सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

कविता संग्रह समीक्षा- मीरखां का सजरा-श्रीरंग


कविता संग्रह समीक्षा-   मीरखां का सजरा-श्रीरंग

समकालीन हिन्दी कविता में मीरखां का सजरा श्रीरंग की ताजा कविता संग्रह
है। यह संग्रह पाठकों को आकर्षित करती हुई है।  इस संग्रह में कुल 74
कविताएं है जो नये समाज की कहानी बड़ी बारीकी से बयान करती है। श्रीरंग का
यह तीसरा कविता संग्रह है, इससे पहले यह कैसा समय और नुक्कड़ से नोमपेन्ह
कविता संग्रह प्रकशित हो चुके हैं। नये अनछुए पहलूओं को खींचती यह कविता
संग्रह वर्तमान जीवन को समझने पर मजबूर कर देती है। लोकतंत्र को सावधान
करती एक कविता में सावधान/ शाम को महराज/ एक विशाल भीड़ को सम्बोधित
करेंगे/ परिवहान आधिकारी सावधान/ नगर की सभी बसें, कारें, जीपें में
कविता का स्वर इर्द-गिर्द होने वाले भीड़-भाड़ का आरेख खीचती है। वहीं इस
संग्रह की बहुरूपिया शीर्षक कविता में बहुरूपिया के चरित्र को दर्शाती है
जहां पर ना ही उसका कोई धर्म होता है न उसकी पहचान बस चुपचाप वह बदल लेता
है आपना खेमा। देखा जाए तो श्रीरंग अपने समकालीन कवियों में नये और
ताजेपन के साथ दुनिया में हो रहे बदलाव के संदेशवाहक है पर संदेह से परे
सच की शुरूआत भी अपनी कविता के माध्यम से करते हैं। यही एक कवि का असली
पहचान है कि वह समाज के नस को पहचानता है। शासन सत्ता का सुख भोगने वाले
धर्मपुरूष, राजपुरषों की चीखों को दर्ज करती कविता शीर्षक खतरा किससे है?
सत्ता भोग की लालसा में उथल-पुथल के जाल को सत्ताधारी चींखने और उसमें खो
जाने वाले आम आदमी की चींखों के बीच उलझते जीवन को केंद्रित करती कविता
और अधिक मुखर हो उठती है।
श्रीरंग की कविताओं में रंगीन दुनिया के ब्लैक एण्ड वाइट तस्वीर को बखूबी
से उतारा गया है। नैपथ्य के पीछे का सच कौन नहीं जनाता है, क्या यह सच
मनुष्य होने का पर्याय है? ऐसे अनगिनत सवाल का जवाब ढूंढती कविता पाठकों
के साथ तटस्था समांजस्य बैठा पाने में सफल हुई है। अपने समय की विद्रूपता
और उसमें सत्ताधरी, नारी, ग्रामीण महिला, देसी औरत और शैतान के ठहाके सभी
को मंतव्य समझाया गया है। एक बात तो साफ है कि शैतान ठहाके लगा रहा है
शीर्षक कविता की चंद पंक्तियां देखिए जहां जर कुटिल बुद्धि कमयाब होता
है। वे लोग/ जिन्हें, धर्म में कतई आस्था नहीं थी? / आंख मूंदकर मानने
लगे हैं- धर्म/ पढने लगे हैं-पांच वक्त का नमाज/ वे लोग/ जिन्हें, ईश्वर
पर विश्वास नहीं था?/ जाने लगे हैं- मंदिर/ करने लगे सजदे/ जबकि शैतान
ठहाके लगा रहा है।
श्रीरंग की अधिकांश कविता नई शताब्दी को समेटे हुए है। कई ऐसे विषय हैं
जिसमें अब तक ध्यान किसी का नहीं गया है जिसमें- खटनबिनवा, अबाबील,
महाकाल, पुरखे, बम्मा, शनि की महादशा, कविता जहां उगती है, व्यवस्थ और
बच्चे, छोटी सूई बनाम बड़ी सुई, परवतिया आदि समकालीन युवा कवि का मन पडताल
करती नजर आती है। दृष्टि इन किरदारों पर जब पड़ती है तो पाठक को अपनापन का
अहसास करती हैं। वहीं इनमें मुखरता का स्वर जाना पहचाने से छिपे पहलूओं
से उजागर करती हुई नजर आती है। एक कविता रतीनाथ शीर्षक में टाईपराइटर पर/
लगतार जूझती है उंगलियां/ लेकिन हार नहीं मानता रतीनाथ- शब्द संयोजन चयन
में कवि अपने आपको चूकने नहीं देता है। चरित्रों के गढें़ उन सहज शब्दों
को ढूंढ लेना कवि की अद्भुत क्षमता का परिचायक है। कहां जाए तो आगे की
कविता की दृष्टि क्या होगी? यक्ष प्रश्न यही है कि कवि इस रफ्तार भरी
जिंदगी को कितनी बारीकी से जी लेता है और फिर जीला लेता है। श्रीरंग की
कविता संग्रह मीरखां का सजरा में सजीव कविता के समरसता का हर पहलू
विधमान है।

कविता संग्रह- मीरखां का सजरा
कवि- श्रीरंग
प्रकाशक- साहित्य भण्डार, 50, चाहचन्द, इलाहाबाद-2011003 फोन-
0532-2400787, 2402072।
मूल्य- 50 रूपये।

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

ओले क्यों गिरते हैं?

जानकारी

रिंकी पाण्डेय
ओले क्यों गिरते हैं?

बच्चो, कई बार बारिश के दौरान अचानक पानी की बूंदों के साथ बर्फ के छोटे-छोटे गोले भी गिरते हैं। इन्हें हम ओले कहते हैं। ये ओले आसमान में कैसे बनते हैं और ओले क्यों गिरते हैं? तो आओ ओले के बारे में पूरी बात जानें।

-------------------------------------------------------------------------------------------

बच्चों, तुम जानते हो कि बर्फ पानी के जमने से बनता है। अब तुम्हारे मन में ये प्रश्न उठ रहा होगा कि आसमान में ये पानी कैसे बर्फ बन जाता है और फिर गोल-गोले बर्फ के टुकड़ों के रूप में ये धरती पर क्यों गिरते हैं? तुमने जैसा कि पढ़ा होगा कि पानी को जमने के लिए शून्य डिग्री सेल्सियत तापमान होना चाहिए, तुमने फ्रीजर में देखा होगा कि पानी के छोटे-छोटे बूंदें बर्फ के गोले के रूप में जम जाता है, ऐसा ही प्रकृति में होता है। हम जैसे-जैसे समुद्र के किनारे से ऊपर यानी ऊंचाई की ओर बढ़ते हैं, तब जगह के साथ ही तापमान धीरे-धीरे कम होता जाता है। तुम इसे ऐसे समझ सकते हो, लोग गर्मी के मौसम में पहाड़ों पर जाना पसंद करते हैं, क्यों? इसलिए कि पहाड़ पर तापमान कम होता है, यानी मैदान…

आओ जानें डायनासोर की दुनिया

अभिषेक कांत पाण्डेय
स्टीवन स्पीलबर्ग की जुरासिक पार्क फ्रेंचाइजी की नई फिल्म 'जुरासिक वर्ल्ड’ इन दिनों खूब धूम मचा रही है। इससे पहले भी एक फिल्म 'जुरासिक पार्क’ आई थी, जिसने पूरी दुनिया में डायनासोर नाम के जीव से परिचय कराया था। तुमने भी वह फिल्म देखी होगी, आखिर कहां चले गए ये डायनासोर, कैसे हुआ इनका अंत... इनके बारे में तुम अवश्य जानना चाहोगे।


कई तरह के थे डायनासोर

स्टीवन स्पीलबर्ग की जुरासिक पार्क फ्रेंचाइजी की नई फिल्म 'जुरासिक वर्ल्ड’ इन दिनों खूब धूम मचा रही है। इससे पहले भी एक फिल्म 'जुरासिक पार्क’ आई थी, जिसने पूरी दुनिया में डायनासोर नाम के जीव से परिचय कराया था। तुमने भी वह फिल्म देखी होगी, आखिर कहां चले गए ये डायनासोर, कैसे हुआ इनका अंत... इनके बारे में तुम अवश्य जानना चाहोगे।

डायनासोर की और बातें
.इनके अब तक 5०० वंशों और 1००० से अधिक प्रजातियों की पहचान हुई है।
.कुछ डायनासोर शाकाहारी, तो कुछ मांसाहारी होते थे जबकि कुछ डायनासारे दो पैरों वाले, तो कुछ चार पैरों वाले थे।
.डायनासोर बड़े होते थे, पर कुछ प्रजातियों का आकार मानव के बराबर, तो उससे भी छोटे होते…

जानो पक्षियों के बारे में

जानकारी


बच्चो, इस धरती में कई तरह के पक्षी हैं, तुम्हें जानकर आश्चर्य होगा कि हमिंग बर्ड नाम की पक्षी किसी भी दिशा में उड़ती है, तो कुछ पक्षी ऐसे हैं, जो अपने कमजोर पंख की वजह से उड़ नहीं पाते हैं। चलते हैं पक्षियों के ऐसे अजब-गजब संसार में और जानते हैं कि ये पक्षी कौन हैं?
-----------------------------------------------------------------------

हवा में उड़ते हुए तुमने सैकड़ों पक्षियों को देखा होगा। लेकिन कई ऐसे पक्षी भी हैं, जो उड़ नहीं सकते, तो कुछ किसी भी दिशा में उड़ सकते हैं। तुम्हें जानकर हैरानी होगी कि रेटाइट्स बर्ड परिवार से जुड़े विशालकाय पक्षी कभी उड़ा भी करते थे। पर समय गुजरने के साथ-साथ ये जमीन पर रहने लगे। इस कारण से इनका शरीर मोटा होता गया। उड़ान भरने वाले पंख बेकार होते गए और वो छोटे कमजोर पंखनुमा बालों में बदल गए। इनके बारे में तुम जानते हो, शतुर्गमुर्ग, जो ऑस्ट्रेलिया में पाया जाता है। यह उड़ नहीं सकता है लेकिन जमीन पर ये 7० किलोमीटर घंटे की गति से दौड़ सकता है। ऐसे ही कई रेटाइट्स बर्ड परिवार से जुड़े पक्षी की लंबी लिस्ट हैं, जिनमें पेंग्विन, इम्यू, कीवी, बतख आदि आते हैं।

पेंग्विन उड़त…