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रंग बदलने में चेंपियन





जानकारी

रंग बदलने में चेंपियन
बच्चों, इस दुनिया में रंगों का बहुत महत्व है, बिना रंग के इस धरती की कल्पना करना मुश्किल है। धरती में बहुत से ऐसे जीव हैं, जो रंग बदलने या अपने रंग के कारण ही इस प्रकृति में रह पाते हैं, आइए ऐसे ही कुछ जीवों की अनोखी दुनिया के बारे में जानते हैं-
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रंग बदलने में उस्ताद
बच्चों तुम्हें मालूम है कि गिरगिट अपना रंग बदल लेता है। तुम्हें ये बताया गया है कि सांप जैसे शिकारियों से बचने के लिए वे ऐसा करते हैं। लेकिन तुम्हें जानकर आश्चर्य होगा कि असल में अपनी अलग-अलग भावनाओं जैसे आक्रामकता, गुस्सा, दूसरे गिरगिटों को अपना मूड दिखाने और इस माध्यम से बातचीत करने के लिए भी गिरगिट रंग बदलते हैं। कई बार गिरगिट रंग नहीं केवल अपनी चमक बदल लेते हैं। खतरे की स्थिति में वह अपने रंग के साथ-साथ आकार भी बदल लेते हैं। फूल कर अपना आकार बड़ा कर लेना भी इनका एक तरीका है। गिरगिट के बहुत ज्यादा प्राकृतिक दुश्मन नहीं हैं। वह आराम से पेड़ों की टहनी पर बिना हिले बैठा रहकर अपने शिकार का इंतजार करता है। कीड़े-मकोड़े दिखते ही जल्दी से अपनी लंबी-सी जीभ फेंक कर उसे निगल लेता है।
रंग ऐसा की सिर चकरा जाए

जेबरा तुमने देखा होगा, काले और सफेद धारीदार रंग का होता है। इन्हें इस रंग का फायदा मिलता है, कैसे? श्ोर को धोखा देने के लिए। जब जेबरा के आस-पास अगर कोई शेर आ जाता है तो उसको भ्रमित करने के लिए वे झुंड में पास-पास आ जाते हैं। ऐसे में शेर को कोई एक जानवर दिखाई नहीं पड़ता और उसका सिर चकरा जाता है। इस तरह जेबरा का रंग तो उसकी जान भी बचा लेता है।
हरा रंग कमाल का
लूपर नाम का यह कीड़ा धोखा देने में उस्ताद है। तितलियों के परिवार से आने वाला यह कीट वातावरण के हिसाब से खुद को बहुत खूबी से बदल लेता है। एक नजर में पेड़ की पतली-सी शाखा की तरह लगने वाला लूपर अपने आपको पास के माहौल में मिला लेता है और इसका हरा रंग ऐसा लगता है कि किसी पेड़ की पतली शाखा है।

किसी भी रंग में रंग जाए

ऑक्टोपस की ये प्रजाति समुद्रतल पर खुद को बहुत खूबसूरती से छिपा लेती है। इसके अलावा जरूरत पड़ने पर यह अपने पास के किसी दूसरे समुद्री जीव, सांप, घोंघा या किसी और जैसा आकार और रंग भी अपना सकता है। दूसरे समुद्री जीव इसे पत्थर या श्ौवाल समझ लेते हैं और वहां से नौ-दो ग्यारह हो जाते हैं।

रंग बिरंगी तितली
इस तितली को देखें, जो रंग-बिरंगी है लेकिन अपने पंखों पर दो जोड़ी आंखें लेकर उड़ती है। जी हां, आंखों की इस डिजाइन के कारण ये किसी शिकारी को खाने लायक नहीं बल्कि खतरनाक दिखती है। आस-पास के वातावरण में आसानी से छिप जाती है।
नकल में उस्ताद

नकल का सबसे अच्छा उदाहरण शायद होवरफ्लाई करती है। चटकीले पीले और काले रंग की धारियों वाला यह कीड़ा ततैया होने का नाटक करती है। उसके दुश्मन डर जाते हैं क्योंकि जहरीला ततैया उन्हें डंक मार सकता है। यह उपाय होवरफ्लाई को शिका
खतरनाक घात

मॉन्कफिश समुद्रतल से चिपक कर समुद्र तल में जैसे नजर ही नहीं आती है। और इसकी त्वचा पर ऐसी डिजाइन होती है, जो किसी कीड़े जैसी दिखती है। इसे कीड़ा समझकर जब कोई मछली इसकी तरफ आकर्षित होती है तो मॉन्कफिश उसे वापस नहीं जाने देती और अपना शिकार बना लेती है।
रियों से बचा लेता है।

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ओले क्यों गिरते हैं?

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रिंकी पाण्डेय
ओले क्यों गिरते हैं?

बच्चो, कई बार बारिश के दौरान अचानक पानी की बूंदों के साथ बर्फ के छोटे-छोटे गोले भी गिरते हैं। इन्हें हम ओले कहते हैं। ये ओले आसमान में कैसे बनते हैं और ओले क्यों गिरते हैं? तो आओ ओले के बारे में पूरी बात जानें।

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बच्चों, तुम जानते हो कि बर्फ पानी के जमने से बनता है। अब तुम्हारे मन में ये प्रश्न उठ रहा होगा कि आसमान में ये पानी कैसे बर्फ बन जाता है और फिर गोल-गोले बर्फ के टुकड़ों के रूप में ये धरती पर क्यों गिरते हैं? तुमने जैसा कि पढ़ा होगा कि पानी को जमने के लिए शून्य डिग्री सेल्सियत तापमान होना चाहिए, तुमने फ्रीजर में देखा होगा कि पानी के छोटे-छोटे बूंदें बर्फ के गोले के रूप में जम जाता है, ऐसा ही प्रकृति में होता है। हम जैसे-जैसे समुद्र के किनारे से ऊपर यानी ऊंचाई की ओर बढ़ते हैं, तब जगह के साथ ही तापमान धीरे-धीरे कम होता जाता है। तुम इसे ऐसे समझ सकते हो, लोग गर्मी के मौसम में पहाड़ों पर जाना पसंद करते हैं, क्यों? इसलिए कि पहाड़ पर तापमान कम होता है, यानी मैदान…

जानो पक्षियों के बारे में

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बच्चो, इस धरती में कई तरह के पक्षी हैं, तुम्हें जानकर आश्चर्य होगा कि हमिंग बर्ड नाम की पक्षी किसी भी दिशा में उड़ती है, तो कुछ पक्षी ऐसे हैं, जो अपने कमजोर पंख की वजह से उड़ नहीं पाते हैं। चलते हैं पक्षियों के ऐसे अजब-गजब संसार में और जानते हैं कि ये पक्षी कौन हैं?
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हवा में उड़ते हुए तुमने सैकड़ों पक्षियों को देखा होगा। लेकिन कई ऐसे पक्षी भी हैं, जो उड़ नहीं सकते, तो कुछ किसी भी दिशा में उड़ सकते हैं। तुम्हें जानकर हैरानी होगी कि रेटाइट्स बर्ड परिवार से जुड़े विशालकाय पक्षी कभी उड़ा भी करते थे। पर समय गुजरने के साथ-साथ ये जमीन पर रहने लगे। इस कारण से इनका शरीर मोटा होता गया। उड़ान भरने वाले पंख बेकार होते गए और वो छोटे कमजोर पंखनुमा बालों में बदल गए। इनके बारे में तुम जानते हो, शतुर्गमुर्ग, जो ऑस्ट्रेलिया में पाया जाता है। यह उड़ नहीं सकता है लेकिन जमीन पर ये 7० किलोमीटर घंटे की गति से दौड़ सकता है। ऐसे ही कई रेटाइट्स बर्ड परिवार से जुड़े पक्षी की लंबी लिस्ट हैं, जिनमें पेंग्विन, इम्यू, कीवी, बतख आदि आते हैं।

पेंग्विन उड़त…

जोशी भड्डरी को मिले आरक्षण

भारतीय संस्कृति में ज्योतिष का बड़ा महत्व रहा है। ज्योतिष ज्ञान से नक्षत्र विज्ञान की उत्पति हुई है। ज्योतिष में ग्रहों व नक्षत्रों की सटीक गणना की पद्धति का विज्ञान भृगु ऋ़षि ने दिया था, जो भृगुसंहिता में दर्ज है। ब्राह्मणों में भृगु ऋषि के वशंज जोशी भड्डरी जाति, जो ज्योतिष विज्ञान के प्राकाण्ड विद्वान हैं और ये जनमानस में बिना किसी पूर्वाग्रह के ज्योतिष ज्ञान, ग्रह नक्षत्र, हिंदू रीति रिवाज से कर्म का प्रतिपादन करते रहे हैं। ज्योतिष कर्म व पुरोहिती के माध्यम से जन का कल्याण कलांतर से करते आये हैं। भृगु महाऋ़षि के वंशज में भड्डरी महाऋ़षि ने भड्डर संहिता की रचना की, जो ज्योतिष ग्रंथ है।
भड्डरी वंश शनि का दान लेना, प्रेतबाधा का निवारण, ज्योतिष नक्षत्र का ज्ञान यजमानों को देते रहे हैं व उनकी समस्याओं का हल करते रहे हैं। कालांतर से भारत के अनेकों क्षेत्रों में भ्रमण करते हुए आदिवासी क्षेत्रों में भड्डरी जोशी ब्राह्मण, वहां के आदिवासियों को चेला बनाते थे और उनको सही दिशा दिखाते थे। भड्डरी जोशी कलांतर से इसी जीविका से जुड़े रहे हैं। दान—पुण्य पर जिंदा रहने वाले भृगुवंशीय भड्डरी के मन में …