रविवार, 4 अगस्त 2013

मुसीबत की चाभी सच्चा दोस्त


हमें उम्र के पड़ाव में एक ऐसे इंसान की जरूरत होती है जो हमारे सुख दुख को समझे उसे ही दोस्त कहते हैं। श्रीकृष्ण ने ​सुदामा से अपनी मित्रता निभाई। अमीर—गरीब, जाति व धर्म के बंधन से परे है दोस्ती। इस दुनिया में भीड़ होने के बाद भी आप अकेला हैं, आपके पास सब कुछ हो रूपया—पैसा,बैंक बैलेंस, मां, बाप, पत्नी, बच्चे हैं लेकिन एक सच्चा दोस्त नहीं तो आपकी जिंदगी जिम्मेदारियों के तले खत्म पत्नी की फरमाईश और बच्चें की जिद में ही जिंदगी दफन। दोस्त तो दोस्ती सांय  पांच बजे से दुनियादारी की सीख दोस्त से मिलती है और जादूई पिटारे की तरह आपका दोस्त आपकी मुसीबत का हल भी निकाल लेता है। घर में कोई कार्यक्रम है, शादी, पार्टी, बेचारा दोस्त ही पूरी विश्वसनीयता के साथ लगा रहेगा। वहीं आपके रिश्तेदार तो बस एकही फिराक में कहीं से कमी हो और बना दे तिल का ताड़। अपना दोस्त इन सब चीज़ों से बचाता आपकी नाक भी बचा लेता है। दोस्त हर मुसीबत की चाभी है। 
दोस्त के खाल में चमचों से बचकर रहना चाहिए तिल के ताड़ पर चढ़ा देते हैं। कथाक​थित दोस्त की भूमिका में कहलाने वाले असल में ये चमचे होते हैं जो आपसे अपना उल्लू सीधा करते हैं, आजमाना हो तो अभी फोन उठाइये अपने को मुसीबत में फंसा बताइए और कहिए दोस्त जल्दी से अपनी बाइक लेकर आ जाओं जाम में फंस गया हूं कोई साधन नहीं मिल रहा है तो देखिए तो वे कितने बहाने बतायेगा, अपनी बाइक और पेट्रोल बचाने के लिए। बाइक भाई ले गया, शहर से बाहर गांव में हूं आदि इत्यादि। ये तो छोटी मुसीबत है बड़ी मुसीबत के लिए उसके पास बड़े— बहाने है। 
आप भी सोच रहे दोस्त दोस्त होता है मैं भी यही सोचता हूं और हमेशा अच्छे दोस्तों की कद्र करता हूं कभी— कभी देर रात तक दोस्त की मुसीबत में काम के लिए गया तो मां, बाप, पत्नी सभी लेक्चर देना शुरू कर देते हैं। भाई! मैं सबकी सुनता हूं करता हूं अपने दोस्त के लिए। मेरा कहना है— मित्रम् परमधनम् और श्रीकृष्ण तो सच्चे दोस्त हैं।