मंगलवार, 3 अप्रैल 2012


शिक्षकों की भर्ती में टीईटी मेरिट है तर्कसंगतǃ
शिक्षा के अधिकार कानून के तहत 14 साल तक के बच्‍चों को निश्‍शुल्‍क शिक्षा देना अब राज्‍य की जिम्‍मेदारी है। इस कानून को बने 2 साल हो गये लेकिन अभी उत्‍तर प्रदेश में प्राथमिक शिक्षकों भर्ती प्रक्रिया पूरी नहीं हुई। जबकि पिछली सरकार की भर्ती प्रक्रिया में पेच उलझ गया है। चयन प्रक्रिया टीईटी के मेरिट से होना तय था। लाखों अभ्‍यर्थियों ने इस परीक्षा को उतीर्ण किया और सहायक प्रशिक्षु शिक्षकों के पद के लए अलग अलग 75 जिलों में आवेदन किया। लेकिन वर्तमान में उत्‍तर प्रदेश सरकार इस संबंध में कोई ठोस कदम नहीं उठा रही है। वहीं टीईटी उतीर्ण सरकार की इस बेरूखी से विधान सभा के पास अनशन पर बैठ गए हैं। 30 मार्च से चल रहे इस अनशन का आज 2 अप्रैल को चौथा दिन है लेकिन बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से कोई लिखित आश्‍वासन नहीं मिला। वहीं दूसरे दिन से कई छात्रों की अनशन के दौरान तबीयत बिगड़ गई। अनशनकारियों की मांगे साफ है कि हमने आवेदन किया और उसके मुताबिक परीक्षा उतीर्ण की इसलिए चयन के अधिकार से हमें वंचित नहीं किया जा सकता है। अगर कहीं कुछ लोगों ने गड़बड़ी की है तो उसकी जांच कर ऐसे अभ्‍यर्थियों और दोषी व्‍यक्‍तियों के खिलाफ कड़ी करवाई की जाए।
विज्ञापन के आधार पर ही हो चयन
लगभग हर जिले से अभ्‍यिर्थियों विधान सभा पहुंच रहे हैं और अनशन पर बैठे लोगों को मनोबल बढ़ा रहे हैं। अनशन पर बैठे एक अभ्‍यर्थी से पूछा गया तो उसने बताया कि जब चयन प्रक्रिया के सारे नियम कायदे विज्ञान में छपा था और उसी के आधार पर हम लोगों ने टीईटी परीक्षा उतीर्ण की तो चयन भी विज्ञापन के अनुसार होना चाहिए बल्‍कि ऐसा न करने पर हमारे भविष्‍य से साथ खिलवाड़ होगा। जिसे हम कभी नहीं बर्दाश्‍त कर सकते हैं।

टीईटी अभ्‍यर्थियों का भविष्‍य दांव पर
वहीं यूपी में चयन प्रक्रिया से संबंधित कई परीक्षाएं हमेशा सरकार बनाम उम्‍मीद्‍वार बन जाता है।  जिससे लाखों नौकरी की चाहत रखने वाले ईंमानदार नौजवानों को मायूसी ही मिलती है। सूबे में प्रतियोगी परीक्षाएं और पूर्व की चयन प्रक्रिया को कोई भी नई सरकार आती है तो उसे बदल देती है लेकिन सरकारें यह नहीं सोचती हैं कि इस पर राजनीति करने और विज्ञापन निरस्‍त करने से सरकारी नौकरी के लिए मेंहनत करने वाले बेरोजगारों के जीवन के साथ खिलवाड़ होता है। मामला आखिरकार न्‍यायालय में चला जाता है और न्‍यायलय को निर्णय लेना पड़ता है। जबकि ऐसे मामलों में न्‍यायलय हमेशा बेरोजगारों के हित में फैसला लेती है लेकिन इसके बावजूद मौजूदा समय में सरकार को पहल कर टीईटी परीक्षा की उच्‍च स्‍तरी जांच कराकर शीघ्र ही भर्ती प्रक्रिया शुरू करवानी चाहिए।
आरटीई कानून में टीर्इटी परीक्षा है गणवत्‍ता की कसौटी
इधर आरटीई के तहत जिस तरह उच्‍च गुणवत्‍ता वाली शिक्षा की कवायद शुरू हई है ऐसे में चयन प्रक्रिया को एकेडमिक आधार रखने का कोई उचित उचित तर्क नहीं बनता है। देखा जाये तो अब वह समय आ गया जब चयन के आधार को बदला जाये और टीईटी के मेरिट से शिक्षकों की नियुक्‍ति होने से अलग–अलग बोर्ड और यूनिवर्सिटी के मार्किंग प्रथा से होने वाले नुकसान की बहस पर हमेशा के विराम लग जाएगा। जबकि जानकारों का भी यही मानना है कि आरटीई कानून के तहत टीईटी के मेरिट के आधार पर चयन प्रक्रिया तर्कसंगत है इससे बेहतर शिक्षक मिलेंगे।