रविवार, 1 अप्रैल 2012

टीईटी मेरिट से ही मिलेंगे अच्‍छे शिक्षक

टीईटी मेरिट से ही मिलेंगे अच्‍छे शिक्षक

उत्‍तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी टीईटी को रदृ करने की खबरों से टीईटी उतीर्ण छात्रों में रोष है। पिछली सरकार ने प्राथमिक शिक्षक के लिए 72825 पद के विज्ञापन निकाला था। लेकिन सरकार बदलते ही निर्णय बदलने की संभावना के चलते टीईटी उतीर्ण अभ्‍यर्थियों का भविष्‍य दांव पर लग गया है।

    विज्ञापन में टीईटी मेरिट के आधार पर चयन की बात की गई है। जबकि इसके पूर्व प्राथमिक विद्‍यालयों में चयन का आधार एकेडमिक मेरिट था। जबकि नई सरकार टीईटी मेरिट से होने वाली चयन प्रक्रिया को बदलने की तैयारी में है। बता दें की इससे पहले भी एकेडमिक मेरिट के चयन के आधार पर प्राथमिक टीचरों की भर्ती हो चुकी है। जिसमें यूपी बोर्ड से हाईस्‍कूल इण्‍टर करने वाले छात्र सीबीएससी  बोर्ड की तुलना में एकेडमिक मेरिट मे काफी पीछे रह गये। ऐसे बीएड उतीर्ण उम्‍मीद्‍वार जिनका किसी कारण से एकेडमिक मेरिट कम है। उन्‍होंने अपनी एकेडमिक मेरिट से नौकरी मिलने की संभावना छोड़ चुके थे। लेकिन शिक्षा अनिवार्य कानून के तहत शिक्षक पात्रता परीक्षा अनिवार्य होने से और टीईटी के मेरिट या फिर किसी प्रतियोगी परीक्षा के प्रदर्शन पर सरकारी टीचर बनने के लिए इन्‍होंने आवेदन किया विज्ञापन के शर्तों के मुताबिक टीईटी परीक्षा की तैयारी की और उतीर्ण हुए लेकिन जब नौकरी की बारी आई तो टीईटी में धांधली के आरोप लगने लगे। विज्ञापन को चुनौती दी गई और विज्ञापन पर रोक लग गई। इस धांधली में माध्‍यमिक शिक्षा बोर्ड के कई अधिकारी घेरे में आ गये। जबकि इस परीक्षा में धांधली परिणाम निकालते समय हुई जिससे जांच द्वारा पकड़ा जा सकता है। वहीं बेसिक शिक्षा विभाग से इस परीक्षा को रदृद करने और नियम बदलने की खबरें आ रही हैं जिस पर कितनी सच्‍चाई है वह कुछ दिनों में पता चल जाएगा। लेकिन इन सब से टीईटी छात्र आहत हैं। मानसिक और शारीरिक और आर्थिक रूप से ठगे महसूस कर रहे हैं।
   
टीईटी को रद्द करने की सजा बेरोजगारों को क्‍योंॽ
    बार–बार यही सवाल उठता है कि आखिर सरकार की नकामी की सजा बेरोजगारों की कब तक मिलती रहेगी। नौकरी के लिए आयोजित शिक्षा विभाग में परीक्षाएं क्‍यों भ्रष्‍टाचार के भेट चढ़ जाती हैं। इसके बाद बड़ी आसानी से परीक्षा रदृ करे अपनी जिम्‍मेदारियों से पल्‍ला झाड़ लिया जाता है। जिनको साफ सुथरी परीक्षा कराने की जिम्‍मदारी सौंपी गई वही लोगों ने टीईटी परीक्षा में धन उगाही की तो उन लोगों का नाम सामने आना चाहिए। साथ ही इस परीक्षा की निश्‍पक्ष जांच सीबीआई से करानी चाहिए ताकी इनके पीछे के लोगों का पर्दाफाश किया जा सके। लेकिन बिना ठोस जांच के परीक्षा निरस्‍त करने से और चयन प्रक्रिया को बदलने से कुछ नहीं होने वाला बल्‍कि इन परीक्षाओं में धांधली करने वालों का मनोबल बढ़ेगा और अगली परीक्षाओं को भी प्रभावित करेंगे।
प्राथमिक शिक्षक चयन के सही नियम के लिए कमेटी बनाई जाये
    अगर सरकार में थोड़ी भी इच्‍छा शक्‍ति है तो टीईटी और इसके चयन पर गंभीर विचार करना चाहिए। इसके लिए रिटायर्ड जज और शिक्षाविद्‍वानों की एक कमेटी बनाई जाए और अपनी रिपोर्ट दें जिनमें निम्‍न बिंदुओं पर गौर हो कि चयन में एकेडमिक आधार से क्‍या मेधावी शिक्षक मिल पायेंगेॽ जिस तरह से सभी विवि की अलग अलग मार्किंग प्रणाली है। तो कम अंक वाला छात्र तो पीछे रह जाएगा जबकि उसने टीईटी में टाप ही किया होǃ
    दूसरी बात की यूपी बोर्ड और बीएड में जिस तरह से नकल हाने की खबरे अखबारों में और चैनलों में साक्षात् दिखती है। यह बातें किसी से छ्‍पिी नहीं की नकल पर रोक पाने में बोर्ड किस तरह से असमर्थ है।
    तीसरी बात की जब सभी आयोग चयन के लिए एक प्रतियोगी परीक्षा के मेरिट को चयन का आधार बनाते हैं तो प्राथमिक शिक्षक की भर्ती में ऐसा क्‍यों नहीं हो सकता है।         चौथी बात शिक्षा की गुणवत्‍ता कैसे बढ़ाना है। हम अच्‍छी तरह से जानते है कि वर्तमान में माध्‍यमिक और उच्‍च शिक्षा में नकल माफिया का वर्चस्‍व और वास्‍तविक पढ़ाई का माहौल भी नहीं है केवल छात्रों को ज्‍यादा से ज्‍यादा अंक बटोरने की तरकीब ही सीखाई जाती है। ऐसे में केवल एकेडमिक मेरिट से हम अच्‍छे शिक्षक का चयन कर पायेंगे। हमें एक ऐसे पैमाने की जरूरत है। जो सर्वगुण संपन्‍न शिक्षकों को विद्‍यालयों में दे पायें न कि केवल दोयम दर्जे के टीचर इसीलिए चयन के आधार को आज बदलना है यानी साफ है कि सबके लिए एक ही चयन का आधार हो और वह टीईटी के मेरिट से संभव है या काई प्रतियोगी परीक्षा। बस सरकार को चाहिए की इसमें पारदर्शिता रखें और इस तरह मेधावियों का चयन होगा। जिसके परीणाम यह होगा की हमारे प्राथमिक विद्‍यालय में सर्वगुणसंपन्‍न शिक्षक मिलेंगे।