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प्राथमिक शिक्षक बनने का सपना संजोय लाखों लोग

प्राथमिक शिक्षक बनने का सपना संजोय लाखों लोग में बस यही बहस चल रहा है कि प्राथमिक टीचर की भर्ती की चयन प्रक्रिया क्‍या होनी चाहिए। इस पर कई लोगों के अपने अपने विचार हो सकते हैं लेकिन हम आज मौजूदा सरकारी स्‍कूलों की स्‍थिति पर ध्‍यान दें तो यह बात साफ हो कि इन स्‍कूलों में भौतिक सुविधाओं के अलावा गुणवत्‍ता युक्‍त शिक्षा भी एक बड़ी चुनौती है। अब फिर वह प्रश्‍न पूछता हूं कि प्राथमिक टीचर के चयन की प्रक्रिया क्‍या होनी चाहिएॽ जाहिर सी बात है किसी विद्‍यालय में एक अच्‍छा शिक्षक होना सबसे पहली शर्त है। अब प्रश्‍न उठता है कि अच्‍छा टीचर आएगा कैसे जब आज हमारी शिक्षा प्रणाली इतना जर्जर हो चुकी है कि आज बीएड कालेजों में नंबर की होड़ लगी है। कारण साफ है कि प्राथमिक विद्‍यालय में अभी तक अन्‍तिम चयन का आधार एकेडमिक मेरिट है। यह सुनने में अच्‍छा जरूर लगता है लेकिन ध्‍यान दें इस समय यूपी बोर्ड परीक्षा चल रही है और अखबारों में खबर रिकार्ड तोड़ हो रहा नकल। वहीं कई ऐसे बोर्ड है जहां ऐसे औसत छात्रों को भी 70 से 80 प्रतिशत नंबर आसानी से मिल जाता है जबकि यूपी बोर्ड में मेधावी छात्र भी इतना नंबर बड़ी मेंहनत से पाते है। वहीं कुछ यूनिवर्सिटी में बीए बीएसी आदि में 50 प्रतिशत नंबर लाना चुनौतीपूर्ण है जबकि कुछ ओपन यूनिवर्सिटी में 60 प्रतिशत अंक आसानी से मिल जाते हैं। ऐसे में अगर एकेडमिक मेरिट से चयन किया जाये तो ऐसी संस्‍था में पढ़े छात्र एकेडमिक मेरिट में पीछे रह जायेंगे क्‍योंकि वे उन संस्‍थानों से पढ़ाई कि जहां पर साठ प्रतिशत नंबर लाना मुशकिल है। इन छात्रों का क्‍या दोष जिन्‍होंने अपनी डिग्री इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से किया हो या बीएचयू से बाजी तो मारेंगे दूसरे प्रदेशों से बीएड में हचक के नंबर के जुगाड़ू छात्र और सीबीएई बोर्ड के औसत छात्र जिनको 70 प्रतिशत नंबर आसानी से मिल जाता है। अब बताएं अगर इस तरह अन्‍तिम चयन का आधार एकेडमिक मेरिट ही होगी तो नंबर की होड़ में नकल माफिया नंबर के खेल को खेलते रहेंगे और वास्‍तविक शिक्षा का लक्ष्‍य सरकार का धरा का धरा रह जाएगा। आखिर कब आएगा बदलावǃ आज बदलाव जरूरी है क्‍योंकि एक तरफ हम देखते हैं कि बोर्ड के रिजल्‍ट में कम नंबर आने से छात्र हताशा में अपनी जिंदगी को खत्‍म समझ आत्‍महत्‍या करने का फैसाला ले लेता है और ऐसी खबरों अखबार की सुर्खियां बटोरती है और फिर बहस शुरू हो जाती है। हमारी शिक्षा प्रणाली की खामियों की जहां अच्‍छे नंबर से उतीर्ण होने पर ही सम्‍मान मिलता है। पचास प्रतिशत अंक आने पर भविष्‍य अंधकारमय लगता है। क्‍योंकि आगे तो नौकरी इन नंबर के आधार पर ही मिलेगी यह प्रवृत्‍ति और एकेडमिक बेस चयन ने केवल नकल और आत्‍महत्‍या को ही बढ़ावा दे रही है। जो हमारी शिक्षा के लिए कतई ठीक नहीं है।
अब तो यह साफ है कि किसी भी पद के लिए चाहे वह शिक्षक का ही चयन क्‍यों न हो उसमें एकेडमिक मेरिट चयन का आधार उचित नहीं है। क्‍योंकि मानव संसाधन विकास मंत्रालय अभी हाल में सभी बोर्डो में ग्रेडिंग प्रथा लागू कर दी जिससे कि नंबर की होड़ पर लगाम लग सके। लेकिन खुद यूपी बेसिक शिक्षा विभाग इतने साल से प्राथमिक विद्‍यालय में चयन के लिए एकेडमिक मेरिट आधार बनाकर अपनी जिम्‍मेदारी से पल्‍ला झाड़ लिया। और मानव संसाधन विकास मंत्रालयों और शिक्षाविद्वानों की ध्‍येय को नजर अंदाज करती रही।
भला हो अनिवार्य एवं निशुल्‍क शिक्षा कानून का जिसने शिक्षक पात्रता परीक्षा लागू कर दिया और इस तरह चयन का अन्‍तिम आधार एकेडमिक मेरिट पर अब सवालिया निशान खड़े होने

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ओले क्यों गिरते हैं?

जानकारी

रिंकी पाण्डेय
ओले क्यों गिरते हैं?

बच्चो, कई बार बारिश के दौरान अचानक पानी की बूंदों के साथ बर्फ के छोटे-छोटे गोले भी गिरते हैं। इन्हें हम ओले कहते हैं। ये ओले आसमान में कैसे बनते हैं और ओले क्यों गिरते हैं? तो आओ ओले के बारे में पूरी बात जानें।

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बच्चों, तुम जानते हो कि बर्फ पानी के जमने से बनता है। अब तुम्हारे मन में ये प्रश्न उठ रहा होगा कि आसमान में ये पानी कैसे बर्फ बन जाता है और फिर गोल-गोले बर्फ के टुकड़ों के रूप में ये धरती पर क्यों गिरते हैं? तुमने जैसा कि पढ़ा होगा कि पानी को जमने के लिए शून्य डिग्री सेल्सियत तापमान होना चाहिए, तुमने फ्रीजर में देखा होगा कि पानी के छोटे-छोटे बूंदें बर्फ के गोले के रूप में जम जाता है, ऐसा ही प्रकृति में होता है। हम जैसे-जैसे समुद्र के किनारे से ऊपर यानी ऊंचाई की ओर बढ़ते हैं, तब जगह के साथ ही तापमान धीरे-धीरे कम होता जाता है। तुम इसे ऐसे समझ सकते हो, लोग गर्मी के मौसम में पहाड़ों पर जाना पसंद करते हैं, क्यों? इसलिए कि पहाड़ पर तापमान कम होता है, यानी मैदान…

जानो पक्षियों के बारे में

जानकारी


बच्चो, इस धरती में कई तरह के पक्षी हैं, तुम्हें जानकर आश्चर्य होगा कि हमिंग बर्ड नाम की पक्षी किसी भी दिशा में उड़ती है, तो कुछ पक्षी ऐसे हैं, जो अपने कमजोर पंख की वजह से उड़ नहीं पाते हैं। चलते हैं पक्षियों के ऐसे अजब-गजब संसार में और जानते हैं कि ये पक्षी कौन हैं?
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हवा में उड़ते हुए तुमने सैकड़ों पक्षियों को देखा होगा। लेकिन कई ऐसे पक्षी भी हैं, जो उड़ नहीं सकते, तो कुछ किसी भी दिशा में उड़ सकते हैं। तुम्हें जानकर हैरानी होगी कि रेटाइट्स बर्ड परिवार से जुड़े विशालकाय पक्षी कभी उड़ा भी करते थे। पर समय गुजरने के साथ-साथ ये जमीन पर रहने लगे। इस कारण से इनका शरीर मोटा होता गया। उड़ान भरने वाले पंख बेकार होते गए और वो छोटे कमजोर पंखनुमा बालों में बदल गए। इनके बारे में तुम जानते हो, शतुर्गमुर्ग, जो ऑस्ट्रेलिया में पाया जाता है। यह उड़ नहीं सकता है लेकिन जमीन पर ये 7० किलोमीटर घंटे की गति से दौड़ सकता है। ऐसे ही कई रेटाइट्स बर्ड परिवार से जुड़े पक्षी की लंबी लिस्ट हैं, जिनमें पेंग्विन, इम्यू, कीवी, बतख आदि आते हैं।

पेंग्विन उड़त…

जोशी भड्डरी को मिले आरक्षण

भारतीय संस्कृति में ज्योतिष का बड़ा महत्व रहा है। ज्योतिष ज्ञान से नक्षत्र विज्ञान की उत्पति हुई है। ज्योतिष में ग्रहों व नक्षत्रों की सटीक गणना की पद्धति का विज्ञान भृगु ऋ़षि ने दिया था, जो भृगुसंहिता में दर्ज है। ब्राह्मणों में भृगु ऋषि के वशंज जोशी भड्डरी जाति, जो ज्योतिष विज्ञान के प्राकाण्ड विद्वान हैं और ये जनमानस में बिना किसी पूर्वाग्रह के ज्योतिष ज्ञान, ग्रह नक्षत्र, हिंदू रीति रिवाज से कर्म का प्रतिपादन करते रहे हैं। ज्योतिष कर्म व पुरोहिती के माध्यम से जन का कल्याण कलांतर से करते आये हैं। भृगु महाऋ़षि के वंशज में भड्डरी महाऋ़षि ने भड्डर संहिता की रचना की, जो ज्योतिष ग्रंथ है।
भड्डरी वंश शनि का दान लेना, प्रेतबाधा का निवारण, ज्योतिष नक्षत्र का ज्ञान यजमानों को देते रहे हैं व उनकी समस्याओं का हल करते रहे हैं। कालांतर से भारत के अनेकों क्षेत्रों में भ्रमण करते हुए आदिवासी क्षेत्रों में भड्डरी जोशी ब्राह्मण, वहां के आदिवासियों को चेला बनाते थे और उनको सही दिशा दिखाते थे। भड्डरी जोशी कलांतर से इसी जीविका से जुड़े रहे हैं। दान—पुण्य पर जिंदा रहने वाले भृगुवंशीय भड्डरी के मन में …