शुक्रवार, 20 अप्रैल 2012

शिक्षा अधिकार कानून के दो साल बाद भी नहीं चेती राज्य सरकारें


शिक्षा अधिकार कानून के दो साल बाद भी नहीं चेती राज्य सरकारें
     हमारे देश की शिक्षा व्यवस्था हाशिए पर है। शिक्षा अधिकार कानून के लागू होने के दो साल बाद भी हमारी सरकारें सो रही हैं। शिक्षा की गुणवत्ता के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा का आयोजन करने का प्रावधान है। लेकिन अभी तक शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी टीईटी के बाद शिक्षकों का चयन नहीं हो पाया है। इससे पता चलता है कि राज्य सरकारें शिक्षा जैसे जरूरी मुद्दे पर सरकार मौन है। उत्तर प्रदेश में टीईटी परीक्षा और प्राईमरी शिक्षक भर्ती के विज्ञापन पर पेच उलझा हआ है। वहीं राजस्थान टीईटी और शिक्षक चयन में भी वहां की सरकार कोई ठोस पहल नहीं कर रही है। हरियाणा टीईटी और चयन प्रक्रिया को लेकर राज्य सरकार और छात्रों के बीच मतभेद है। राज्यों का हाल ये तब है जब एनसीटीई के गाइड लाइन के तहत प्राथमिक और उच्च प्राथमिक शिक्षकों की योग्यता स्पष्ट है। लेकिन राज्य सरकार की इच्छा शक्‍ति की कमी के चलते भर्ती प्रक्रिया बाधित है। भर्ती प्रक्रिया और चयन के मामलों का निपटारा अब कोर्ट के हाथों में है। शिक्षकों के चयन संबधित सरकार के उचित फैसला न लेने से मामला कोर्ट में चला जाता है। जिससे नौकरी की आस लगाये हजारों बेरोजगार केवल इंतिजार करना पड़ता है। और वहीं प्राथमिक सरकारी स्कूलों में टीचरों का अकाल है। ऐसे में शिक्षा के अधिकार कानून का पालन नहीं हो रहा है। राज्य सरकार जल्द टीचरों की नियुक्‍ति नहीं की तो प्राथमिक स्कूलों की पढाई की स्थिति और भी बत्तर हो जाएगी। इसके लिए कौन जिम्मेदार होगाॽ
उत्तर प्रदेश में उलझी है– टीईटी और शिक्षकों की नियुक्‍ति प्रक्रिया
इन दिनों उत्तर प्रदेश में नवगठित सरकार को टीईटी और पिछली सरकार के प्राथमिक शिक्षक की नियुक्‍ति के प्रक्रिया को पूरा करने का दायित्व है। बता दें कि सबके लिए अनिवार्य शिक्षा के अधिकार कानून के लिये सरकार को इस लटकी हुई प्रक्रिया को सुचारू रूप से जल्द से जल्द शिक्षकों की नियुक्‍ति करनी है। लेकिन पिछली सरकार ने टीईटी के नंबरों से चयन करने का महत्वपूर्ण कदम उठाया और अध्यापक नियमावली में परिवर्तन कर दिया जो एक सरहानीय कदम था क्योंकि पहली बार विशिष्ट बीटीसी चयन किसी परीक्षा के माध्यम से हो रहा है लेकिन टीईटी मेरिट के आधार को चुनौती हाईकोर्ट में दी गई। जहां इसके खिलाफ याचिका खारिज कर दी गई और हाईकोर्ट इलाहाबाद ने टीईटी मेरिट की तारीफ भी की। वहीं अभी कुछ कहना जल्द बाजी होगी। टीईटी उतीर्ण छात्रों ने मुख्यमंत्री से इस प्रक्रिया को जल्द से जल्द टीईटी मेरिट से कराने के लिए कहा। लेकिन अभी मुख्यमंत्री सचिव के रिपोर्ट के बाद ही कोई निर्णय लेंगे। देखना है कि यह निर्णय टीईटी के मेरिट से चयन प्रक्रिया के पक्ष में आती है या पिछली सरकार के नियमों को पलट कर अधिक वोट बैंक की राजनीति से प्रेरित होती है। जाहिर है अगर पिछली सरकार के समय निकाले गए विज्ञापन के अनुसार चयन प्रक्रिया टीईटी मेरिट से कराकर अब तक के सबसे बड़े विवाद का हल इंमानदारी से निकालती है या फिर एक बार नकल माफियाओं के हाथ में नंबरों से पैसा बनाने का गोरखधंधा के खेल खेलने के लिए सरकार मौका दे देगी। ये तो कुछ दिनों में साफ हो जाएगा।

1 टिप्पणी:

  1. SADAK, BIJALI, PANI PAR TO LOG YOO HI BAHAS KAR LETE HAI PAR SIKCHA KO LEKAR LOG KITANE JAGROOK HAI YE IS LEKH SE ISPAST HOTA HAI...SARKAR KYA JANTA BHI MAUN HAI TO KAHE KI TAKLIF!

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