सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं
अभिषेक कांत पाण्डेय  5 सितंबर शिक्षक दिवस पर विशेष सामग्री

                गुरू के बिन ज्ञान कहां
कोई भी व्यक्ति बिना गुरू के अधूरा है। महाभारत के युद्ध में विचलित अर्जुन को श्रीकृष्ण ने गीता का ज्ञान दिया जिसके बाद अर्जुन ने सत्य का साथ दिया। इस तरह अर्जून के जीवन का अंधेरा गुरू के ज्ञान के प्रकाश से दूर हो गया और अर्जुन ने श्रीकृष्ण को गुरू के रूप में स्वीकार किया। हमारे देश की संस्कृति में गुरू और शिष्य परंपरा प्राचीनकाल से ही देखने को मिलती है।
मनुष्य को सही राह गुरू ही दिखा सकता है, बिना गुरू के ज्ञान नहीं मिलता है। आज की स्कूली पद्धति में गुरू और शिष्य परंपरा लोप होती जा रही है। विद्या अर्जन जबसे व्यावसायिक हो गई है तब से हमने अपनी संस्कृति व परंपरा को पीछे छोड़ दिया है। पश्चिमी देशों में जिस तरह से स्कूल में छात्रों के द्वारा हिंसक घटनाएं देखने को मिलती हैं और वहीं हमारे देश में भी छात्रों और गुरूओं के कथित व्यवहार हमारे समाज में स्वीकृत नहीं है। भारतीय संस्कृति और परंपरा के विरूद्ध है।
यह माना जाता है कि किसी देश का विकास उसके स्कूलों में होता है जहां विद्यार्थी ज्ञान के साथ सही इंसान बनने की सीख लेते हैं, लेकिन जब गुरू ही विचलित हो तो अर्जुन को ज्ञान कहा से दे सकता है। गुरू व शिष्य परंपरा में हमें ज्ञान के साथ नैतिकता, सदाचार की शिक्षा भी मिलती है। अफसोस कि हमारी वर्तमान शिक्षा पद्धति में नैतिक मूल्यों का महत्व कम होता जा रहा है।

सर्वपल्ली राधाकृष्णनन जो भारतीय संस्कृति के मनीषी और  शिक्षाविद्व थे उनके जन्मदिन पर प्रत्येक वर्ष 5 सितंबर को शिक्षक दिवस मानाया जाता है। हमारी वैदिक संस्कृति में शिक्षा गुरू शिष्य परंपरा के अनुसार आश्रम में दी जाती थी। गुरू शिष्य को पुत्र की तरह मानता था और शिष्य अपने गुरू के प्रति कर्तव्यनिष्ठ होता था। आज शिक्षक दिवस पर गुरू के सम्मान में औपचारिकताएं होती हैं।
सही मायने अगर छात्र को सही और उचित मूल्यों वाली शिक्षा बिना व्यावसायिक भाव के एक समान नजरिये से दिया जाए तो वह दिन दूर नहीं है कि हम विज्ञान और सूचना क्षेत्र प्रोफेश्नल के साथ ही एक सच्चा नागरिक और सही मायनों में सही इंसान बना सकते हैं।
हम गुरूओं की पूजा करने वाले देश के नागरिक है जो इस श्लोक से सार्थक हाता है—गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुर्गुरुर्देवो महेश्वरः ।

गुरुरेव परं ब्रह्म तस्मै श्रीगुरवे नमः।

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

ओले क्यों गिरते हैं?

जानकारी

रिंकी पाण्डेय
ओले क्यों गिरते हैं?

बच्चो, कई बार बारिश के दौरान अचानक पानी की बूंदों के साथ बर्फ के छोटे-छोटे गोले भी गिरते हैं। इन्हें हम ओले कहते हैं। ये ओले आसमान में कैसे बनते हैं और ओले क्यों गिरते हैं? तो आओ ओले के बारे में पूरी बात जानें।

-------------------------------------------------------------------------------------------

बच्चों, तुम जानते हो कि बर्फ पानी के जमने से बनता है। अब तुम्हारे मन में ये प्रश्न उठ रहा होगा कि आसमान में ये पानी कैसे बर्फ बन जाता है और फिर गोल-गोले बर्फ के टुकड़ों के रूप में ये धरती पर क्यों गिरते हैं? तुमने जैसा कि पढ़ा होगा कि पानी को जमने के लिए शून्य डिग्री सेल्सियत तापमान होना चाहिए, तुमने फ्रीजर में देखा होगा कि पानी के छोटे-छोटे बूंदें बर्फ के गोले के रूप में जम जाता है, ऐसा ही प्रकृति में होता है। हम जैसे-जैसे समुद्र के किनारे से ऊपर यानी ऊंचाई की ओर बढ़ते हैं, तब जगह के साथ ही तापमान धीरे-धीरे कम होता जाता है। तुम इसे ऐसे समझ सकते हो, लोग गर्मी के मौसम में पहाड़ों पर जाना पसंद करते हैं, क्यों? इसलिए कि पहाड़ पर तापमान कम होता है, यानी मैदान…

आओ जानें डायनासोर की दुनिया

अभिषेक कांत पाण्डेय
स्टीवन स्पीलबर्ग की जुरासिक पार्क फ्रेंचाइजी की नई फिल्म 'जुरासिक वर्ल्ड’ इन दिनों खूब धूम मचा रही है। इससे पहले भी एक फिल्म 'जुरासिक पार्क’ आई थी, जिसने पूरी दुनिया में डायनासोर नाम के जीव से परिचय कराया था। तुमने भी वह फिल्म देखी होगी, आखिर कहां चले गए ये डायनासोर, कैसे हुआ इनका अंत... इनके बारे में तुम अवश्य जानना चाहोगे।


कई तरह के थे डायनासोर

स्टीवन स्पीलबर्ग की जुरासिक पार्क फ्रेंचाइजी की नई फिल्म 'जुरासिक वर्ल्ड’ इन दिनों खूब धूम मचा रही है। इससे पहले भी एक फिल्म 'जुरासिक पार्क’ आई थी, जिसने पूरी दुनिया में डायनासोर नाम के जीव से परिचय कराया था। तुमने भी वह फिल्म देखी होगी, आखिर कहां चले गए ये डायनासोर, कैसे हुआ इनका अंत... इनके बारे में तुम अवश्य जानना चाहोगे।

डायनासोर की और बातें
.इनके अब तक 5०० वंशों और 1००० से अधिक प्रजातियों की पहचान हुई है।
.कुछ डायनासोर शाकाहारी, तो कुछ मांसाहारी होते थे जबकि कुछ डायनासारे दो पैरों वाले, तो कुछ चार पैरों वाले थे।
.डायनासोर बड़े होते थे, पर कुछ प्रजातियों का आकार मानव के बराबर, तो उससे भी छोटे होते…

जानो पक्षियों के बारे में

जानकारी


बच्चो, इस धरती में कई तरह के पक्षी हैं, तुम्हें जानकर आश्चर्य होगा कि हमिंग बर्ड नाम की पक्षी किसी भी दिशा में उड़ती है, तो कुछ पक्षी ऐसे हैं, जो अपने कमजोर पंख की वजह से उड़ नहीं पाते हैं। चलते हैं पक्षियों के ऐसे अजब-गजब संसार में और जानते हैं कि ये पक्षी कौन हैं?
-----------------------------------------------------------------------

हवा में उड़ते हुए तुमने सैकड़ों पक्षियों को देखा होगा। लेकिन कई ऐसे पक्षी भी हैं, जो उड़ नहीं सकते, तो कुछ किसी भी दिशा में उड़ सकते हैं। तुम्हें जानकर हैरानी होगी कि रेटाइट्स बर्ड परिवार से जुड़े विशालकाय पक्षी कभी उड़ा भी करते थे। पर समय गुजरने के साथ-साथ ये जमीन पर रहने लगे। इस कारण से इनका शरीर मोटा होता गया। उड़ान भरने वाले पंख बेकार होते गए और वो छोटे कमजोर पंखनुमा बालों में बदल गए। इनके बारे में तुम जानते हो, शतुर्गमुर्ग, जो ऑस्ट्रेलिया में पाया जाता है। यह उड़ नहीं सकता है लेकिन जमीन पर ये 7० किलोमीटर घंटे की गति से दौड़ सकता है। ऐसे ही कई रेटाइट्स बर्ड परिवार से जुड़े पक्षी की लंबी लिस्ट हैं, जिनमें पेंग्विन, इम्यू, कीवी, बतख आदि आते हैं।

पेंग्विन उड़त…