सोमवार, 21 मई 2012

मनरेगा में काम के लए मिल रहा केवल आश्वासन


मनरेगा में काम के लए मिल रहा केवल आश्वासन
      वाराणसी। मनरेगा यानी महात्मा गांधी रोजगार गारंटी कानून के जरिए ग्रामीणों को सौ दिन का रोजगार दिलाकर उनको सम्मान से जीने का हक देती है। लेकिन इस कानून के तहत ग्रामीणों का हक अधिकारी और कर्मचारी खा रहे हैं। प्रधान से लेकर विकास खण्ड अधिकारी की जिम्मेदारी बनती है कि मनरेगा कानून के तहत काम के लिए आवेदन करने वाले को अगले १५ दिनों में रोजगार दें लेकिन हकीकत में ग्रामीणों को उनके इस हक से महरूम किया जा रहा है। इसका जीता जागता उदाहरण वाराणसी के विकास खण्ड काशी विद्यापीठ में देखने को मिल रहा है। नारी संघ की महिला सदस्यों ने मनरेगा कानून के तहत काम के लिए आवेदन किया लेकिन उन्हें काम नहीं मिल रहा है। इन महिलाओं को प्रधान ग्राम सेवक और ब्लाक अधिाकरारी केवल अश्वासन दे रहे हैं।
जाब कार्ड के लिए भटकना पड रहा है
  काशी विद्यापीठ ब्लाक के ग्राम पंचायत मुडादेव की नारी संघ की महिला सदस्यों ने संयुक्त रूप से १९ मार्च २०१२ को जाब कार्ड के लिए आवेदन किया था लेकिन  दो महीने से अधिक समय बीत जाने के बाद भी जाब कार्ड नहीं मिला। नारी संघ की महिला ने मुडादेव ग्राम पंचायत के ग्राम प्रधान व रोजगार सेवक से बात की तो उन्होंने महिलाओं को केवल आश्वासन दिया। इसी ग्राम पंचायत की नारी संघ की सदस्य महिला चंपा देवी का कहना है कि इस संबंध में ब्लाक अधिकारी को अर्जी दी तो भी कोई कार्यवाई नहीं हुई।
मनरेगा में मिला तीन दिन काम बाकी कागज पर हुआ काम
    इसी तरह का मामला वाराणसी के काशी विद्यापीठ ब्लाक के ग्राम पंचायत देल्हना की नारी संघ की महिला सदस्यों ने संयुक्त रूप से काम के लिए आवेदन १३ अप्रैल को दिया लेकिन काम एक महीने के बाद मिला वह भी तीन दिनों के लिए। जब महिलाओं ने प्रधान से पूछा तो उन्होंने बताया कि मनरेगा के तहत केवल दस हजार रूपये का बजट आया है इसीलिए तीन दिन ही काम हुआ है जब बजट आयेगा तब फिर काम होगा। इस पर महिलाओं का कहना है कि मनरेगा के तहत एक बार में बीस से पच्चीस दिन के काम के लिए बजट आता है लेकिन प्रधान ने कागज पर काम दिखाकर अधिकारियों व कर्मचारियों ने पैसे बनाये हैं। इस पर नारी संघ की सदस्य महिलाएं आरटीआई के तहत आय व्यय की जानकारी मांगी है।
मनरेगा योजना नहीं कानून लेकिन छ महीना बाद नहीं मिला काम
वहीं इसी ब्लाक के कुरहुआ ग्राम पंचायत में तो हद हो गई। छह महीने बीत जाने के बाद जाब कार्ड के लिए नारी संघ की महिला सदस्य मंजू देवी सुशीला देवी व शीला देवी सहित दस महिलाओं ने २३ जाब कार्ड के लिए नवंबर २०११ को  आवेदन किया लेकिन आज तक कार्ड नहीं बना। इस पर महिलाओं ने मनरेगा हेल्पलाइन में ११ जनवरी २०१२ को शिकायत दर्ज कराई कंपलेन नं० ३०३१ मिला लेकिन आज तक इनका जाब कार्ड नहीं मिला। मनरेगा में १०० दिन के काम देने की पोल खुल रही है। इन महिलाओं का कहना है कि जब मनरेगा हेल्प लाइन हमारी शिकायत सुनने के बाद काई कार्यवाई नहीं कर रहा है तो हमें काम कौन दिलाएगा। मनरेगा में इस कदर भ्रष्टाचार के चलते गरीब महिलाओं को काम नहीं मिल रही है। प्रधान और ग्राम सेवक के खिलाफ कई  बार शिकायत करने पर ब्लाक अधिाकरी नहीं सुन रहे हैं। ऐसे में इस कानून से हमें लाभ नहीं मिल रहा है केवल कागजों में ही ९० प्रतिशत काम हो रहा है। और हमारे साथ अन्याय हो रहा हमें हमारा हक नहीं मिल रहा है। इसीलिए नारी संघ की सभी ग्राम पंचायत की महिला सदस्य एकजुट होकर ब्लाक आफिस पर धरना प्रदर्शन करने के लिए मजबूर हो जाएंगी।