शनिवार, 26 जनवरी 2013

बदल देंगे भारत की तश्वीर।

हमारी आपकी और सबकी आजादी का पर्व गणतंत्र दिवस हम भारतियों को एक लोकतान्त्रिक देश के निवासी  होने का गर्व देता  है। आज हम आज़ादी से जी रहे हैं  और देश फलफूल रहा है।और इसी के साथ गरीबी, असमानता और कुछ मुट्ठी  भर लोगों के हाथ में ही आजादी है। दो वक्त की रोटी जिन्हें नसीब नहीं वो भी अपने देश की माटी से अपार  प्रेम   रखते हैं । भारत तरक्की   कर रहा  है। स्कूल में बच्चे पढ़ने के लिए जा रहे हैं  पर अफ़सोस उन्हें गुणवक्ता वाली शिक्षा नहीं मिल रही है। बेरोजगारों के लिए कोई मास्टर प्लान  नहीं है इन्हें  किस्मत के भरोसे छोड़ दिया जा रहा  है। रोजी-रोटी का संकट युवाओं  से उनकी  काबलियत को छीन  रहा है। देश बढ़ रहा  है। आधी से ज्यादा आबादी केवल  50 साल से वोट बैंक है, गरीबी हटाओं, बेरोजगारी मिटाओ ये नारा बेईमानी साबित हो रहा  है।
 काले धन पर आन्दोलन को ठंडा कर दिया जाता है। उस पर कोई बहस नहीं होती है। सुरक्षा और कानून का पालन ढंग से नहीं होता है। वीरों  की क़ुरबानी पर भी राजनीति और बयानबाजी  हो जाती है। वंशो की बैशाखी पर हम विश्वाश करने लगे हैं । भ्रस्टाचार का आलम यह है की निवास प्रमाणपत्र बनाने के लिए भी पैसे लिए जाते है।
 गरीब और माध्यम वर्ग के हाथो से क्वालिटी एजुकेशन दूर हो रही है निजी  शिक्षण संस्थान की  फ़ीस देना आम भारतियों के बस की बात नहीं रही। सारी कुप्रथाएं जन्म ले रही हैं  लेकिन इन  सबके बावजूद भारत के नौजवानों से उम्मीद है की बदल देंगे भारत की तश्वीर।

शुक्रवार, 25 जनवरी 2013

चलो मन गंगा जमुना तीरे

संगम शब्द के  उचारण मात्र से हमारे मस्तिष्क में महाकुम्भ की तश्वीर तैर उठती है। इस समय संगम क्षेत्र अपने पूरे रोवाब में है। हर जगह यहाँ संत, महत्मा, आमजन, स्त्री, पुरुष, भजन-कीर्तन -आरती, प्रवचन के साथ पूरी धरा की संस्कृति के साथ भारतीय संस्कृति  का संगम हो रहा है - 

  संगम स्नान में ऐसा सुख है आज
 चलो भाई तीर्थ राज प्रयाग।
        गंगा, यमुना, सरस्वती का ऐसा संगम,
      धुनों पर बज रही हो जैसे सरगम।

संगम तट पर नगर बस चुका  है- अस्पताल, पुलिस स्टेशन, नाव पर पोस्ट बॉक्स भी तैर रही है। चारों ओर का नज़ारा अद्भुत है। शब्दों से बयाँ करना बेईमानी होगी, इस धरा का नज़ारा यहाँ  आकर  ही लिया जा सकता है-

              माघ के बारह वर्षो के बाद कुम्भ में चमक रहा है प्रयागराज।

भारतीय डाक  संगम तट पर 



संत 



अक्षय वट  प्रवेश द्वार 







महाकुम्भ में  सन्यासी 



संगम का दृश 

संगम का दृश 



संगम का  नजारा देख इस धरती में स्वर्ग की काल्पन साकार होती है अस्था का यह मेला ब्रम्हांड में गौरवशाली प्रतीत होता है - मन कह उठता है चलो मन गंगा जमुना तीरे।

शनिवार, 19 जनवरी 2013

टेट की छन्नी से मिलेंगे क्वालिटी टीचर

राईट टू एजुकेशन एक्ट के बाद टेट अनिवार्य अहर्ता परीक्षा है।  टेट कराने की जिम्मेदारी राज्य सरकार की है। टेट के बाद शिक्षा मे  कैरियर का अवसर युवाओ के पास है। मध्यप्रदेश, बिहार, उत्तरप्रदेश, राजस्थान में टीचर की भरती प्रक्रिया  विवादित रही। सही शिक्षा नीति नही होने के कारण  मामला न्यायालय में गया। अखबारों में शिक्षक भरती की ख़बरें अखबार में अपना स्थान बना रही है, यहाँ लाखों बेरोजगार इस लाइन में है। टेट परीक्षा और भरती  की प्रक्रिया के विवादित होते ही हर अख़बार  में खबर बन रही है। पात्रता परीक्षा के लिए अर्हता क्या है? टीचर की भर्ती में चयन का अधार शैक्षिक हो की टेट मेरिट या कोई प्रतियोगी परीक्षा इस पर बहस कम होती  है।


बढ़ी रटने व होमवर्क की  प्रवृति

 इस प्रतियोगिता  के युग में जहाँ पर अलग अलग बोर्ड और यूनिवर्सिटी है जिनके अंक देने की अलग अलग परिपाटी है। अगर शैक्षिक रिकॉर्ड को देखकर ही केवल टीचर बना दिया जाये तो रचनात्मकता का क्या होगा। आज जहाँ वैश्विकरण  के वजह से विज्ञान में भी क्रिएटिव सोच को महत्त्व दिया जाने लागा है वहीं  अमेरिका जैसे विकसित देश अब अपने पाठ्यक्रम  चाहे वह विज्ञानं हो या कला , गणित जैसे बोझिल समझने वाले विषय यहाँ भी रचनात्मकता को महत्त्व दिया जाने लगा है लेकिन हमारे देश की शिक्षा प्रणाली में केवल रटने की प्रवृति और होमवर्क देने की परम्परा बन गयी है। पिछले दो दशको से रटंत प्रशनो के सहारे बोर्ड व यूनिवर्सिटी की परीक्षा पास करने वाले प्राइवेट संस्थान में नौकरी पाने में असफलता ही हाथ लग रही है। एक रिपोर्ट के मुताबिक हमरे यूनिवर्सिटी से पास ग्रेजुएट में 70 परसेंट नौकरी पाने के लायक नहीं है। जबकि इसके अलग भारत में ही  कुछ यूनिवर्सिटी स्किल ग्रेजुएट बना रही है। इस तरह की यूनिवर्सिटी की संख्या गिनी चुनी है। यहाँ पर अंको से अधिक दक्ष बनाने  में विश्वाश रखती है। 

दौर है रचनात्मकता का 
रचनात्मकत के महत्त्व को समझाते हुए  सीबीएससी बोर्ड सतत मूल्यांकन और सभी विषयों में रचनात्मकता को महत्व  दे रही है। केवल एकेडमिक के अंको से चयन से दक्ष शिक्षकों का चयन कर पाना मुश्किल है। जबकि टेट की अवधारणा है  रचनात्मक एवं दक्ष बीएडधारी ही शिक्षक बने।राईट टू एजुकेशन एक्ट लागू करने का मकसद ही यही है कि  योग्य टीचर मिले। जाहिर है कि  पिछले एक दशकों से शिक्षा का निजीकरण हुआ। इधर के  एक दशक से कुछ यूनिवर्सिटी, कालेज डिग्री बांटने की दूकान बन कर रह गई हैं  इसीलिए टेट यानि शिक्षक पात्रता परीक्षा को अनिवार्य किया गया। 
टेट मेरिट ही सही 
किसी देश के भविष्य निर्माता शिक्षक ही  होता है इसलिए टेट एक छन्नी है जहाँ योग्य और कुशल टीचर के चयन में सहायक है। अगर इस फ़िल्टर को हटा दिया गया तो उच्च गुणवता की शिक्षा की बात बेईमानी साबित होगी। शिक्षक भरती में टेट की मेरिट के  चयन से उच्च गुणवता  वाले टीचर मिल जाएँगे।  

शुक्रवार, 18 जनवरी 2013

खबरों में टेट

सबके लिए निःशुल्क शिक्षा कानून यानि आर0 टी 0 एक्ट के लागू क्यों किया गया ताकि सभी को शिक्षा गुणवक्तयुक्त मिले। जिसके लिए टीचर एजीबिलीटी टेस्ट यानि टेट लागू किया गया ताकी दक्ष  शिक्षको का  चयन हो। और वर्तमान में बीएड उपाधी के लिय न्यूनतम योग्यता ही स्नातक या परास्नातक में 50 फीसदी अंको से पास अभ्यर्थी ही बीएड की उपधि प्राप्त कर सकता है। अब हम उड़ती हुई खबरों में चलते है-
पहली खबर- बिना टीईटी वाले बनेंगे बेसिक शिक्षक - कैसे जब टीईटी 60 फीसदी अंको से पास अनिवार्य है तो और इस परीक्षा से बीएड उपाधी धारक की गुणवता का पता चलता है जोकि आर0 टी 0 एक्ट में अनिवार्य अहर्ता है। उत्तर प्रदेश में प्रथम टीईटी परीक्षा में 50 प्रतिशत बीएड उपाधी धारक इस पात्रता परीक्षा को 60 फीसदी अंको से पास नहीं हुए तो ऐसी खबर कहाँ तक तर्कसंगत हो सकती है। 
दूसरी बात की प्राइमरी में बीएड उपाधि धारक टीचर के नियक्ति के लिए पात्र है और जो योग्यता बीएड के लिए है वही प्राइमरी टीचर के लिए है आर 0 टी 0 एक्ट के अनुसार और इसमे टेट पास होना  अनिवार्य है। यानि  बीएड उपाधी के लिय न्यूनतम योग्यता ही स्नातक या परास्नातक में 50 फीसदी अंको से पास अभ्यर्थी। ये सब बाते खबरों में नहीं आती क्योकि जिससे अधिक लोग प्रभावित होते है वही खबर बनती है। खबरों में टेट  

बुधवार, 16 जनवरी 2013

अभी आधी जीत है होगी अब पूरी ...

सोशल मीडिया यानि समाजिक माडिया में उत्तर प्रदेश में टीचर भरती  टेट मेरिट से चयन का मुद्दा हावी रहा जहाँ तर्क के द्वारा अपनी बात रखा जा रहा है लेकिन जिस तरह से गवर्नमेंट बदलने के बाद प्रक्रिया में आ गई विज्ञापन में चयन के अधार को बदल दिया गया। लेकिन सोशल मीडिया में टेट मेरिट और पूर्ण विज्ञापन के अनुसार निउक्ति के लिए फेस बुक में लाखो पोस्ट लिखे गए और आज इस प्रक्रिया में एक नए चरण में  प्रवेश किया है की अब टेट मेरिट और पुराने विज्ञापन की बहाली के लिए  डबल बेंच में अपील करने का रास्ता मिल गया है। ज़ाहिर टेट समर्थक फिर संगठित होकर इस मुहिम में ज़मकर  साथ देंगे क्योंकि  अब हमे न्याय पाने से कोई नहीं रोक सकाता  है। हमारे पास पर्याप्त कारण  है और सोशल मीडिया का सपोर्ट भी  है और हमारे समर्थन में वक्तिगत रूप से ऐसे  लोग भी जो टेट मेरिट से चयन के पक्षधर  उनका कहना है की  चयन प्रक्रिया एकेडेमिक मेरिट से नहीं बल्कि टेट मेरिट से किया जाये।  जिससे योग्य टीचर का चयन हो सके लेकिन यहाँ पर वोट की राजनीती हावी हो रही है और हम फेस बुक के माध्यम से अपनी बात रख एक साथ फिर दूसरी लड़ाई के लिए तैयार  हो। अभी आधी जीत है  और पूरी जीत के लिय हमे आगे बढ़ाना होगा कदम ....क्योकि पाने के लिए सब कुछ है और खोने  के लिए कुछ भी नहीं ..अभी आधी जीत है होगी अब पूरी ...

सोमवार, 14 जनवरी 2013

महाकुम्भ से



महाकुम्भ से

इलाहबाद । कुम्भ नगरी प्रयाग में मकर संक्रांति के दिन लाखो लोगो ने संगम में डुबकी लगाई। श्रदया , अस्था और विश्वास का अदभुत संगम देखने को मिला। शब्द नहीं तश्वीर बोल उठते हैं --






रविवार, 13 जनवरी 2013

महाकुम्भ मेले में संत .......

कुम्भ मेले से ...
मकर संक्रांति का पर्व शुरू और इसी के साथ इलाहाबाद में लगभग दो महीने चलने वाला प्रयाग महाकुम्भ प्रारंभ हो गया है। 13 जनवरी को हमने बात की संत श्री प्रथम मंत्रचार्य परम तपजी महाराज े जो पिछले 5 साल से कुम्भ क्षेत्र में   में अपनी  जप तप में लींन  है। यज्ञ आहूति के माध्यम से लोग का कष्ट दूर कर रहे है। स्वामी परमतप जी को आँखों से  दीखाई नहीं देता है लेकिन भक्तो के हर कष्ट को देख उन्हें दूर कर देते है। इनके यहाँ पहुचे कई भक्त ने हमे बतया की स्वामी जी की कृपा से हमारे दुःख दूर हुवे और हमें आत्मबल और ज्ञान की प्राप्ति हुई। परमतप जी यज्ञ के  हवन कर सभी का दुःख दूर करते है। परम तपजी से बात करने के लिए निम्न नंबर पर सुबह 10 बजे से 1 बजे तक बात  कर सकते है।

संत श्री प्रथम मंत्रचार्य परम तपजी महाराज  मोबाइल नम्बर है- 8127642307,  8127345686,  8127345755
पता है- कली सड़क त्रिवेणी बांध , इलाहाबाद . 

रविवार, 6 जनवरी 2013

महाकुम्भ प्रयाग आपको बुला रहा है ...

कुम्भ मेले की तैयारिया लगभग पूरी हो चुकी है। संगम तट पर सुंदर नगर बस चूका है बस आपके आने का इंतज़ार है। देखा जाये तो कुम्भ मेल आस्था व संस्कृति का प्रतीक है। प्राचीन समय से लोग अपनी सांस्कृतिक  आदान प्रदान के लिए इस मेले में विद्वान जन आते रहे है और आम जन को अपनी ज्ञान रुपी सरस्वती से तरते रहे है। संगम नदियों के साथ ज्ञान, आस्था के साथ धर्म एवं संस्कृति का भी है। पवन गंगा, यमुना के साथ अदृश रुपी सरस्वती हमारी जीवन की आस्था, विश्वाश है। हम अपनी भारती संस्कृति पर इसलिए गर्व करते है। हमारी हर चेतना में गंगा और प्रयाग है। इस महत्मय  नगरी में जैसे देवता विचरण करने लगते है। कुम्भ कलश की कुछ बूंदें हमें जीवन रुपी उर्जा प्रदान कर रही है। हिंदुस्तानी संस्कृति यानि भारतीय और इंडिया का मेल है कुम्भ मेला हमारी उर्जा की पहचान है। देश विदेश से सैलानी व श्रद्धालु अपनी जिज्ञाषा को  शांत करने के लिए इस मेले में आते है। यह परम्परा आज आधुनिकता और तकनीकी के युग में लोगो को सोचने में मजबूर कर देती है। 
अल्लाहाबाद से इलाहबाद और अपने प्राचीन गौरव प्रयाग सभी धर्म और  आस्था के साथ सांस्कृतिक रूप से समृद्धशाली भारत की एकता स्थापित करने के लिए आप सभी जनो को बुला रहा है। आशा है की आप भी अपने जीवन के सौभाग्शाली समय के साक्षी रहेंगे। महाकुम्भ प्रयाग आपको बुला रहा है ...

गुरुवार, 3 जनवरी 2013

ठण्ड के आगोश में

ठण्ड के आगोश में सारे काम धीमी रफ़्तार हो गई जिन्दंगी। नल का पानी भी दुश्मन लगने लगा। सुबह 6 बजे उठना किसी सजा से कम नहीं है। और पेन पकड़ना और उसे पन्ने पर घिसना खेत में हल जोतने से भी अधिक मेहनत का कार्य लगता है। रजाई की याद ठण्ड में बहूत आती है कम से  कम सोचकर ही गर्माहट ली  जा सकती है। सड़क में जलती  अलाव अपने ग्रह के सूरज  से कम नहीं नज़र आता है। सुबह सुबह सूरज को बादलो  में देख मन में ये तसल्ली करता है कि सूरज को ठंडी लग रही है इसलिये बदलो की रजाई ओढ़े हुए है। अब उंगलिया भी ठण्ड के कारन टाइप करने से स्ट्राइक  करने की चेतावनी दे रही  है वही दिमाग का पारा  ठण्ड के कारण  गिर रहा है। शेष अगली ठंडी में ....... 

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नये प्रयोग के रूप में मृच्छकटिकम् नाटक का सफल मंचन

रंगमंच नाटक समीक्षा- अभिषेक कांत पांडेय प्रयागराज। उत्तर मध्य सांस्कृतिक केंद्र के प्रेक्षागृह में  प्रख्यात  संस्कृत नाटक  'मृच्छकट...