बुधवार, 13 मई 2015

लक्ष्य को पहचाने और फिर उठाए कदम

अभिषेक कांत पाण्डेय

लक्ष्य को साधने से पहले समग्र जानकारी होना जरूरी है, फिर लक्ष्य और आपके बीच आने वाली समस्याओं को सुलझाने की जरूरत होती है। इसमें सफलता मिलने के बाद आप बेस्ट बनते हैं और फिर चिंतन-मनन से नया आइडिया आता है, जो आपको सफलता के शिखर पर विराजमान रखता है।
लक्ष्य तय करें
कई नाव की सवारी करने से अच्छा है कि पहले अपना एक लक्ष्य निर्धारित करें, इस लक्ष्य को पाने के लिए तत्परता दिखाएं। लक्ष्य के अनुरूप ज्ञान अर्जित करें, यह ज्ञान यानी आपके लक्ष्य को प्रा’ करने के रास्ते कौन-से हैं? मसलन किन-किन व्यक्तियों से अच्छी जानकारी मिल सकती है, किताबों से जानकारी, टीवी से जानकारी, अखबार से जानकारी, लोगों से बातचीत से जानकारी लें। लक्ष्य से भटकें न आप, इसीलिए नामचीन लोगों से मुलाकात करें, उनके बारे में जानें, माध्यम कोई भी हो सकता है। आप अपने लक्ष्य के अनुरूप ही ऐसे मशहूर वैज्ञानिक, दार्शनिक, इतिहासकार, तकनीकी विशेषज्ञों की जीवनी पढिèए। अब तक आप अपने लक्ष्य के पाने का आधा रास्ता पार कर चुके होंगे।

समस्याएं आएं तो समझें
और सुलझाएं

लक्ष्य के निर्धारण और उससे संबंधित ज्ञान पाने के बाद अब आपके सामने होगी समस्या। पहला काम घबराहट को दूर करें और स्वयं के अंदर आत्मविश्वास जगाएं, अब समस्या आप पर हावी नहीं होगी। अगला स्टेप समस्या के उत्पन्न होने के कारण को समझें। अगर आपको समस्या की उपज के बारे में समझ में आ गया तो तुरंत कदम उठाएं। इस तरह आप अपने लक्ष्य के और नजदीक पहुंच जाते हैं।

बेस्ट हैं तो सफलता
आपको मिलेगी

यह जान लें कि कोई भी व्यक्ति जन्म लेते ही बेस्ट नहीं हो जाता है बल्कि यह लगातार चलने वाली प्रक्रिया है। बेस्ट बनने के लिए कई पड़ावों से गुजरना पड़ता है, बिलकुल उसी तरह जैसे अगली कक्षा में जाने के लिए कई टेस्ट में पास होना जरूरी होता है। बेस्ट बनने के लिए सबसे पहला पड़ाव है-अपना आदर्श तय करना, फिर उसके मुताबिक लक्ष्य तय करना, उन लक्ष्यों पर अडिग रहना। उन्हें पूरा करने के लिए हर जोखिम उठाना। जो इन सारे पड़ावों को पार करता है, वही बेस्ट का तमगा हासिल कर पाता है।

चिंतन-मनन है जरूरी
इंसान तब हार मान लेता है, जब उसका दिमाग चिंतन और मनन करना बंद कर देता है। सफलता के लिए और सफलता बनाए रखने के लिए चिंतन-मनन करें, हर पहलू पर नया विचार करना और उसे व्यवहार में उतारना जरूरी है। चिंतन और मनन करने से विश्लेषण करने की क्षमता बढ़ती है। यह मस्तिष्क व्यक्ति को ईश्वर का मिला सर्वोत्तम उपहार है, इसका उपयोग कीजिए। याद रखिए, सोचना विकास की निशानी, न सोचना विनाश की निशानी है।