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टेट की छन्नी से मिलेंगे क्वालिटी टीचर

राईट टू एजुकेशन एक्ट के बाद टेट अनिवार्य अहर्ता परीक्षा है।  टेट कराने की जिम्मेदारी राज्य सरकार की है। टेट के बाद शिक्षा मे  कैरियर का अवसर युवाओ के पास है। मध्यप्रदेश, बिहार, उत्तरप्रदेश, राजस्थान में टीचर की भरती प्रक्रिया  विवादित रही। सही शिक्षा नीति नही होने के कारण  मामला न्यायालय में गया। अखबारों में शिक्षक भरती की ख़बरें अखबार में अपना स्थान बना रही है, यहाँ लाखों बेरोजगार इस लाइन में है। टेट परीक्षा और भरती  की प्रक्रिया के विवादित होते ही हर अख़बार  में खबर बन रही है। पात्रता परीक्षा के लिए अर्हता क्या है? टीचर की भर्ती में चयन का अधार शैक्षिक हो की टेट मेरिट या कोई प्रतियोगी परीक्षा इस पर बहस कम होती  है।


बढ़ी रटने व होमवर्क की  प्रवृति

 इस प्रतियोगिता  के युग में जहाँ पर अलग अलग बोर्ड और यूनिवर्सिटी है जिनके अंक देने की अलग अलग परिपाटी है। अगर शैक्षिक रिकॉर्ड को देखकर ही केवल टीचर बना दिया जाये तो रचनात्मकता का क्या होगा। आज जहाँ वैश्विकरण  के वजह से विज्ञान में भी क्रिएटिव सोच को महत्त्व दिया जाने लागा है वहीं  अमेरिका जैसे विकसित देश अब अपने पाठ्यक्रम  चाहे वह विज्ञानं हो या कला , गणित जैसे बोझिल समझने वाले विषय यहाँ भी रचनात्मकता को महत्त्व दिया जाने लगा है लेकिन हमारे देश की शिक्षा प्रणाली में केवल रटने की प्रवृति और होमवर्क देने की परम्परा बन गयी है। पिछले दो दशको से रटंत प्रशनो के सहारे बोर्ड व यूनिवर्सिटी की परीक्षा पास करने वाले प्राइवेट संस्थान में नौकरी पाने में असफलता ही हाथ लग रही है। एक रिपोर्ट के मुताबिक हमरे यूनिवर्सिटी से पास ग्रेजुएट में 70 परसेंट नौकरी पाने के लायक नहीं है। जबकि इसके अलग भारत में ही  कुछ यूनिवर्सिटी स्किल ग्रेजुएट बना रही है। इस तरह की यूनिवर्सिटी की संख्या गिनी चुनी है। यहाँ पर अंको से अधिक दक्ष बनाने  में विश्वाश रखती है। 

दौर है रचनात्मकता का 
रचनात्मकत के महत्त्व को समझाते हुए  सीबीएससी बोर्ड सतत मूल्यांकन और सभी विषयों में रचनात्मकता को महत्व  दे रही है। केवल एकेडमिक के अंको से चयन से दक्ष शिक्षकों का चयन कर पाना मुश्किल है। जबकि टेट की अवधारणा है  रचनात्मक एवं दक्ष बीएडधारी ही शिक्षक बने।राईट टू एजुकेशन एक्ट लागू करने का मकसद ही यही है कि  योग्य टीचर मिले। जाहिर है कि  पिछले एक दशकों से शिक्षा का निजीकरण हुआ। इधर के  एक दशक से कुछ यूनिवर्सिटी, कालेज डिग्री बांटने की दूकान बन कर रह गई हैं  इसीलिए टेट यानि शिक्षक पात्रता परीक्षा को अनिवार्य किया गया। 
टेट मेरिट ही सही 
किसी देश के भविष्य निर्माता शिक्षक ही  होता है इसलिए टेट एक छन्नी है जहाँ योग्य और कुशल टीचर के चयन में सहायक है। अगर इस फ़िल्टर को हटा दिया गया तो उच्च गुणवता की शिक्षा की बात बेईमानी साबित होगी। शिक्षक भरती में टेट की मेरिट के  चयन से उच्च गुणवता  वाले टीचर मिल जाएँगे।  

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ओले क्यों गिरते हैं?

जानकारी

रिंकी पाण्डेय
ओले क्यों गिरते हैं?

बच्चो, कई बार बारिश के दौरान अचानक पानी की बूंदों के साथ बर्फ के छोटे-छोटे गोले भी गिरते हैं। इन्हें हम ओले कहते हैं। ये ओले आसमान में कैसे बनते हैं और ओले क्यों गिरते हैं? तो आओ ओले के बारे में पूरी बात जानें।

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बच्चों, तुम जानते हो कि बर्फ पानी के जमने से बनता है। अब तुम्हारे मन में ये प्रश्न उठ रहा होगा कि आसमान में ये पानी कैसे बर्फ बन जाता है और फिर गोल-गोले बर्फ के टुकड़ों के रूप में ये धरती पर क्यों गिरते हैं? तुमने जैसा कि पढ़ा होगा कि पानी को जमने के लिए शून्य डिग्री सेल्सियत तापमान होना चाहिए, तुमने फ्रीजर में देखा होगा कि पानी के छोटे-छोटे बूंदें बर्फ के गोले के रूप में जम जाता है, ऐसा ही प्रकृति में होता है। हम जैसे-जैसे समुद्र के किनारे से ऊपर यानी ऊंचाई की ओर बढ़ते हैं, तब जगह के साथ ही तापमान धीरे-धीरे कम होता जाता है। तुम इसे ऐसे समझ सकते हो, लोग गर्मी के मौसम में पहाड़ों पर जाना पसंद करते हैं, क्यों? इसलिए कि पहाड़ पर तापमान कम होता है, यानी मैदान…

जानो पक्षियों के बारे में

जानकारी


बच्चो, इस धरती में कई तरह के पक्षी हैं, तुम्हें जानकर आश्चर्य होगा कि हमिंग बर्ड नाम की पक्षी किसी भी दिशा में उड़ती है, तो कुछ पक्षी ऐसे हैं, जो अपने कमजोर पंख की वजह से उड़ नहीं पाते हैं। चलते हैं पक्षियों के ऐसे अजब-गजब संसार में और जानते हैं कि ये पक्षी कौन हैं?
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हवा में उड़ते हुए तुमने सैकड़ों पक्षियों को देखा होगा। लेकिन कई ऐसे पक्षी भी हैं, जो उड़ नहीं सकते, तो कुछ किसी भी दिशा में उड़ सकते हैं। तुम्हें जानकर हैरानी होगी कि रेटाइट्स बर्ड परिवार से जुड़े विशालकाय पक्षी कभी उड़ा भी करते थे। पर समय गुजरने के साथ-साथ ये जमीन पर रहने लगे। इस कारण से इनका शरीर मोटा होता गया। उड़ान भरने वाले पंख बेकार होते गए और वो छोटे कमजोर पंखनुमा बालों में बदल गए। इनके बारे में तुम जानते हो, शतुर्गमुर्ग, जो ऑस्ट्रेलिया में पाया जाता है। यह उड़ नहीं सकता है लेकिन जमीन पर ये 7० किलोमीटर घंटे की गति से दौड़ सकता है। ऐसे ही कई रेटाइट्स बर्ड परिवार से जुड़े पक्षी की लंबी लिस्ट हैं, जिनमें पेंग्विन, इम्यू, कीवी, बतख आदि आते हैं।

पेंग्विन उड़त…

आओ जानें डायनासोर की दुनिया

अभिषेक कांत पाण्डेय
स्टीवन स्पीलबर्ग की जुरासिक पार्क फ्रेंचाइजी की नई फिल्म 'जुरासिक वर्ल्ड’ इन दिनों खूब धूम मचा रही है। इससे पहले भी एक फिल्म 'जुरासिक पार्क’ आई थी, जिसने पूरी दुनिया में डायनासोर नाम के जीव से परिचय कराया था। तुमने भी वह फिल्म देखी होगी, आखिर कहां चले गए ये डायनासोर, कैसे हुआ इनका अंत... इनके बारे में तुम अवश्य जानना चाहोगे।


कई तरह के थे डायनासोर

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डायनासोर की और बातें
.इनके अब तक 5०० वंशों और 1००० से अधिक प्रजातियों की पहचान हुई है।
.कुछ डायनासोर शाकाहारी, तो कुछ मांसाहारी होते थे जबकि कुछ डायनासारे दो पैरों वाले, तो कुछ चार पैरों वाले थे।
.डायनासोर बड़े होते थे, पर कुछ प्रजातियों का आकार मानव के बराबर, तो उससे भी छोटे होते…