टीईटी अथ्यर्थियों को नौकरी की जगह मिलता है केवल आश्वासन


आज हाईकोर्ट प्राईमरी शिक्षको को चयन से संबंधित विज्ञापन की सुनवाई १५ मई को कर दी गई है।

आज जनता दरबार में टीईटी अभ्‍यर्थियों को मुख्‍यमंत्री को अश्‍वासन दिया कि जल्‍द ही फैसला लिया जाएगा
लेकिल प्रश्‍न यह उठता है कि अखिर सरकार इस पर निर्णय लेने पर इतना देर क्‍यों कर रही है।
इसके साथ ही जब टीईटी मेरिट से चयन की बातें विज्ञापन में स्‍पष्‍ट थी तो अदालत में मामला केवल अपनू
फायदे को भूनाने में किया जा रहा है तरीख बढ़ना और इस सब टिप्‍पणी तो नहीं की जा सकती है परंतु
अगर हम थोड़ा पीछे जाते हैं तो बातें स्‍पष्‍ट है कि आरटीई के तहत टीईटी परीक्षा पात्रता है और साथ ही
इसके वेटेज का भी महत्‍व है। यानी टीईटी चयन का आधार उचित है। लेकिन सरकार बदलने के बाद
अब इसमें राजनीति साफ झलक रही है। इस समय टीईटी पास तीन लाख की जगह आठ नौ लाख लोग 
इस प्रक्रिया को कैंसिल करने की इच्‍छा रखते हैं। इसी में एक व्‍यक्‍ति ने विज्ञापन को ही चैलेंज कर डाला
और महीनों प्रक्रिया को उलझाये रखा। टीईटी अभ्‍यर्थियों ने हजारों रूपये खर्च कर एक इस परीक्षा में टीईटी मेरिट की प्रक्रिया को जानकर उत्‍साह से आवेदन किया और मेहनत से परीक्षा उतर्ण की अगर इनके साथ प्रक्रिया बदलने की बात आती है या विज्ञापन निरस्‍तकरने की तो जाहीर है कि सीधे जीविका के आधार पर चोट किया जा रहा है यानी की मानवाअधिकार का उल्‍लंघन किया जा रहा है।

सरकार की जिम्‍म्‍ादारी

सरकार को लोकतांत्रिक तरीके से इस पर विचार करना चाहिए की आज टीईटी मेरिट से या कंपटीशन से चयन का तरीका
उचित है क्‍योंकि इससे शिक्षा के क्षेत्र में अच्‍छी प्रतिभा आएगी। जनहित में देखा जाए तो यह प्रक्रिया अच्‍छी है।

जारी रहेनी चाहिए लड़ाई

टीईटी अभ्‍यर्थियों को अपने हक के लिए आंदोलन जारी रखना चाहिए क्‍योंकि मामला राजनीतिक हो रहा है।
जाहीर है कि इस समय इन्‍हें घूमाया जा रहा है ठीक लटटू की तरह। हमारी शिक्षागत निर्णय में राजनीतिक हित ज्‍यादा हावी होती जा रही है। यह परंपरा टीईटी अभ्‍यर्थियों को अपने आंदोलन के माध्‍यम से तोड़ना जरूरी है और टीईटी मेरिट की वकालत करना एक समझदारी है। क्‍योंकि समानता के नियम पर आधारित है।

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