सोमवार, 31 दिसंबर 2012

haivaniyat

दिल्ली में हुई घटना के बाद हम आने वाले साल की शुभकामना कैसे दे सकते है देश की बेटी हैवानियात की शिकार हुई और हम आज़ादी के इतने सालो के बाद भी स्त्री की इज़त नहीं करना सीखे   ये हमारी हार है की  हम देश में ऐसे लोगो चुनते है  जो हमारी रक्षा नहीं कर सकते है केवल बयानबाज़ी करते है इस  साल की ये घटना इंसानियत के मुह पर तमाचा है।  कब हम जागेंगे ..........