रविवार, 10 जून 2012

मनरेगा मे केवल तीन दिन रोजगारॽ



अभिषेक कांत पाण्डेय
मनरेगा मे केवल तीन दिन रोजगारॽ
ग्रामीणों को सम्मान से जीने के लिए मनरेगा कानून के तहत १०० दिन के लिए काम मांगने पर काम देने की जिम्मेदारी संबधित अधिकारियों की है। लेकिन हकीकत इससे अलग है। खासतौर पर महिलाओं को मनेरेगा के तहत काम के समय कूल मजदूरों की संख्या के ३३ प्रतिशत की संख्या महिलाओं की होनी चाहिए     लेकिन इसके उलट यह संख्या केवल कागजों पर दिखाकर पूरी की जाती है। इस स्तर पर प्रधान रोजगार सेवक मिली भगत से उत्तर प्रदेश में मनरेगा में रूपयों का हेर–फेर हो रहा है। इस बाबत जब नारी संघ की महिला सदस्यों ने ग्राम प्रधान से कहा जता है तो प्रधान धमकी देकर मामला दबाने की कोशिश करता है। यह सब खेल वाराणासी के काशी विद्यापीठ ब्लाक के ग्राम पंचायतों में धड़ल्ले से चल रहा है। इस पर जब वहां की संगठित १० ग्राम पंचायत की महानारी संघ की महिलाओं ने इस बाबत ब्लाक में शिकायत की तो काम तो मिला केवल तीन दिन के लिए। इस तरह कई बार नारी संघ की  महिला सदस्यों ने इसके बारे में ब्लाक अधिकारी से शिकायत की तो भी को सार्थक हल नहीं मिला। वहीं महिलाओं ने काम के आवेद के बाद केवल तीन दिन का मननेगा के तहत काम मिलता है। जबकि नियमता एक बार काम मागने पर १५ दिन तक काम मिलना चाहिए लेकिन प्रधान व रोजगार सेवक इनके हिस्से के बाकी बारह तेरह दिन के काम को कागजों पर अपने चहतों के नाम पर दिखाकर मिले मजदूरों के पैसे का बंदर बाट किय जा रहा है।
वहीं मनरेगा के तहत अब तक सारे नियम कानून को ताक में रखकर ग्रामीणों का उनके सौ दिन का काम पाने के अधिकार से वंचित किया जा रहा है। इस सबंधं में देखा जाए तो ग्राम प्रधान से लेकर ब्लाक अधिकारी अपने जिम्मेदरियों का निर्वाह केवल कागज में निभा रहें यह कई ग्राम पंचायतों में गठित नारी संघ की  महिलाओं कहना है।
जाब कार्ड के लिए भटकना पड रहा है
  काशी विद्यापीठ ब्लाक के ग्राम पंचायत मुडादेव की नारी संघ की महिला सदस्यों ने संयुक्त रूप से १९ मार्च २०१२ को जाब कार्ड के लिए आवेदन किया था लेकिन  दो महीने से अधिक समय बीत जाने के बाद भी जाब कार्ड नहीं मिला। नारी संघ की महिला ने मुडादेव ग्राम पंचायत के ग्राम प्रधान व रोजगार सेवक से बात की तो उन्होंने महिलाओं को केवल आश्वासन दिया। इसी ग्राम पंचायत की नारी संघ की सदस्य महिला चंपा देवी का कहना है कि इस संबंध में ब्लाक अधिकारी को अर्जी दी तो भी कोई कार्यवाई नहीं हुई।
मनरेगा में मिला तीन दिन काम बाकी कागज पर हुआ काम
    इसी तरह का मामला वाराणसी के काशी विद्यापीठ ब्लाक के ग्राम पंचायत देल्हना की नारी संघ की महिला सदस्यों ने संयुक्त रूप से काम के ए आवेदन १३ अप्रैल को दिया लेकिन काम एक महीने के बाद मिला वह भी तीन दिनों के लिए। जब महिलाओं ने प्रधान से पूछा तो उन्होंने बताया कि मनरेगा के तहत केवल दस हजार रूपये का बजट आया है इसीलिए तीन दिन ही काम हुआ है जब बजट आयेगा तब फिर काम होगा। इस पर महिलाओं का कहना है कि मनरेगा के तहत एक बार में बीस से पच्चीस दिन के काम के लिए बजट आता है लेकिन प्रधान ने कागज पर काम दिखाकर अधिकारियों व कर्मचारियों ने पैसे बनाये हैं। इस पर नारी संघ की सदस्य महिलाएं आरटीआई के तहत आय व्यय की जानकारी मांगी है।
मनरेगा योजना नहीं कानून लेकिन छ महीना बाद नहीं मिला काम
वहीं इसी ब्लाक के कुरहुआ ग्राम पंचायत में तो हद हो गई। छह महीने बीत जाने के बाद जाब कार्ड के लिए नारी संघ की महिला सदस्य मंजू देवी सुशीला देवी व शीला देवी सहित दस महिलाओं ने २३ जाब कार्ड के लिए नवंबर २०११ को  आवेदन किया लेकिन आज तक कार्ड नहीं बना। इस पर महिलाओं ने मनरेगा हेल्पलाइन में ११ जनवरी २०१२ को शिकायत दर्ज कराई कंपलेन नं० ३०३१ मिला लेकिन आज तक इनका जाब कार्ड नहीं मिला। मनरेगा में १०० दिन के काम देने की पोल खुल रही है। इन महिलाओं का कहना है कि जब मनरेगा हेल्प लाइन हमारी शिकायत सुनने के बाद काई कार्यवाई नहीं कर रहा है तो हमें काम कौन दिलाएगा। मनरेगा में इस कदर भ्रष्टाचार के चलते गरीब महिलाओं को काम नहीं मिल रही है। प्रधान और ग्राम सेवक के खिलाफ कई  बार शिकायत करने पर ब्लाक अधिाकरी नहीं सुन रहे हैं। ऐसे में इस कानून से हमें लाभ नहीं मिल रहा है केवल कागजों में ही ९० प्रतिशत काम हो रहा है। और हमारे साथ अन्याय हो रहा हमें हमारा हक नहीं मिल रहा है। इसीलिए नारी संघ की सभी ग्राम पंचायत की महिला सदस्य एकजुट होकर ब्लाक आफिस पर धरना प्रदर्शन करने के लिए मजबूर हो जाएंगी।

बुधवार, 6 जून 2012

और यूपी बोर्ड टापर को नहीं मिल पाएगा दिल्ली के टाप कालेज में प्रवेशॽ


उत्तर प्रदेश माध्यमिक बोर्ड का रिजल्ट आ गया है। अब स्नातक में प्रवेश के लिए छात्रों को विविश्विद्यालय के कट आफ मेरिट में अपना स्थान बनाना होगा। अगर बात करे तो दिल्ली विश्वविद्यालय ओर इसे संबधित मान्यता प्राप्त कालेज में प्रवेश के लिए यूपी बोर्ड का टापर अन्य बोर्ड सीबीसई व आइसीएससी बोर्ड के टापर से पिछड़ जाएगा। यह हम नहीं कह रहे हैं बल्कि हर बोर्ड के टापर की सूची पर नजर डाले तो यहां यूपी बोर्ड के टापर का प्रतिशत ९६ प्रतिशत के लगभग है जबकि अन्य बोर्ड के टापर ९९ प्रतिशत अंक पाकर सबसे आगे हैं। जाहीर है कि दिल्ली के कालेजों में स्नातक में प्रवेश का आधार केवल इंटरमीडिएट के प्रतिशत को देखकर काट आफ बनाया जाएगा तो ऐसे में यूपी बोर्ड का छात्र जो औसत पच्चासी प्रतिशत अंक पाने वाला लाख मेंहनत के बाद सीबीएसई के नब्बे प्रतिशत वालों के आगे उनका एडमिशन नहीं हो पाएगा चाहे वह जितने भी योग्य हो।
यूपी बोर्ड लाख स्टेप मार्किंग का दावा कर ले लेकिन यहां से टाप करने वाला छा़त्र भी एकेडमिक मेरिट से प्रवेश व चयन में सीबीएसी आईसीएसइ बोर्ड के नब्बे प्रतिशत अंक पाए से पीछे रह जाएगा। वहीं सीबीएसई बोर्ड व आईसीएसई बोर्ड के टापर के मुकाबले यूपी बोर्ड के टापर के दस प्रतिशत अंक कम है तो आप सोचिए कैसे दिल्ली के टाप कालेज में स्नताक में यूपी बोर्ड से इंटर पास कैसे प्रवेश प्राप्त कर पाएगा।
ध्यान दे कि ९० से ९५ प्रतिशत अंक पाने वाले सीबीएसई व आर्इसीएसई बोर्ड में तादाद हजारों में है ऐसे  मे यूपी बोर्ड के टापर को मनचाहा अच्छा कालेज दिल्ली में नहीं मिल पाएगा। अब आपही बताइए कि यूपी बोर्ड में ८७ प्रतिशत अंक पाने वाला यूपी बोर्ड छात्र एकेडमिक से चयन में हमेशा सीबीएसई व आर्इसीएसई बोर्ड के ९० प्रतिशत औसत नंबर पाने वाले छात्र से पिछड़ जाएगा चाहे यूपी बोर्ड के ये छात्र कंपटीशन परीक्षा में आईएस व पीसीएस परीक्षा में प्रदर्शन कर अधिकारी बन जाएगा लेकिन यूपी में प्राइमरी शिक्षक नहीं बन पाएगा।
एकेडमिक के प्रतिशत को देखकर दिल्ली विश्वविद्यालय में स्नातक मे प्रवेश देना सही नहीं है क्यों कि हर बोर्ड के अंक देने का आधार अलग–अलग है। यहां तो स्नातक में प्रवेश के लिए एक राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षा के माध्यम से प्रवेश होना  चाहिए । यही बात प्राइमरी टीचर के भर्ती में लागू होती है कि एकेडमिक से चयन का राग आलापने वाले विचारवानों को सोचना चाहिए कि जब हम एक समान परीक्षा प्रणाली नहीं अपना रहें हैं तो ऐस में एकेडमिक का नंबर देख टीचर बनाना सही नहीं है। इससे जाहिर होता है कि यूपी बोर्ड से उतीर्ण लोगों को यूपी में ही टीचर से नौकरी देने से बाहर रखने की नीति बनाई जा रही है। जिसका पुरजोर विराध किया जा रहा है। टीईटी मेरिट से चयन करना न्यायसंगत व संवैधानिक है। सरकार जल्द टीईटी मेरिट से शिक्षकों की भर्ती कर युवा हितैषी होने का प्रमाण दें।

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