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शिक्षकों की भर्ती में टीईटी मेरिट है तर्कसंगतǃ
शिक्षा के अधिकार कानून के तहत 14 साल तक के बच्‍चों को निश्‍शुल्‍क शिक्षा देना अब राज्‍य की जिम्‍मेदारी है। इस कानून को बने 2 साल हो गये लेकिन अभी उत्‍तर प्रदेश में प्राथमिक शिक्षकों भर्ती प्रक्रिया पूरी नहीं हुई। जबकि पिछली सरकार की भर्ती प्रक्रिया में पेच उलझ गया है। चयन प्रक्रिया टीईटी के मेरिट से होना तय था। लाखों अभ्‍यर्थियों ने इस परीक्षा को उतीर्ण किया और सहायक प्रशिक्षु शिक्षकों के पद के लए अलग अलग 75 जिलों में आवेदन किया। लेकिन वर्तमान में उत्‍तर प्रदेश सरकार इस संबंध में कोई ठोस कदम नहीं उठा रही है। वहीं टीईटी उतीर्ण सरकार की इस बेरूखी से विधान सभा के पास अनशन पर बैठ गए हैं। 30 मार्च से चल रहे इस अनशन का आज 2 अप्रैल को चौथा दिन है लेकिन बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से कोई लिखित आश्‍वासन नहीं मिला। वहीं दूसरे दिन से कई छात्रों की अनशन के दौरान तबीयत बिगड़ गई। अनशनकारियों की मांगे साफ है कि हमने आवेदन किया और उसके मुताबिक परीक्षा उतीर्ण की इसलिए चयन के अधिकार से हमें वंचित नहीं किया जा सकता है। अगर कहीं कुछ लोगों ने गड़बड़ी की है तो उसकी जांच कर ऐसे अभ्‍यर्थियों और दोषी व्‍यक्‍तियों के खिलाफ कड़ी करवाई की जाए।
विज्ञापन के आधार पर ही हो चयन
लगभग हर जिले से अभ्‍यिर्थियों विधान सभा पहुंच रहे हैं और अनशन पर बैठे लोगों को मनोबल बढ़ा रहे हैं। अनशन पर बैठे एक अभ्‍यर्थी से पूछा गया तो उसने बताया कि जब चयन प्रक्रिया के सारे नियम कायदे विज्ञान में छपा था और उसी के आधार पर हम लोगों ने टीईटी परीक्षा उतीर्ण की तो चयन भी विज्ञापन के अनुसार होना चाहिए बल्‍कि ऐसा न करने पर हमारे भविष्‍य से साथ खिलवाड़ होगा। जिसे हम कभी नहीं बर्दाश्‍त कर सकते हैं।

टीईटी अभ्‍यर्थियों का भविष्‍य दांव पर
वहीं यूपी में चयन प्रक्रिया से संबंधित कई परीक्षाएं हमेशा सरकार बनाम उम्‍मीद्‍वार बन जाता है।  जिससे लाखों नौकरी की चाहत रखने वाले ईंमानदार नौजवानों को मायूसी ही मिलती है। सूबे में प्रतियोगी परीक्षाएं और पूर्व की चयन प्रक्रिया को कोई भी नई सरकार आती है तो उसे बदल देती है लेकिन सरकारें यह नहीं सोचती हैं कि इस पर राजनीति करने और विज्ञापन निरस्‍त करने से सरकारी नौकरी के लिए मेंहनत करने वाले बेरोजगारों के जीवन के साथ खिलवाड़ होता है। मामला आखिरकार न्‍यायालय में चला जाता है और न्‍यायलय को निर्णय लेना पड़ता है। जबकि ऐसे मामलों में न्‍यायलय हमेशा बेरोजगारों के हित में फैसला लेती है लेकिन इसके बावजूद मौजूदा समय में सरकार को पहल कर टीईटी परीक्षा की उच्‍च स्‍तरी जांच कराकर शीघ्र ही भर्ती प्रक्रिया शुरू करवानी चाहिए।
आरटीई कानून में टीर्इटी परीक्षा है गणवत्‍ता की कसौटी
इधर आरटीई के तहत जिस तरह उच्‍च गुणवत्‍ता वाली शिक्षा की कवायद शुरू हई है ऐसे में चयन प्रक्रिया को एकेडमिक आधार रखने का कोई उचित उचित तर्क नहीं बनता है। देखा जाये तो अब वह समय आ गया जब चयन के आधार को बदला जाये और टीईटी के मेरिट से शिक्षकों की नियुक्‍ति होने से अलग–अलग बोर्ड और यूनिवर्सिटी के मार्किंग प्रथा से होने वाले नुकसान की बहस पर हमेशा के विराम लग जाएगा। जबकि जानकारों का भी यही मानना है कि आरटीई कानून के तहत टीईटी के मेरिट के आधार पर चयन प्रक्रिया तर्कसंगत है इससे बेहतर शिक्षक मिलेंगे।

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ओले क्यों गिरते हैं?

जानकारी

रिंकी पाण्डेय
ओले क्यों गिरते हैं?

बच्चो, कई बार बारिश के दौरान अचानक पानी की बूंदों के साथ बर्फ के छोटे-छोटे गोले भी गिरते हैं। इन्हें हम ओले कहते हैं। ये ओले आसमान में कैसे बनते हैं और ओले क्यों गिरते हैं? तो आओ ओले के बारे में पूरी बात जानें।

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बच्चों, तुम जानते हो कि बर्फ पानी के जमने से बनता है। अब तुम्हारे मन में ये प्रश्न उठ रहा होगा कि आसमान में ये पानी कैसे बर्फ बन जाता है और फिर गोल-गोले बर्फ के टुकड़ों के रूप में ये धरती पर क्यों गिरते हैं? तुमने जैसा कि पढ़ा होगा कि पानी को जमने के लिए शून्य डिग्री सेल्सियत तापमान होना चाहिए, तुमने फ्रीजर में देखा होगा कि पानी के छोटे-छोटे बूंदें बर्फ के गोले के रूप में जम जाता है, ऐसा ही प्रकृति में होता है। हम जैसे-जैसे समुद्र के किनारे से ऊपर यानी ऊंचाई की ओर बढ़ते हैं, तब जगह के साथ ही तापमान धीरे-धीरे कम होता जाता है। तुम इसे ऐसे समझ सकते हो, लोग गर्मी के मौसम में पहाड़ों पर जाना पसंद करते हैं, क्यों? इसलिए कि पहाड़ पर तापमान कम होता है, यानी मैदान…

जानो पक्षियों के बारे में

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बच्चो, इस धरती में कई तरह के पक्षी हैं, तुम्हें जानकर आश्चर्य होगा कि हमिंग बर्ड नाम की पक्षी किसी भी दिशा में उड़ती है, तो कुछ पक्षी ऐसे हैं, जो अपने कमजोर पंख की वजह से उड़ नहीं पाते हैं। चलते हैं पक्षियों के ऐसे अजब-गजब संसार में और जानते हैं कि ये पक्षी कौन हैं?
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हवा में उड़ते हुए तुमने सैकड़ों पक्षियों को देखा होगा। लेकिन कई ऐसे पक्षी भी हैं, जो उड़ नहीं सकते, तो कुछ किसी भी दिशा में उड़ सकते हैं। तुम्हें जानकर हैरानी होगी कि रेटाइट्स बर्ड परिवार से जुड़े विशालकाय पक्षी कभी उड़ा भी करते थे। पर समय गुजरने के साथ-साथ ये जमीन पर रहने लगे। इस कारण से इनका शरीर मोटा होता गया। उड़ान भरने वाले पंख बेकार होते गए और वो छोटे कमजोर पंखनुमा बालों में बदल गए। इनके बारे में तुम जानते हो, शतुर्गमुर्ग, जो ऑस्ट्रेलिया में पाया जाता है। यह उड़ नहीं सकता है लेकिन जमीन पर ये 7० किलोमीटर घंटे की गति से दौड़ सकता है। ऐसे ही कई रेटाइट्स बर्ड परिवार से जुड़े पक्षी की लंबी लिस्ट हैं, जिनमें पेंग्विन, इम्यू, कीवी, बतख आदि आते हैं।

पेंग्विन उड़त…

जोशी भड्डरी को मिले आरक्षण

भारतीय संस्कृति में ज्योतिष का बड़ा महत्व रहा है। ज्योतिष ज्ञान से नक्षत्र विज्ञान की उत्पति हुई है। ज्योतिष में ग्रहों व नक्षत्रों की सटीक गणना की पद्धति का विज्ञान भृगु ऋ़षि ने दिया था, जो भृगुसंहिता में दर्ज है। ब्राह्मणों में भृगु ऋषि के वशंज जोशी भड्डरी जाति, जो ज्योतिष विज्ञान के प्राकाण्ड विद्वान हैं और ये जनमानस में बिना किसी पूर्वाग्रह के ज्योतिष ज्ञान, ग्रह नक्षत्र, हिंदू रीति रिवाज से कर्म का प्रतिपादन करते रहे हैं। ज्योतिष कर्म व पुरोहिती के माध्यम से जन का कल्याण कलांतर से करते आये हैं। भृगु महाऋ़षि के वंशज में भड्डरी महाऋ़षि ने भड्डर संहिता की रचना की, जो ज्योतिष ग्रंथ है।
भड्डरी वंश शनि का दान लेना, प्रेतबाधा का निवारण, ज्योतिष नक्षत्र का ज्ञान यजमानों को देते रहे हैं व उनकी समस्याओं का हल करते रहे हैं। कालांतर से भारत के अनेकों क्षेत्रों में भ्रमण करते हुए आदिवासी क्षेत्रों में भड्डरी जोशी ब्राह्मण, वहां के आदिवासियों को चेला बनाते थे और उनको सही दिशा दिखाते थे। भड्डरी जोशी कलांतर से इसी जीविका से जुड़े रहे हैं। दान—पुण्य पर जिंदा रहने वाले भृगुवंशीय भड्डरी के मन में …