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शिक्षा अधिकार कानून के दो साल बाद भी नहीं चेती राज्य सरकारें


शिक्षा अधिकार कानून के दो साल बाद भी नहीं चेती राज्य सरकारें
     हमारे देश की शिक्षा व्यवस्था हाशिए पर है। शिक्षा अधिकार कानून के लागू होने के दो साल बाद भी हमारी सरकारें सो रही हैं। शिक्षा की गुणवत्ता के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा का आयोजन करने का प्रावधान है। लेकिन अभी तक शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी टीईटी के बाद शिक्षकों का चयन नहीं हो पाया है। इससे पता चलता है कि राज्य सरकारें शिक्षा जैसे जरूरी मुद्दे पर सरकार मौन है। उत्तर प्रदेश में टीईटी परीक्षा और प्राईमरी शिक्षक भर्ती के विज्ञापन पर पेच उलझा हआ है। वहीं राजस्थान टीईटी और शिक्षक चयन में भी वहां की सरकार कोई ठोस पहल नहीं कर रही है। हरियाणा टीईटी और चयन प्रक्रिया को लेकर राज्य सरकार और छात्रों के बीच मतभेद है। राज्यों का हाल ये तब है जब एनसीटीई के गाइड लाइन के तहत प्राथमिक और उच्च प्राथमिक शिक्षकों की योग्यता स्पष्ट है। लेकिन राज्य सरकार की इच्छा शक्‍ति की कमी के चलते भर्ती प्रक्रिया बाधित है। भर्ती प्रक्रिया और चयन के मामलों का निपटारा अब कोर्ट के हाथों में है। शिक्षकों के चयन संबधित सरकार के उचित फैसला न लेने से मामला कोर्ट में चला जाता है। जिससे नौकरी की आस लगाये हजारों बेरोजगार केवल इंतिजार करना पड़ता है। और वहीं प्राथमिक सरकारी स्कूलों में टीचरों का अकाल है। ऐसे में शिक्षा के अधिकार कानून का पालन नहीं हो रहा है। राज्य सरकार जल्द टीचरों की नियुक्‍ति नहीं की तो प्राथमिक स्कूलों की पढाई की स्थिति और भी बत्तर हो जाएगी। इसके लिए कौन जिम्मेदार होगाॽ
उत्तर प्रदेश में उलझी है– टीईटी और शिक्षकों की नियुक्‍ति प्रक्रिया
इन दिनों उत्तर प्रदेश में नवगठित सरकार को टीईटी और पिछली सरकार के प्राथमिक शिक्षक की नियुक्‍ति के प्रक्रिया को पूरा करने का दायित्व है। बता दें कि सबके लिए अनिवार्य शिक्षा के अधिकार कानून के लिये सरकार को इस लटकी हुई प्रक्रिया को सुचारू रूप से जल्द से जल्द शिक्षकों की नियुक्‍ति करनी है। लेकिन पिछली सरकार ने टीईटी के नंबरों से चयन करने का महत्वपूर्ण कदम उठाया और अध्यापक नियमावली में परिवर्तन कर दिया जो एक सरहानीय कदम था क्योंकि पहली बार विशिष्ट बीटीसी चयन किसी परीक्षा के माध्यम से हो रहा है लेकिन टीईटी मेरिट के आधार को चुनौती हाईकोर्ट में दी गई। जहां इसके खिलाफ याचिका खारिज कर दी गई और हाईकोर्ट इलाहाबाद ने टीईटी मेरिट की तारीफ भी की। वहीं अभी कुछ कहना जल्द बाजी होगी। टीईटी उतीर्ण छात्रों ने मुख्यमंत्री से इस प्रक्रिया को जल्द से जल्द टीईटी मेरिट से कराने के लिए कहा। लेकिन अभी मुख्यमंत्री सचिव के रिपोर्ट के बाद ही कोई निर्णय लेंगे। देखना है कि यह निर्णय टीईटी के मेरिट से चयन प्रक्रिया के पक्ष में आती है या पिछली सरकार के नियमों को पलट कर अधिक वोट बैंक की राजनीति से प्रेरित होती है। जाहिर है अगर पिछली सरकार के समय निकाले गए विज्ञापन के अनुसार चयन प्रक्रिया टीईटी मेरिट से कराकर अब तक के सबसे बड़े विवाद का हल इंमानदारी से निकालती है या फिर एक बार नकल माफियाओं के हाथ में नंबरों से पैसा बनाने का गोरखधंधा के खेल खेलने के लिए सरकार मौका दे देगी। ये तो कुछ दिनों में साफ हो जाएगा।

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ओले क्यों गिरते हैं?

जानकारी

रिंकी पाण्डेय
ओले क्यों गिरते हैं?

बच्चो, कई बार बारिश के दौरान अचानक पानी की बूंदों के साथ बर्फ के छोटे-छोटे गोले भी गिरते हैं। इन्हें हम ओले कहते हैं। ये ओले आसमान में कैसे बनते हैं और ओले क्यों गिरते हैं? तो आओ ओले के बारे में पूरी बात जानें।

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बच्चों, तुम जानते हो कि बर्फ पानी के जमने से बनता है। अब तुम्हारे मन में ये प्रश्न उठ रहा होगा कि आसमान में ये पानी कैसे बर्फ बन जाता है और फिर गोल-गोले बर्फ के टुकड़ों के रूप में ये धरती पर क्यों गिरते हैं? तुमने जैसा कि पढ़ा होगा कि पानी को जमने के लिए शून्य डिग्री सेल्सियत तापमान होना चाहिए, तुमने फ्रीजर में देखा होगा कि पानी के छोटे-छोटे बूंदें बर्फ के गोले के रूप में जम जाता है, ऐसा ही प्रकृति में होता है। हम जैसे-जैसे समुद्र के किनारे से ऊपर यानी ऊंचाई की ओर बढ़ते हैं, तब जगह के साथ ही तापमान धीरे-धीरे कम होता जाता है। तुम इसे ऐसे समझ सकते हो, लोग गर्मी के मौसम में पहाड़ों पर जाना पसंद करते हैं, क्यों? इसलिए कि पहाड़ पर तापमान कम होता है, यानी मैदान…

जानो पक्षियों के बारे में

जानकारी


बच्चो, इस धरती में कई तरह के पक्षी हैं, तुम्हें जानकर आश्चर्य होगा कि हमिंग बर्ड नाम की पक्षी किसी भी दिशा में उड़ती है, तो कुछ पक्षी ऐसे हैं, जो अपने कमजोर पंख की वजह से उड़ नहीं पाते हैं। चलते हैं पक्षियों के ऐसे अजब-गजब संसार में और जानते हैं कि ये पक्षी कौन हैं?
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हवा में उड़ते हुए तुमने सैकड़ों पक्षियों को देखा होगा। लेकिन कई ऐसे पक्षी भी हैं, जो उड़ नहीं सकते, तो कुछ किसी भी दिशा में उड़ सकते हैं। तुम्हें जानकर हैरानी होगी कि रेटाइट्स बर्ड परिवार से जुड़े विशालकाय पक्षी कभी उड़ा भी करते थे। पर समय गुजरने के साथ-साथ ये जमीन पर रहने लगे। इस कारण से इनका शरीर मोटा होता गया। उड़ान भरने वाले पंख बेकार होते गए और वो छोटे कमजोर पंखनुमा बालों में बदल गए। इनके बारे में तुम जानते हो, शतुर्गमुर्ग, जो ऑस्ट्रेलिया में पाया जाता है। यह उड़ नहीं सकता है लेकिन जमीन पर ये 7० किलोमीटर घंटे की गति से दौड़ सकता है। ऐसे ही कई रेटाइट्स बर्ड परिवार से जुड़े पक्षी की लंबी लिस्ट हैं, जिनमें पेंग्विन, इम्यू, कीवी, बतख आदि आते हैं।

पेंग्विन उड़त…

आओ जानें डायनासोर की दुनिया

अभिषेक कांत पाण्डेय
स्टीवन स्पीलबर्ग की जुरासिक पार्क फ्रेंचाइजी की नई फिल्म 'जुरासिक वर्ल्ड’ इन दिनों खूब धूम मचा रही है। इससे पहले भी एक फिल्म 'जुरासिक पार्क’ आई थी, जिसने पूरी दुनिया में डायनासोर नाम के जीव से परिचय कराया था। तुमने भी वह फिल्म देखी होगी, आखिर कहां चले गए ये डायनासोर, कैसे हुआ इनका अंत... इनके बारे में तुम अवश्य जानना चाहोगे।


कई तरह के थे डायनासोर

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डायनासोर की और बातें
.इनके अब तक 5०० वंशों और 1००० से अधिक प्रजातियों की पहचान हुई है।
.कुछ डायनासोर शाकाहारी, तो कुछ मांसाहारी होते थे जबकि कुछ डायनासारे दो पैरों वाले, तो कुछ चार पैरों वाले थे।
.डायनासोर बड़े होते थे, पर कुछ प्रजातियों का आकार मानव के बराबर, तो उससे भी छोटे होते…