सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

भ्रष्‍टाचार के खिलाफ अन्‍ना की मुहिम जारी

भ्रष्‍टाचार के खिलाफ अन्‍ना की मुहिम जारी
अभिषेक कांत पाण्डेय


भ्रष्‍टाचार की मुहिम जारी है। अन्‍ना का आन्‍दोलन इस बार सख्त तेवर में सामने आ रहा है। 25 तारीख को जंतर मंतर दिल्ली में भ्रष्टाचार के खिलाफ शहीद हुए परिजन के साथ यहां एक दिन का सांकेतिक अनशन किया गया। जिसका मकसद साफ था कि मजबूत जनलोकपाल को संसद में पारित करवाना। भ्रष्‍टाचार के खिलाफ लड़ाई हर हिन्‍दुस्‍तानी की है। आज हम जिस तरह से भ्रष्‍टाचार से दो–चार अपनी रोजाना कि जिंदगी में होते हैं लेकिन अन्‍ना के भ्रष्‍टाचार के खिलाफ मुहिम ने हमारी सोच को बदल दिया है। और हम भ्रष्‍टाचार के खिलाफ आज एक साथ खड़े हैं।

मीडिया ने निभाई जिम्‍मेदारी
एक आम भारतीय को दो वक्त की रोजी रोटी के लिए ही पूरी जिंदगी मेंहनत करने में लगा देता है। लेकिन सरकारी तंत्र में फैले भ्रष्ट ब्‍यूरोकेट्स और नेता आसानी से लाखों करोड़ों बना लेते है। हमें तो अब अश्‍चर्य करने की जरूरत भी नहीं कि देश में इतने घोटाले होते है। आश्चर्य तो यह है कि वास्तव में यह सिलसिला कब से चल आ रहा है। आखिर अब तक पता कैसे नहीं चला जाहिर हमारी मीडिया और जनता ने इस तरह के घोटालों को सामने लाकर रखा है। अन्‍ना हजारे का मुहिम भ्रष्‍टाचार के खिलाफ हमारी आंखें खोल दी हैं। मीडिया की भूमिका प्रशंसनीय है जोकि भारत को खोखला कर देने वाले इन घोटालों को समाज के सामने बड़ी बेबाकी से रखा। कहीं कहीं तो जांच एजेंसी की तरह जांच पड़ताल की और तथ्‍यों को जुटाया लेकिन फिर भी हमारी सरकार ने कोई ठोस कदम उठाने की अभी तक सूझी नहीं।

आखिर क्यों नहीं उठया जाता कोई ठोस कदम
देखा जाए तो इस तरह एक के बाद घोटालों का सामने आना सरकार के मंत्रियों का जेल जाना। वास्तव में सरकार पारदर्शी होने के दावों को खोखला करती है। आखिर हम लोकतंत्र में अपनी आवाज उठाते हैं पर उस पर कोई नोटिस क्‍यों नहीं होती हैॽ यह सवाल हमारे लिए सबसे बड़ा है। जब आखिर हमारे देश की बुनियादी जरूरतों जैसे शिक्षा जल सड़क बिजली आदि के संसाधन की जरूरत है लेकिन हजारों करोड़ों रूपये के इन घोटालों के कारण हम उन लोगों तक उचित सुविधाएं नहीं पहुंचा पाते है जिन्‍हें जल भोजन शिक्षा रोजगार की आवश्‍यकता है। अवैध खनन में आखिर सरकारें चुप क्‍यों रहती है। देश के संसाधन से खनन माफिया के हौसले बुलन्द है। ऐसे में इन्‍हें रोकने वाले ईंमानदार आफिसर इनकी नाराजगी का शिकार होते है जिन्‍हें इनकी ईंमानदारी की कीमत इन्‍हें अपनी जान चुकाकर देनी पड़ती है। और हम तो केवल घर में बैठे सोच में पड़ जाते हैं कि हमारा देश आज माफियाओं के हाथ में है। कहां गई सरकार क्‍यों नहीं रोकती इन संसाधनों की चोरी कोॽ क्‍या ट्रक भर भरकर ले जाते हुए गिट्टी बालु कोयला दिखता नहीं है। या दीखता है तो बस आखें मूंद लिया जाता है। अगर ऐसा है तो साफ है इन माफियों से समझौता करके लाखों रूपये सरकारी नुमाइंदें और नेता मंत्री कमाई करते हैं।

जिम्मेदारी किसकीॽ
जब देश में भ्रष्‍टाचार इस कदर तक फैला हुआ है कि इसके खिलाफ आवाज उठाने वालों के खिलाफ भ्रष्‍टाचारी इनके जान के दुशमन बन जाते है। और हमारा नकारा तंत्र बस देखता रहता है। जब जिन पर देश की जिम्मेदारी है वही अपनी जिम्मेदारियों को नहीं समझते हैं तो इस तरह भ्रष्‍टाचार के खिलाफ अन्ना हजारे बाबा रामदेव और भारत की जनता को समाने आना होगा नहीं तो यह भ्रष्‍टाचार का यह नासूर हमारे देशा को खोखला कर देगा। अगर हम नहीं चेते तो इस भ्रष्‍टाचार के तंत्र में उस गरीब मतदाता ठगा सा रह जाएगा जिसने उस सरकार ने चुनाव मे बड़े बड़े वादे कर देश के विकास के सपने दिखाए लेकिन भ्रष्‍टाचारियों ने उसके सपने चूर चूर कर दिया।

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

ओले क्यों गिरते हैं?

जानकारी

रिंकी पाण्डेय
ओले क्यों गिरते हैं?

बच्चो, कई बार बारिश के दौरान अचानक पानी की बूंदों के साथ बर्फ के छोटे-छोटे गोले भी गिरते हैं। इन्हें हम ओले कहते हैं। ये ओले आसमान में कैसे बनते हैं और ओले क्यों गिरते हैं? तो आओ ओले के बारे में पूरी बात जानें।

-------------------------------------------------------------------------------------------

बच्चों, तुम जानते हो कि बर्फ पानी के जमने से बनता है। अब तुम्हारे मन में ये प्रश्न उठ रहा होगा कि आसमान में ये पानी कैसे बर्फ बन जाता है और फिर गोल-गोले बर्फ के टुकड़ों के रूप में ये धरती पर क्यों गिरते हैं? तुमने जैसा कि पढ़ा होगा कि पानी को जमने के लिए शून्य डिग्री सेल्सियत तापमान होना चाहिए, तुमने फ्रीजर में देखा होगा कि पानी के छोटे-छोटे बूंदें बर्फ के गोले के रूप में जम जाता है, ऐसा ही प्रकृति में होता है। हम जैसे-जैसे समुद्र के किनारे से ऊपर यानी ऊंचाई की ओर बढ़ते हैं, तब जगह के साथ ही तापमान धीरे-धीरे कम होता जाता है। तुम इसे ऐसे समझ सकते हो, लोग गर्मी के मौसम में पहाड़ों पर जाना पसंद करते हैं, क्यों? इसलिए कि पहाड़ पर तापमान कम होता है, यानी मैदान…

जानो पक्षियों के बारे में

जानकारी


बच्चो, इस धरती में कई तरह के पक्षी हैं, तुम्हें जानकर आश्चर्य होगा कि हमिंग बर्ड नाम की पक्षी किसी भी दिशा में उड़ती है, तो कुछ पक्षी ऐसे हैं, जो अपने कमजोर पंख की वजह से उड़ नहीं पाते हैं। चलते हैं पक्षियों के ऐसे अजब-गजब संसार में और जानते हैं कि ये पक्षी कौन हैं?
-----------------------------------------------------------------------

हवा में उड़ते हुए तुमने सैकड़ों पक्षियों को देखा होगा। लेकिन कई ऐसे पक्षी भी हैं, जो उड़ नहीं सकते, तो कुछ किसी भी दिशा में उड़ सकते हैं। तुम्हें जानकर हैरानी होगी कि रेटाइट्स बर्ड परिवार से जुड़े विशालकाय पक्षी कभी उड़ा भी करते थे। पर समय गुजरने के साथ-साथ ये जमीन पर रहने लगे। इस कारण से इनका शरीर मोटा होता गया। उड़ान भरने वाले पंख बेकार होते गए और वो छोटे कमजोर पंखनुमा बालों में बदल गए। इनके बारे में तुम जानते हो, शतुर्गमुर्ग, जो ऑस्ट्रेलिया में पाया जाता है। यह उड़ नहीं सकता है लेकिन जमीन पर ये 7० किलोमीटर घंटे की गति से दौड़ सकता है। ऐसे ही कई रेटाइट्स बर्ड परिवार से जुड़े पक्षी की लंबी लिस्ट हैं, जिनमें पेंग्विन, इम्यू, कीवी, बतख आदि आते हैं।

पेंग्विन उड़त…

आओ जानें डायनासोर की दुनिया

अभिषेक कांत पाण्डेय
स्टीवन स्पीलबर्ग की जुरासिक पार्क फ्रेंचाइजी की नई फिल्म 'जुरासिक वर्ल्ड’ इन दिनों खूब धूम मचा रही है। इससे पहले भी एक फिल्म 'जुरासिक पार्क’ आई थी, जिसने पूरी दुनिया में डायनासोर नाम के जीव से परिचय कराया था। तुमने भी वह फिल्म देखी होगी, आखिर कहां चले गए ये डायनासोर, कैसे हुआ इनका अंत... इनके बारे में तुम अवश्य जानना चाहोगे।


कई तरह के थे डायनासोर

स्टीवन स्पीलबर्ग की जुरासिक पार्क फ्रेंचाइजी की नई फिल्म 'जुरासिक वर्ल्ड’ इन दिनों खूब धूम मचा रही है। इससे पहले भी एक फिल्म 'जुरासिक पार्क’ आई थी, जिसने पूरी दुनिया में डायनासोर नाम के जीव से परिचय कराया था। तुमने भी वह फिल्म देखी होगी, आखिर कहां चले गए ये डायनासोर, कैसे हुआ इनका अंत... इनके बारे में तुम अवश्य जानना चाहोगे।

डायनासोर की और बातें
.इनके अब तक 5०० वंशों और 1००० से अधिक प्रजातियों की पहचान हुई है।
.कुछ डायनासोर शाकाहारी, तो कुछ मांसाहारी होते थे जबकि कुछ डायनासारे दो पैरों वाले, तो कुछ चार पैरों वाले थे।
.डायनासोर बड़े होते थे, पर कुछ प्रजातियों का आकार मानव के बराबर, तो उससे भी छोटे होते…