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बुजुर्ग दंपति 45 साल से अकेले रह हैं इस गांव में

स्पेन में एक ऐसा गांव है जहां पर कोई नहीं रहता लेकिन बुजुर्ग दंपति पिछले 45 साल से अकेले यहां रह रहे हैं। स्ट्रेला नाम का गांव स्पेन के पूर्व में स्थित वैलेंसिया से 2०० किलोमीटर दूर स्थित है। 1936 में स्पेन में सिविल वार के चलते यहां के लोग इस गांव को छोड़ कर चले गए। वहीं 79 साल के जुएन मार्टिन और 82 साल की उनकी पत्नी सिनफोरसा कूलमर इस गांव को छोड़ कर नहीं गए। इस विरान गांव में वे अकेले रह रहे हैं। वे यहां पर ख्ोती करते हैं और दर्जनों बिल्लियों और कुत्तों की देखभाल करते हैं। कभी इस गांव में 2०० लोग रहा करते थ्ो लेकिन ये बुजुर्ग दंपति अकेले यहां पर रहते हैं।

जुएन मार्टिन अपनी पत्नी से बेहद प्यार करते हैं वे बताते हैं कि हम लोगों का जन्म इसी गांव में हुआ था, इसीलिए हम दोनेां को ये जगह प्यारी है। इस दंपति पर कई डाक्यूमेंट्री फिल्में बन चुकी है। जएन बताते हैं कि हमारी एक बेटी भी थी लेकिन उसकी एक दुर्घटना में मौत हो गई।

ल्यूकेमिया यानि हड्डी के कैंसर से जूझ रही एक साल की बच्ची का नई तकनीक से किया इलाज

डीएनए कटिंग के जरिए ब्लड कैंसर के इलाज में मिली सफलता

ब्लड कैंसर से पीड़ित मरीजो के लिए वरदान साबित होगी ये नई तकनीक


कहा जाता है कि अगर धरती पर कोई भगवान है तो वह इंसान के रूप में डॉक्टर हैं। एक साल की इस प्यारी बच्ची लेइला को ल्यूकेमिया एक तरह के कैंसर से पीड़ित थी। ये कैंसर सबसे पहले रक्त में और इसी रक्त के संक्रमण के कारण हड्डी के अन्दर यानि बोन मैरो में होता है। जिस कारण से शरीर में सफेद रक्तकणिकाएं इसीलिए अधिक बनना शुरू हो जाती हैं ताकि शरीर का प्रतिरक्षा तंत्र मजबूत हो, लेकिन इस कारण से लाल रक्त कणिकाएं जो शरीर के लिए जरूरी होती है उसकी तादाद घटने लगती है इसी वजह से हड्डियों में खून स्पंजी हो जाता है, जिस कारण से धीरे-धीरे शरीर कमजोर होता चला जाता है और इंसान की मौत हो जाती है। पर इस बच्ची को डॉक्टरों ने इस भयानक कैंसर से बचा लिया एक नई तकनीक डीएनए कटिंग के जरिए उसके शरीर में किसी स्वस्थ व्यक्ति के कोशिकाओं को प्रत्यारोपित कर दिया। डॉक्टरों ने बताया कि इस तकनीक से इस बच्ची के प्रतिरक्षातंत्र में खास बदलाव आएगा और कैंसर के लिए जिम्मेदार कोश्किाओं को नए स्वस्थ प्रतिरक्षा प्रणाली में ब…

पानी से चलने वाली बाइक

अगर आपकी बाइक पेट्रोल की जगह पानी से चले तो कितना अच्छा होता। आपकी इस कल्पना को हकीकत में बदल दिया है ब्राजील के एक शख्स ने। साओ पाओलो में रहने वाले रिकार्डो एजवेडोइस नाम के इस व्यक्ति ने एक ऐसी बाइक बनाई जो पानी से चलती है। इतना ही नहीं बल्कि इस बाइक का माइलेज भी चौंकाने वाला है। यह बाइक एक लीटर पानी में 5०० किलोमीटर तक की दूरी तय कर सकती है। इस बाइक में एक बैटरी लगी है।
रिकार्डो ने अपनी इस पानी से चलने वाली बाइक का नाम टी पावर एच2ओ रखा है। इस बाइक में पानी डालने पर बैटरी के जरिए यह हाइड्रोजन बनाती है। इसी हाइड्रोजन से बाइक चलती है। बाइक के इंजन में इस हाइड्रोजन को ईधन के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है। रिकार्डो अब अपनी बाइक की टेस्टिंग के लिए तैयार हैं, इसके बाद अगर ये बाइक सफल हुई तो दुपहिया वाहन क्षेत्र में बड़ी सफलता मानी जाएगी।
मध्य प्रदेश के शख्स ने भी बनाई पानी से चलने वाली कार

वहीं इससे पहले मध्यप्रदेश जिले सागर के रहने वाले रईस महम्मूदी जो पेश्ो से मैकेनिक है, उन्होंने भी पानी से चलने वाली एक कार बनाई थी। अभी इस पर और रिसर्च हो रहा है। एक बात ये है कि जिस तरह से पानी के हाइड्रोजन …

मोतियाबिंद के रोकथाम में कारगर है नई आई ड्राप चिकित्सा वैज्ञानिकों को मिली सफलता

पूरी दुनिया में मोतियाबिंद रोग के कारण 2० मिलियन इंसान अपनी आंखों की रोशनी खो देते हैं। क्योंकि उनके पास सर्जरी कराने के लिए पैसे नहीं होते हैं, जबकि वर्तमान में मोतियाबिंद का एकमात्र इलाज आंखों की सर्जरी है। यह एक आसान-सी सर्जरी है, जिसके बाद मरीज की आंखों साफ देखने लगती है। वहीं भारत के दूर दराज क्ष्ोत्रों में जहां पर समुचित चिकित्सा व्यवस्था न होने के कारण मोतियाबिंद के ऑपरेशान के बाद भी लोगों की आंखों की रोशनी जाने की घटनाएं भी देखने को मिलती हैं। वहीं डिजिटल युग में कंप्यूटर, मोबाइल पर घंटों समय देने की मजबूरी में भी इंसान की आंखों बुरी तरह थक जाती है, इसके कारण कई तरह की आंखों की बीमारियों के होने की संभावनाएं भी बढ़ जाती है। वहीं आंखों की रोशनी पर भी फर्क पड़ता है, जिसे पावर वाला चश्मा पहन कर इस समस्या से आस्थायी छुटकारा मिल जाता है। आंखों की समस्या से जुझ रहे उन करोड़ों लोगों के लिए ये खबर राहत भरी है जो आंखों की बीमारी के कारण देखने की क्षमता दिनोंदिन खोते जा रहे हैं।


 ये ड्राप क्रिस्टेलिएन प्रोटीन को बनाएगा

 चिकित्सा वैज्ञानिकों ने एक ऐसे आई ड्राप को विकसित करने में कामयाबी ह…

5०० साल बाद कैसा होगा धरती का भविष्य

क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि 5०० साल बाद हमारी धरती कैसी दिख्ोगी। कॉलिन एन्डेरसन जोकि पेश्ो से फोटोग्राफर हैं, उनकी ये काल्पनिक फोटो में मानव सभ्यता अंतरिक्ष से अनोखी तरह से दिख रही है। टॉवर के आकार की ऊंची-ऊंची बिल्डिंग से ढकी धरती का ये भविष्य है। कई वैज्ञानिकों और रिसचर्स ने आने वाले 5०० सालों में मानव सभ्यता में बदलाव के बारे में पूर्वानुमान लगाया है।
चारों तरफ होगा बर्फ ही बर्फ
26वीं शताब्दी में भले हम न रहें लेकिन धरती के वातावरण में बहुत बड़ा बदलाव आएगा। रिसर्च से ये बात सामने आई है कि 26वीं शताब्दी में ग्लोबल वार्मिंग के कारण धरती का तापमान बढ़ जाएगा। लेकिन उसके बाद धरती पर ठंड इतनी बढ़ जाएगी कि यहां हिम युग की शुरू हो जाएगा। कई रिसर्च से ये अनुमान लगाया गया है कि जब धरती पर मौजूद जीवाश्म ईंधन यानी पेट्रोल, कोयला का भंडार खत्म हो जाएगा तो धरती का वातावरण गर्म होना शुरू हो जाएगा। वैज्ञानिकों को कहना है कि धरती पर मौजूद जीवाश्म ईधन का अधिक इस्तेमाल से कार्बनडाइऑक्साइड की मात्रा वायुमंडल में अधिक हो जाएगाी, जो ओजोन पर्त को नुकसान पहुंचाएगा। सूरज की अल्ट्रावयलेट किरण्ों, जो बहुत हानि…

साहित्य के क्षेत्र में अब तक नोबेल प्राइज से सम्मानित महिलाएं

सेल्मा लागेर्लाफ
जन्म: 2० नवंबर 1858
मृत्यु: 16 मार्च 194०
19०9 में स्वीडन लेखिका सेल्मा लागेर्लाफ को स्वीडिश भाषा में गद्य लेखन के विशिष्ट योगदान के लिए नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। लिटरेचर (साहित्य) कैटेगरी में पुरस्कार पाने वाली यह दुनिया की पहली महिला हैं। इनके लेखन में उच्च कल्पनाशीलता और आदर्शवाद के विभिन्न आयामों का प्रभाव देखने को मिलता है।
ग्राजी डेलेडा
जन्म: 27 सितंबर, 1871
मृत्यु: 15 अगस्त, 1936
1926 में इटली की ग्राजी डेलेडा को इटेलियन भाषा में गद्य लेखन के लिए नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इनके लेखन में मानवीय जीवन की संवेदनाओं को गहराई से उकेरने की अद्भुद लेखन शिल्प देखने को मिलता है। इन्होंने किन्हीं कारणों से नोबेल प्राइज 1927 में ग्रहण किया था।
 सिग्रिड अंडसेट
जन्म: 2० मई, 1882
मृत्यु: 1० जून, 1949
1928 में नार्वे की लेखिका सिग्रिड अंडसेट को नार्वे भाषा में लेखन के लिए नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया। मध्य युग में नार्देन लाइफ की घटनाओं का सहित्य में स्थान देने के लिए यह पुरस्कार मिला। इनके लेखन में इस युग के जीवन का प्रभावी चित्रण दिखाई देता है।
पर्ल बक
जन्म…

इन महिलाओं को मिला नोबेल प्राइज

नोबेल प्राइज हर साल रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेस, द स्वीडिश एकेडमी, द कारोलिस्का इंस्टीट्यूट एवं द नॉर्वेजियन नोबेल कमेटी द्बारा दिया जाता है। दुनिया का सबसे प्रतिष्ठित नोबेल पुरस्कार ऐसे लोगों या संस्था को दिया जाता है, जिन्होंने रसायनशास्त्र, भौतिकीशास्त्र, साहित्य, शांति, एवं औषधि विज्ञान (मेडिकल साइंस) के क्षेत्र में अद्बितीय योगदान दिया हो। नोबेल प्राइज के संस्थापक अल्फ्रेड नोबेल थ्ो। वहीं अर्थशास्त्र के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कारों की शुरुआत 1968 में स्वीडन की केंद्रीय बैंक स्वेरिज रिक्सबैंक द्बारा शुरू की गई। यह पुरस्कार अर्थशास्त्र के क्षेत्र में अद्बितीय कार्य करने वाले लोगों और संस्थाओं को हर साल दिया जाता है। हर कैटेगरी में पुरस्कार अलग-अलग समिति द्बारा दिया जाता है। नोबेल प्राइज विनर को एक मेडल, एक डिप्लोमा, एक मोनेटरी एवार्ड के साथ धनराशि भी दी जाती है। अब तक 48 महिलाओं को नोबेल पुरस्कार मिल चुका है।
भौतिक विज्ञान में अब तक नोबेल प्राइज से सम्मानित महिलाएं
मैडम क्यूरी
जन्म: 7 नवंबर, 1867
मृत्यु: 4 जुलाई, 1934
पोलेंड की साइंटिस्ट मैडम क्यूरी को वर्ष 19०3 में भौतिक के क्ष्ोत्र…

मोहनदास करमचंद गांधी से महात्मा गांधी

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अभिषेक कांत पाण्डेय
महात्मा गांधी के बारे में तुम बहुत कुछ जानते होगे कि उन्होंने हमारे देश की आजादी के लिए बहुत बड़े-बड़े आंदोलन किया। उनके मार्गनिर्देशन में ही आजादी का आंदोलन चला और उनके सत्य, अहिंसा और सत्याग्रह के कारण ही हमें अंग्रेजों से आजादी मिली। गांधी जयंती के अवसर पर आओ उनकी शिक्षाओं और उनके बारे में जानें-
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सत्य और अहिंसा का पाठ सीखाने वाले सदी के नायक का नाम कौन नहीं जानता है। अंग्रेजों से अहिंसा के बल पर भारत को आजादी दिलाने वाले महात्मा गांधी का नाम सारी दुनिया में जाना जाता है। मोहन करमचंद गांधी से महात्मा गांधी बनने की एक लंबी गाथा है। 2 अक्टूबर 1869 में गुजरात के पोरबंदर में जन्में गांधीजी अपने विद्यार्थी जीवन में एक औसत छात्र थे। लेकिन अपनी मेहनत और देश के प्रति प्रेम के कारण वे आाजादी के महानायक बनें। सत्य व अहिंसा का पाठ पढ़ाने वाले सबके प्यारे बापू आज भी हमारे लिए…

डिजिटल इन इंडिया से आइटी सेक्टर में बूम

आप्शन
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अभिषेक कांत पाण्डेय

सरकार के कदम डिजिटलाइजेशन की ओर बढ़ रहे हैं, 'मेक इन इंडिया’ के बाद 'डिजिटल इंडिया’ के कारण भारत के आइटी क्ष्ोत्र में नई नौकरियों के दरवाजे खुलने वाले हैं। यह महत्वाकांक्षी अभियान के जरिए देश के ढाई लाख गांवों को इंटरनेट से जोड़ना और सरकारी योजनाओं को गांव-गांव तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। कॅरिअर के लिहाज से कंप्यूटर कोर्स करने वाले युवाओं के लिए सरकारी संस्थानों से लेकर प्राइवेट क्ष्ोत्र में नौकरी मिलना आसान होगा। डिजिटल इंडिया क्या है और इसके मुताबिक अपने आपको कैसे करें अपडेट ताकी आने वाले समय में आप बेहतरीन जॉब हासिल कर सके।
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ढाई लाख गांवों को इंटरनेट से जोड़ने के बाद आइटी सेक्टर में नौकरियां भी बढ़ेंगी। जिस तरह से भारत में लगातार इंटरनेट का उपयोग बढ़ता जा रहा है। सूचना के क्ष्ोत्र में भी ग्रोथ देखने को मिल रहा है। डिजिटल इंडिया के कारण कंप्यूटर एजुकेशन…

खुद को आत्मनिर्भर बनाने की राह में महिलाएं

कामयाबी

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अभिषेक कांत पाण्डेय

किसी देश की तरक्की में महिलाओं का बहुत बड़ा योगदान होता है। परिवार को संभालने वाली महिला अब समाज और देश को नई दिशा दे रही हैं। ये सिलसिला आजादी के बाद से अब तक अनवरत चल रहा है। पुरुषों से कमतर समझे जाने वाली महिलाओं ने शिक्षा, विज्ञान, इंजीनियरिंग, मेडिकल और सेना जैसे क्षेत्र में खुद को साबित किया है। जहां कामयाबी पुरुषों का अधिकार समझा जाता था, वहीं महिलाओं ने इस भ्रम को तोड़ दिया है, वे कामयाबी की राह में आगे बढ़ रही हैं। चाहे जितनी मुश्किलें हो लेकिन आगे बढ़ने और खुद को स्थापित करने का जज्बा महिलाओं को कामयाब बना रहा है।
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भारतीय समाज में महिलाओं का विशिष्ट स्थान रहा हैं। पत्नी को पुरूष की अर्धांगिनी माना गया है। वह एक विश्वसनीय मित्र के रूप में भी पुरुष की सदैव सहयोगी रही है। लेकिन पुरुष वर्चस्व मानसिकता वाले समाज ने महिलाओं को घर की दहलीज से बाहर कदम रखन…

बच्चे का मन तो नहीं है बीमार

पैरेंटिंग्स
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अभिषेक कांत पाण्डेय


मां होने के नाते आप चाहती हैं कि आपका बच्चा हंसे, ख्ोले और स्वस्थ रहे। पर कभी-कभी हम अवसाद में घिरे बच्चे के मन को नहीं पढ़ पाते हैं। बच्चों का बदला-बदला व्यवहार जैसे, गुमसुम रहना, अकेले में समय बिताना, किसी से बात न करना और उसके चेहरे पर परेशानी दिख्ो तो जाइए कि आपके बच्चे का मन बीमार है। वह कोई मानसिक व्यथा से गुजर रहा है। ऐसे में मां होने के नाते आप बच्चों की उलझनों के बारे में जाने और उसकी काउंसिलिंग कराए ताकी आपका बच्चा फिर से हंसता-ख्ोलता नजर आए।
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रीता 11 साल की है। बार-बार अपनी मां को बताना चाहती है कि उसे ट्राली वाला गली तक छोड़ कर चला जाता है, 'मां ट्राली वाले से कहों की घर तक छोड़ दिया करे।’ लेकिन रीता की मां ने उसकी बात को अनसुना कर दिया और कहा कि सड़क से गली तक तो दो-मिनट का रास्ता है, थोड़ाè पैदल चलकर आजाया कर। रीता की मां अपने काम में लग जाती है, कुछ देर बाद रीता…

आओ हम एक हो जाएं

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नेक सलाह
अभिषेक कांत पाण्डेय


आज भारत आजाद है, हम आजादी की सांस ले रहे हैं लेकिन हमने देश में ही मानव-मानव के बीच लंबी रेखाएं खींच रखी हैं। धर्म, जाति, संप्रदाय, अमीरी-गरीबी, गोरे-काले आदि की जबकि हम भारत के निवासी हैं, हम उस देश में रहते हैं, जहां विभिन्न प्रकार के लोग हैं। इनके बीच एकता स्थापित करना और एक देश के निवासी होने का गर्व हमारे मन में होना चाहिए। धर्म, देश, लोकतंत्र इक दूसरे के पर्याय हैं। धर्म का अर्थ मानव प्रेम और देश का अर्थ यहां रहने वाले लोगों में एकता और लोकतंत्र पर विश्वास रखना। लोकतंत्र का मतलब बराबरी से जीने का हक, कोई भ्ोद-भाव नहीं। क्या हम मानव जाति के कल्याण के लिए धर्म, देश और लोकतंत्र को एक दूसरे का पूरक नहीं बना सकते हैं। देश और लोकतंत्र दोनों शरीर और आत्मा है तो धर्म उसमें रहने वाले व्यक्ति के लिए आचरण, नैतिकता, कर्तव्य, विश्व बंधुता के भाव की धारा बहाती है। निश्चय ही देश बड़ा होता है, क्योंकि यह ही सभी देशवासियों को एक सूत्र में पिरोता है और…

पहचानिए अपने विचारों की शक्ति

नेक सलाह
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अभिषेक कांत पाण्डेय

ऐसे ही छोटे विचारों को कसौटी में कसना जरूरी होता है, नहीं तो हम सही और गलत पर विचार नहीं कर पाते हैं। यानी अपने विचारों को पहचानिए और उसे एक जोहरी की तरह परखिए, हो सकता है भविष्य के बुद्ध, महावीर जैन, गांधी, न्यूटन, आइंस्टीन बनना आपके विचारों में हो, बस उसे मूर्त रूप देना भर है।
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विचारों की शक्ति ऐसी है जब तक खुद इसका अनुभव नहीं करते हैं तब तक विश्वास नहीं होता है। अपने मन में आने वाले निगेटिव थिंकिंग को हटाने का यह सर्वोत्तम उपाय है। पॉजिटिव थिंकिंग की एनर्जी जीवन में बदलाव लाता है। लेकिन आपके विचारों में दृंढ़तता और सच्चाई होनी चाहिए। पूर्वाग्रह ग्रसित नहीं होना चाहिए। विचार दिमाग में उत्पन्न होता है लेकिन इसका स्रोत अपका अनुभव होता है। विचार की शक्ति की पहचान कई महापुरुषों ने अपने जीवननकाल में कर लिया और वे अपने सदविचारों के माध्यम से ही लोगों में ज्ञान बांटा।

विचार …

सोलर एनर्जी पर्यावरण का रक्षक

जानकारी



बच्चों, तुमने खबरों और टीवी चैनल में बढ़ते हुए प्रदूषण के बारे में समचार पढ़ा या देखा होगा। प्रदूषण के कारण कई शहरों में पानी, हवा, जमीन प्रदूषित हो गई है। सोचो, कुदरत ने हमें कई ऐसी चीजें दी हैं, जिसको अपनाकर हम पर्यावरण को बचा सकते हैं। उन्हीं में से है, सौर्य ऊर्जा। इसका इस्तेमाल कर हम धरती को प्रदूषित होने से बचा सकते हैं। आओ जानें, ये सौर्य ऊर्जा क्या है और इसके इस्तेमाल से हम अपनी धरती को कैसे बचा सकते हैं।
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तुम जानते हो कि पेट्रोलियम पदार्थ, कोयला के जलने से हमारी धरती लगातार गर्म हो रही है। जिसके कारण से ग्लोबल वर्मिंग का खतरा बढ़ रहा है। इस गर्मी में भी शहरों का तापमान इतना अधिक हो गया था कि बिना कूलर के जीना मुश्किल हो गया था। क्या तुम जानते हो कि अचानक तेज गर्मी, बारिश का कम होना, बाढ़ आना, ये सब लक्षण बताता है कि हमारी धरती बीमार हो रही है। लगातार धरती पर पेटàोल, कोयला आदि के जलने से अत्यधिक गर्मी और धुंआ पैदा हो रहा है। इस धुंए और गर्मी के कारण वायु जहरीली और गर्म हो रही है, इस कारण से धरती का…

क्लर्क बनने के लिए करें आईबीपीएस की तैयारी

बैंक में क्लर्क बनने का सपना साकार हो सकता है। 2० राष्ट्रीय बैंकों में क्लर्क के लिए 4० हजार पोस्ट खाली हैं, इन पदों को भरने के लिए इंस्टीट्यूट ऑफ बैंकिग पर्सनल सेलेक्शन (आईबीपीएस) संयुक्त परीक्षा कराने जा रही है। इस परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन कर आप भी क्लर्क बन सकते हैं। फार्म भरने से लेकर परीक्षा की तैयारी करने की जानकारी यहां दी जा रही है।



इंस्टीट्यूट ऑफ बैंकिग पर्सनल सेलेक्शन (आईबीपीएस) की एडक् एद्यद्गन्दद्मप-ठ्ठ परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन आपको बैंक में क्लर्क बनने का अवसर दे रहा है। स्टडी करते समय सही रणनीति और समय का सही प्रबंधन से आपको को सफलता जरूरी मिलेगी।

परीक्षा का पैटर्न
परीक्षा ऑनलाइन दो चरणों में होगी। प्रारंभिक परीक्षा 1०० अंकों की होगी। मुख्य परीक्षा 2०० अंकों की होगी। रीजनिग, अंग्रेजी, सामान्य ज्ञान, कंप्यूटर और क्वांटिटिव एप्टीट्यूड से आब्जेक्टिव प्रश्न होंगे। गलत उत्तर के लिए एक चौथाई अंक काटे जाएंगे। प्रारंभिक परीक्षा क्वॉलिफाई करने वाले कैंडिडेट को मुख्य परीक्षा के लिए बुलाया जाएगा। मुख्य परीक्षा के बाद इंटरव्यू 1०० अंकों का होगा। फाइनल स्कोर कार्ड में मुख्य परीक्षा …

गार्डन को बनाए सुंदर

गार्डन तभी सुंदर और मनमोहक हो सकता है, जब आप उसकी अच्छे से देखभाल करें। गार्डन
को बेहतर और आकर्षक बनाने के लिए कुछ टिप्स-

छोटा तालाब बनाएं

गार्डन में पानी का एक छोटा-सा तालाब हो तो गार्डन का नजारा बेहद खूबसूरत दिख्ोगा। इसके लिए छोटे आकार का चौकोर गड्ढा खोदें, उसे सिमेंट से पक्का करा लें या बड़े टब को मिट्टी में गाड़ दें और उसके किनारों को पत्थरों से छुपा दें। इस तरीके से एक छोटा-सा तालाब बन जाएगा। तालाब के लिए ऐसी जगह का चुनाव करें, जहां चार-पांच घंटे अच्छी धूप आती हो। इसमें कमल और जलीय पौध्ो उगा सकते हैं।

लॉन के लिए घास का चुनाव
गार्डन चाहें कितना भी छोटा हो, घास का मैदान उसकी शान है। इसलिए बगीचे में घास से सजा हुआ लॉन जरूर बनाएं ताकी यहां सुबह-शाम बैठने का आनंद ले सकें। घास कौन-सी लगानी चाहिए, इस बात को सोच समझकर तय करें। जहां घास लगाना है तो इन बातों का ध्यान रख्ों कि जगह धूप वाली है या छांव वाली है, जिससे सही किस्म की घास बाजार से खरीदी जा सके।

बढ़ाएं गमलों का सौंदर्य

कतार में रखे गमले और उसमें लगे फूल-पौधे गार्डन की शोभा बढ़ाते हैं। गमले को साफ रखने के लिए सफेद सिरका और पानी बराबर मात्रा म…

समझें आखों की भाषा

रिलेशनशिप
कई बार जो बात हम अपनी जुबान से नहीं कह सकते, हमारी आंखें बयान कर देती हैं या यूं कहें हम अपनी बातों को कई बार इशारों से भी बाखूबी कह सकते हैं। अकसर ऐसा भी होता है कि पति कुछ कह नहीं पाते लेकिन वे इशारों में ही बहुत कुछ कह देते हैं, जिसको समझना आना चाहिए।

आप अपने पति को अच्छी तरह से जानती हैं लेकिन कभी-कभी लगता है कि आप उन्हें बेहतर तरीके से नहीं जानतीं। ऐसा क्यों होता है? कभी-कभी दांपत्य जीवन में नीरसता आ जाती है। पति के व्यवहार में बदलाव को आप समझ नहीं पाती हैं। उसके पीछे छिपी कोई समस्या है, जिसे वे आपसे शेयर नहीं करना चाहते हैं। पति की इस तरह की मनोस्थिति को आप थोड़ा ध्यान दें तो आसानी से समझ सकती हैं। क्या है आंखों और इशारों की भाषा, यह जानकर आप अपने दांपत्य जीवन को सुखमय बना सकती हैं।

आंखों को पढ़ें
कहते हैं कि किसी भी इंसान के मन में क्या चल रहा है, यह जानना मुश्किल है लेकिन आंखों को देखकर कई बार पता चल जाता है। पति के मन में क्या चल रहा है, जो आपसे शेयर नहीं कर पा रहे हैं। ऐसी स्थिति में कोई धरणा न बनाएं, जब तक सच्चाई न पता चले। आप पति से बात करें, इस दौरान उनकी आंखों को दे…

अच्छे वैवाहिक जीवन के लिए खुद को बदले

रिलेशनशिप

वैवाहिक जीवन सुखी बना रहे, इसके लिए आप हर तरह की कोशिशें करती हैं लेकिन कभी-कभी हम ईमानदारी से खुद से पूछें तो पाते हैं कि कहीं न कहीं रिश्ते को निभाने में चूक रहे हैं। क्या आपकी वैवाहिक जीवन की नैया डगमगा रही है, अगर ऐसा है तो संभलें और खुद पर गौर करें, बदलाव लाएं और अपनी मैरिज लाइफ को बचाएं। ————————————————————————————————————————
पिछले कुछ समय से हमारे देश में शादियां टूटने के मामलों में बेतहाशा वृद्धि हुई है। अग्नि को साक्षी मानकर जन्म-जन्मांतरों तक साथ रहने की कसमें खाने वाले जीवनसाथी आखिर क्यों साथ निभा नहीं पाते। कुछ स्थितियां हैं, जिनके कारण मैरिज लाइफ पर संकट आता है। इन्हें बस दूर करने की जरूरत है।

हमेशा खुद को सही न ठहराएं
शादी टूटने का ये भी एक कारण हो सकता है कि आप अपनी हर बात को सही साबित करने का प्रयास करें और दूसरे की भावनाओं की कद्र न करें। इस तरह से आप एकांगी सोच की तरफ झुक जाती हैं और पति आपकी इन आदतों से आहत होता हो इसीलिए इस पर गौर करें। जीवन साथी के बातों को भी सुनें और समझें।

पुरानी बातों को कुरेदना छोड़े
अगर आप बार-बार यह ताना देंगी कि पति के रिश्तेदार सह…

सिंगल मदर कामयाब भी, अच्छी मां भी

अभिषेक कांत पाण्डेय

आज महिलाएं खुद फैसले ले रही हैं और क्यों न लें, वे पढ़ी-लिखी हैं, कामयाब हैं, उन्हें अपनी जिंदगी अपनी आजादी से जीने का हक है। आज सिंगल मदर बिना पुरुषों के खुद घर और बाहर की जिम्मेदारी बाखूबी उठा रही हैं। ये जीवन में कामयाब हैं और एक अच्छी मां भी हैं, इन्हें पुरुषों के सहारे की जरूरत नहीं है।


हमारा समाज आज कितना भी आधुनिक हो गया हो, लेकिन भारत में सिंगल मदर होना आसान नहीं है। अकेले एक महिला का जीवन यापन करना और बच्चों की परवरिश करना मुश्किलों से भरा है। सिंगल मदर के लिए सर्वोच्च न्यायालय के हक में अहम फैसला आया है कि सिंगल मदर को अपने बच्चे का कानूनी अभिभावक बनने के लिए बच्चे के पिता का नाम या सहमति की कोई जरूरत नहीं है। यह फैसला ऐसी महिलाओं के लिए राहत भरा है, जो किन्हीं कारणों से सिंगल मदर के रूप में जीवन जी रही हैं। लेकिन आज भी हमारा समाज सिंगल मदर को अच्छी निगाहों से नहीं देखता है। सामाज के दकियानूसी खयाल वाले कुछ ठेकेदार, अकेले जीने वाली महिलाओं के हक की बात पर उनके राहों में हमेशा कांटे बोते रहे हैं। सवाल यह उठता है कि महिलाएं हमेशा पुरुषों के मुताबिक क्यों चले,…

आओ जानें डायनासोर की दुनिया

अभिषेक कांत पाण्डेय
स्टीवन स्पीलबर्ग की जुरासिक पार्क फ्रेंचाइजी की नई फिल्म 'जुरासिक वर्ल्ड’ इन दिनों खूब धूम मचा रही है। इससे पहले भी एक फिल्म 'जुरासिक पार्क’ आई थी, जिसने पूरी दुनिया में डायनासोर नाम के जीव से परिचय कराया था। तुमने भी वह फिल्म देखी होगी, आखिर कहां चले गए ये डायनासोर, कैसे हुआ इनका अंत... इनके बारे में तुम अवश्य जानना चाहोगे।


कई तरह के थे डायनासोर

स्टीवन स्पीलबर्ग की जुरासिक पार्क फ्रेंचाइजी की नई फिल्म 'जुरासिक वर्ल्ड’ इन दिनों खूब धूम मचा रही है। इससे पहले भी एक फिल्म 'जुरासिक पार्क’ आई थी, जिसने पूरी दुनिया में डायनासोर नाम के जीव से परिचय कराया था। तुमने भी वह फिल्म देखी होगी, आखिर कहां चले गए ये डायनासोर, कैसे हुआ इनका अंत... इनके बारे में तुम अवश्य जानना चाहोगे।

डायनासोर की और बातें
.इनके अब तक 5०० वंशों और 1००० से अधिक प्रजातियों की पहचान हुई है।
.कुछ डायनासोर शाकाहारी, तो कुछ मांसाहारी होते थे जबकि कुछ डायनासारे दो पैरों वाले, तो कुछ चार पैरों वाले थे।
.डायनासोर बड़े होते थे, पर कुछ प्रजातियों का आकार मानव के बराबर, तो उससे भी छोटे होते…

मध्य प्रदेश शासन में बनें ग्रामीण उद्यान अधिकारी

एग्रीकल्चर या इसके समकक्ष ग्रेजुएशन की डिग्री आपके पास है तो मध्य प्रदेश व्यावसायिक परीक्षा मंडल के जरिए ग्रामीण उद्यान विस्तार अधिकारी और इसके समकक्ष कई पदों के लिए जॉब अप्लाई कर सकते हैं। फार्म भरने से लेकर तैयारी करने की सारी जानकारी यहां से लीजिए-
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परीक्षा पैटर्न
विभिन्न पदों के लिए 6 सितंबर को दो पलियों में परीक्षा आयोजित होगी। दोनों प्रश्न पत्र दो घंटे और 1००-1०० अंक के होंगे। यह परीक्षा ऑब्जेक्टिव टाइप का होगी।
पहला पेपर हायर सेकेंडरी लेवल का होगा। 1०० अंकों के प्रश्न पूछे जाएंगे, सही उत्तर को काले बाल प्वाइंट पेन से भरना है। दिए गए सिलेबस अनुसार सामान्य तार्किक योग्यता, सामान्य ज्ञान, सामान्य हिंदी, सामान्य अंग्रेजी, सामान्य गणित, सामान्य विज्ञान, सामान्य कंप्यूटर ज्ञान के विषयों से प्रश्न पूछे जाएंगे। इन सब्जेक्ट की तैयारी के लिए इंटर लेवल की बुक पढ़ें। इसके साथ सही फैक्ट वाले जनरल नॉलेज की बुक की स्टडी भी करना लाभदायी है। दूसरी पाली में दूसरा पेपर होगा, इसमें आपने जिस पद के लिए आवेदन किया है, उससे संबंधित 1०० अंक के ऑब्जे…

करें कंबाइड हायर सेकेंडरी लेवल एग्जामिनेशन 2०15 की तैयारी

कर्मचारी चयन आयोग केंद्रीय संस्थानों में ग्रुप सी कैटेगरी के कर्मचारियों की भर्ती करता है। कंबाइड हायर सेकेंडरी लेवल एग्जामिनेशन 2०15 के लिए असिस्टेंट, डाटा एंट्री ऑपरेटर व एलडीसी के 6578 पदों पर भर्ती की अधिसूचना जारी की गई है। सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे हैं तो यह बिल्कुल सही समय है। इन पदों के लिए आवेदन करने की अंतिम तारीख 13 जुलाई है। एलिजिबिलिटी, एग्जाम पैटर्न और प्रिपरेशन की सही जानकारी इस नौकरी को हासिल करने में मदद करेगी।
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कर्मचारी चयन आयोग देशभर में केंद्रीय कर्मचारियों की भर्ती करता है। कंबाइड हायर सेकेंडरी लेवल एग्जामिनेशन 2०15 के जरिए ग्रुप सी के पद पर ज्वाइन करने के बाद आप विभागीय परीक्षा देकर गजेटेड ऑफिसर की पोस्ट तक भी पहुंच सकते हैं। अपने मनपसंद विभाग में ऊंचे ओहदे पर काम करने का सपना साकार करने का यह शॉर्टकट तरीका है। बस आप में ध्ौर्य और सही रणनीति को फॉलो करने की समझदारी होनी चाहिए, फिर कामयाबी आपके हाथ में होगी।

एलिजिबिलिटी
1 अगस्त, 2०15 से पहले आपके पास 12वीं या इसके समकक्ष कोई योग्यता होनी चाहिए। आवेदन करने की आयु 18 से 27 वर्ष के बी…