की कहा जिस तरह से एकेडमिक प्रक्रिया से य…

टीईटी और विज्ञापन को निरस्त करने की तैयारी में बेसिक शिक्षा विभाग ǃ टीईटी में अच्छा अंक पाने वाले लाखों छात्रों के साथ होगा धोखा ǃ फसेगा कानूनी पेच ǃ नियमावली में संशोधन कर एकेडमिक होगा अन्‍तिम चयन का आधार ॽ टीईटी के महत्व को कम करने की कोशिश ǃ

टीईटी और विज्ञापन को निरस्त करने की तैयारी में बेसिक शिक्षा विभाग ǃ
टीईटी में अच्छा अंक पाने वाले लाखों छात्रों के साथ होगा धोखा ǃ
फसेगा कानूनी पेच ǃ
नियमावली में संशोधन कर एकेडमिक होगा अन्‍तिम चयन का आधार ॽ

टीईटी के महत्व को कम करने की कोशिश ǃ

गलती को सुधारने के बजाये परीक्षा निरस्त करने की तैयारी ǃ

आखिकार उत्‍तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा विभाग शिक्षक भर्ती प्रक्रिया को निरस्‍त करने के लिए तैयारी कर रहा है। इसके साथ ही अध्‍यापक भर्ती नियमावली के नियम को भी नई प्रक्रिया के लिए बदला जायेगा। वर्तमान में टीईटी के मेरिट से प्राथमिक शिक्षकों की भर्ती का प्रावधान है जिसे मायावती सरकार ने संशोधित किया था। तब एनसीटीई के आरटीई एक्ट के मुताबिक शिक्षक पात्रता परीक्षा अनिवार्य हो गया जिससे मायावती सरकार ने ही चयन का आधार बना दिया था और इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी गई लेकिन याचिका खारिज कर दी गई वहीं चयन का आधार टीईटी मेरिट को सही कहा गया। वहीं 72 हजार प्राईमरी टीचर का विज्ञापन निकाला गया लेकिन हाईकोर्ट ने इस पर रोक लगा दिया जिसकी सुनवाई चल रही है। जिसमें हर जिले के डायट की जगह संयुक्त रूप से नियुक्‍त…

आखिर टीचर की नियुक्‍ति ही क्‍यों टीईटी मेरिट से

प्राथमिक टीचर की भर्ती टीईटी मेरिट से ही सही
सरकारी स्‍कूलों की हालत क्‍यो खराबॽ

इस समय उत्‍तर प्रदेश में प्राथमिक विद्‍यालय की हालत खस्‍ता है। कारण साफ है यहां बुनियादी सुविधा का अभाव है। भवन बेंच टायलेट आदि नहीं है। वहीं 50 छात्रों पर एक शिक्षक तैनात है। ऐसे में बताये कोई शिक्षक अपना बेस्‍ट परफारमेंस कैसे दे पायेगा। पढ़ाई का स्‍तर जाहिर है गिरेगा ऐसे में अंग्रेजी मीडियम तमगा लिये ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसे प्राइवेट स्‍कूल की बाढ़ आ गई है। प्राइवेट कान्‍वेंट स्‍कूल के दावे पर गौर करें तो यहां पर अच्‍छी फैकल्‍टी ट्रेंड टीचिंग स्‍टाफ और आधुनिक तकनीक से शिक्षा देने की बातें कहकर लोगों को आकर्षित किया जाता है जबकि इनके दावे कहां तक सच है। यह तो अपने बच्‍चों दाखिला दिलाने के बाद उनके अभिभावक अच्‍छी तरह से जानते है।
टीईटी ने दिखाया सच
मजेदार बात यह है कि इस समय देश में अनिवार्य शिक्षा कानून चौदह साल तक के बालकों के लिये मुफ्त में शिक्षा और गूणवत्‍तायुक्‍त शिक्षा की बात कहता है। जिसके तहत प्राइमरी और उच्‍च प्राइमरी में टीचरों की योग्‍यता के लिए एक पैमाना बनाया है। यहां प्रशिक्षित शिक्षक को क…

प्राथमिक शिक्षक बनने का सपना संजोय लाखों लोग

प्राथमिक शिक्षक बनने का सपना संजोय लाखों लोग में बस यही बहस चल रहा है कि प्राथमिक टीचर की भर्ती की चयन प्रक्रिया क्‍या होनी चाहिए। इस पर कई लोगों के अपने अपने विचार हो सकते हैं लेकिन हम आज मौजूदा सरकारी स्‍कूलों की स्‍थिति पर ध्‍यान दें तो यह बात साफ हो कि इन स्‍कूलों में भौतिक सुविधाओं के अलावा गुणवत्‍ता युक्‍त शिक्षा भी एक बड़ी चुनौती है। अब फिर वह प्रश्‍न पूछता हूं कि प्राथमिक टीचर के चयन की प्रक्रिया क्‍या होनी चाहिएॽ जाहिर सी बात है किसी विद्‍यालय में एक अच्‍छा शिक्षक होना सबसे पहली शर्त है। अब प्रश्‍न उठता है कि अच्‍छा टीचर आएगा कैसे जब आज हमारी शिक्षा प्रणाली इतना जर्जर हो चुकी है कि आज बीएड कालेजों में नंबर की होड़ लगी है। कारण साफ है कि प्राथमिक विद्‍यालय में अभी तक अन्‍तिम चयन का आधार एकेडमिक मेरिट है। यह सुनने में अच्‍छा जरूर लगता है लेकिन ध्‍यान दें इस समय यूपी बोर्ड परीक्षा चल रही है और अखबारों में खबर रिकार्ड तोड़ हो रहा नकल। वहीं कई ऐसे बोर्ड है जहां ऐसे औसत छात्रों को भी 70 से 80 प्रतिशत नंबर आसानी से मिल जाता है जबकि यूपी बोर्ड में मेधावी छात्र भी इतना नंबर बड़ी मेंहन…

भ्रष्‍टाचार के खिलाफ अन्‍ना की मुहिम जारी

भ्रष्‍टाचार के खिलाफ अन्‍ना की मुहिम जारी
अभिषेक कांत पाण्डेय


भ्रष्‍टाचार की मुहिम जारी है। अन्‍ना का आन्‍दोलन इस बार सख्त तेवर में सामने आ रहा है। 25 तारीख को जंतर मंतर दिल्ली में भ्रष्टाचार के खिलाफ शहीद हुए परिजन के साथ यहां एक दिन का सांकेतिक अनशन किया गया। जिसका मकसद साफ था कि मजबूत जनलोकपाल को संसद में पारित करवाना। भ्रष्‍टाचार के खिलाफ लड़ाई हर हिन्‍दुस्‍तानी की है। आज हम जिस तरह से भ्रष्‍टाचार से दो–चार अपनी रोजाना कि जिंदगी में होते हैं लेकिन अन्‍ना के भ्रष्‍टाचार के खिलाफ मुहिम ने हमारी सोच को बदल दिया है। और हम भ्रष्‍टाचार के खिलाफ आज एक साथ खड़े हैं।

मीडिया ने निभाई जिम्‍मेदारी
एक आम भारतीय को दो वक्त की रोजी रोटी के लिए ही पूरी जिंदगी मेंहनत करने में लगा देता है। लेकिन सरकारी तंत्र में फैले भ्रष्ट ब्‍यूरोकेट्स और नेता आसानी से लाखों करोड़ों बना लेते है। हमें तो अब अश्‍चर्य करने की जरूरत भी नहीं कि देश में इतने घोटाले होते है। आश्चर्य तो यह है कि वास्तव में यह सिलसिला कब से चल आ रहा है। आखिर अब तक पता कैसे नहीं चला जाहिर हमारी मीडिया और जनता ने इस तरह के घोटालों को सामने…

सपनों का सच करने का शहर इलाहाबाद

सपनों का सच करने का शहर इलाहाबाद

अपनी संस्‍कृति की पहचान के साथ आज इलाहाबाद

इलाहाबाद एक ऐसा जीता जागता शहर है जहां पर जिंदगियां हंसती और खेलती हैं। यहां पर साहित्‍य कला और संस्‍कृति का अद्भुत संगम है। प्रयाग नाम और फिर इलाहाबाद ये दोनों नाम गंगा जमुनी संस्‍कुति की पहचान बनाये हुए सांस्‍कृतिक एकता की अलख जगाये हुए हैं। संगम तट पर मध्‍यकाल में बना अकबर का किला और प्राचीनकाल से संगम में आस्‍था का सैलाब देखने को मिलता है। यह एक ऐसा शहर है जो प्राचीनकाल और फिर मध्‍यकाल और इसके बाद आधुनिक काल में अपनी संस्‍कृति को सुरक्षित रखा और हर काल में महत्‍वपूर्ण बना रहा। यही इलाहाबाद कि फिजा की खासीयत है। हिन्‍दी और उर्दू की संगम स्‍थली है। साहित्‍य का गढ़ है। शेरों सायरी के शौकीनों के साथ कविता पाठ की लम्‍बी परंपरा रही है।


देश की आजादी की स्‍थली इलाहाबाद

इलाहाबाद संगम स्‍थली के रूप में प्राचीनकाल से ही प्रख्‍यात है। पर आज कि आधुनिकता ने इसे नए ढंग से जीने के लिए प्रेरित कर रहा है। शिक्षा की यह स्‍थल पूर्व के आक्‍सफोर्ड के नाम से जाना जाने वाला इलाहाबाद विश्‍वविद्‍यालय ने कई विश्‍वविख्‍यात सख्‍सीयतें …

टेट ऐसी छन्‍नी है जो नकलचियों को छानेगा और इसकी मेरिट मेधावियों का चयन करेगा।

टेट ऐसी छन्‍नी है जो नकलचियों को छानेगा और इसकी मेरिट मेधावियों का चयन करेगा।
टीईटी की मेरिट ही केवल हो चयन का आधार। बाकी एकेडमी प्‍लस टेट आदि फार्मूला न्‍यायोचित नहीं। इसे हम अच्‍छी तरह से जानते है कि बीएड में किस तरह से खुले आम नकल होती है। और यहां पर एकडमिक मेरिट मजबूत करने का खेल हर साल चल रहा है। इसके साथ ऐसे विश्‍वविद्‍धालय जहां नकल नहीं होती और मार्किंग टाइट होती है वे नकलचियों के बीच छट जाएंगे और फिर हमारे आरटीई एक्‍ट कानून का कोई मतलब नहीं रहेगा। अतः नकलचियों और नकल माफियों पर बैन लगा सकता है टीईटी मेरिट यह सबके समझ में आनी चाहिए।
दूसरी बात टीईटी के मेरिट होने से छात्र अपनी एकडमिक मेरिट में अंको के जुगाड में कोई गलत कदम नहीं उठायेंगे और उन्‍हे मालूम होगा कि टेट पास करने के लिए अभी से पढाई करों और पढार्इ से वास्‍तविक ज्ञान मिलेगा जो बच्‍चों को पढाने में काम आयेगा। इसलिए टेट आखिरी छन्‍नी है जो छानकर नकलचियों और नकल माफियों को सही रास्‍ते पर लाएगा ओर इनका धंधा बन्‍द हो जएगा।

आखिर टीचर की नियुक्‍ति ही क्‍यों टीईटी मेरिट से

आखिर टीचर की नियुक्‍ति ही क्‍यों टीईटी मेरिट से

सरकारी स्‍कुलों की हालत क्‍यो खराबॽ
सरकारी प्राइमरी स्‍कूलों का गिरता स्‍तर प्राइवेट इंग्‍लिस मीडियम स्‍कूलों को कुकुरमुत्‍तों की तरह उगने का मौका दे रही हैं। इस समय उत्‍तर प्रदेश में प्राथमिक विद्‍यालय की हालत खस्‍ता है। कारण साफ है यहां बुनियादी सुविधा का अभाव है। भवन बेंच टायलेट आदि नहीं है। वहीं 50 छात्रों पर एक शिक्षक तैनात है। ऐसे में बताये कोई शिक्षक अपना बेस्‍ट परफारमेंस कैसे दे पायेगा। पढ़ाई का स्‍तर जाहिर है गिरेगा ऐसे में अंग्रेजी मीडियम तमगा लिये ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसे प्राइवेट स्‍कूल की बाढ़ आ गई है। प्राइवेट कान्‍वेंट स्‍कूल के दावे पर गौर करें तो यहां पर अच्‍छी फैकल्‍टी ट्रेंड टीचिंग स्‍टाफ और आधुनिक तकनीक से शिक्षा देने की बातें कहकर लोगों को आकर्षित किया जाता है जबकि इनके दावे कहां तक सच है। यह तो अपने बच्‍चों दाखिला दिलाने के बाद उनके अभिभावक अच्‍छी तरह से जानते है।

टीईटी ने दिखाया सच
मजेदार बात यह है कि इस समय देश में अनिवार्य शिक्षा कानून चौदह साल तक के बालकों के लिये मुफ्त में शिक्षा और गूणवत्‍तायुक्‍त शिक्षा की बात…