शुक्रवार, 19 जून 2015

फादर डे

फादर डे

मैं जब भी देखता तो
उसके पिताजी बड़े दिखते
और मेरे पिताजी छोटे
पिताजी ने हमें नाम दिया
और उनके पिताजी ने उन्हें काम दिया
वे वंशों वाले पिताजी हैं उनके।
हमारे पिताजी मेहनतकश है।
हमें मोमबत्ती में पढ़ाया
इंसान बनाया।
उनके पिताजी ने उन्हें ताज पहनाया
चुनाव जीतवाया,
हम हमारे पिताजी से कहते कि
हमें कितना परिश्रम करना है
हमारे पिताजी कहते तुम तुम हो
सबसे अलग हो
तुम ही बदल सकते हो दुनिया।
मेरी बात समझ में है
मेरे पिताजी ठीक कहते हैं
उनके पिताजी उनके लिए चांदी के चम्मच बने।
फिर भी मैं सोचता वंशों की बैशाखी पर
उनके पिता ने बैठाया क्यों अपने बेटे को।
मेरे पिताजी इंतजार कर रहे
माली की तरह,
बेटा-
वंशों वाले बेटाओं से लड़ रहा है
उनके पिताओं से और उनके बेटों से
जिन्होंने लोकतंत्र को ढाल बनाया
मैं और मेरे पिता, हम
एक नई खोज में एक नये विचारों में
चिंगारी पैदा कर रहें
उनके पिता और बेटों के खिलाफ।

अभिषेक कांत पाण्डेय

सकरात्मकता लाती है जीवन में जीवंतता



अभिषेक कांत पाण्डेय

सकारात्मक सोच जीवन में रंग भरता है, वहीं नकारात्मक सोच जीवन में निराशा उत्पन्न करता है। क्या आपने कभी सोचा कि मन में सबसे अधिक नकारात्मक सोच क्यों आता है। थिंकिंग रिसर्च में भी यही प्रमाणित हुआ है कि हमारे कार्य नकारात्मक ऊर्जा से प्रेरित होते हैं। नकरात्मक सोच हमें आनंद और स्वस्थ जीवन से दूर ले जाती है। दिमाग को समझाएं और सकरात्मक सोच से प्रेरित रहें, देखिए जीवन में जीवंतता दौड़ी चली आएगी।
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आप हमेशा सकारात्मक सोच वाले व्यक्ति को ही पसंद करते हैं। जब कोई व्यक्ति नया काम शुरू करता है तो सकारात्मक सोच लेकर चलता है। वहीं जब नकारात्मक सोच रखने वाला कोई व्यक्ति आपके कार्य की सफलता पर संदेह उत्पन्न करता है और कार्य को मुश्किल भरा बताता है तब आप उसके विचारों की नकारात्मक ऊर्जा से दूर रहने की कोशिश करते हैं। लेकिन उसके बाद आप में नकारात्मक सोच पैदा होने लगती है कि सफलता मिलेगी कि नहीं? ये संशय कैसे आता है, रिसर्चरों ने इस रहस्य से पर्दा उठाया है। यूएस नेशनल साइंस फाउंडेशन ने रिसर्च में पाया कि हमरे दिमाग में आमतौर पर एक दिन में करीब 5० हजार विचार आते हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें से 7० प्रतिशत से 8० प्रतिशत विचार नकारात्मक होते हैं। गणना करें तो एक दिन में करीब 4० हजार और एक साल में करीब 1 करोड़ 46 लाख नकारात्मक विचार आते हैं। अब यदि आप यह कहें कि दूसरों की तुलना में आप 2० प्रतिशत सकारात्मक हैं, तो भी एक दिन में 2० हजार नकारात्मक विचार होंगे, जो नि:संदहे आवश्यकता से बहुत अधिक हैं। अब सवाल यह उठता है कि नकारात्मक विचार इतना अधिक आता क्यों है?

नकारात्मक विचार क्यों आता है 
आदिकाल में मनुष्य गुफाओं में रहता था, जंगली जानवर और दैवीय आपदा से अतंकित रहता था, तब यही नकारात्मक सोच उसे उन कठिन परिस्थितियों से सचेत करती थी, जो जैविक विकास के क्रम में स्वयं को जिंदा रखने के लिए प्राकृतिक प्रदत्त थी। दिमाग हमेशा तथ्यों और कल्पनाओं के आधार पर नकारात्मक सोच पैदा करता है, जिससे उस समय के मनुष्यों को फायदा मिलता था। वर्तमान में मनुष्य में जिनेटिकली नकारात्मक विचार इसी कारण से आते हैं। रिसर्च में भी यह बात सामने आई कि नकारात्मक विचार और भाव दिमाग को खास निर्णय लेने के लिए उकसाते हैं। ये विचार मन पर कब्जा करके दूसरे विचारों को आने से रोक देते हैं। हम केवल खुद को बचाने पर फोकस होकर फैसला लेने लगते हैं। नकरात्मक विचार के हावी होने के कारण हम संकट के समय जान नहीं पाते कि स्थितियां उतनी बुरी नहीं हैं, जितनी दिख रही हैं। संकट को पहचानने या उससे बचने के लिए नकारात्मक विचार जरूरी होते हैं, जो कि हमारे जैविक विकास क्रम का ही हिस्सा है, पर आज की जिंदगी में हर दिन और हर समय नकारात्मक बने रहने की जरूरत नहीं। इससे खुद का नुकसान ही होता है।

सकारात्मक सोच से जिंदगी में आती है जीवंतता
अगर हम नकारात्मक विचारों को छोड़ दें तो हर दिन 2० प्रतिशत आने वाल्ो सकारात्मक विचार हमें आशावादी दृष्टिकोण प्रदान करता है। अध्यात्म और योग क्रिया के उपचार में आशावादी दृष्टिकोण हमारे दिमाग में उत्पन्न किया जाता है। आशावादी दृष्टिकोण हर दिन के तनाव व डिप्रेशन को कम करता है। इस कारण से हम परिस्थितियों के उज्जवल पक्ष को देख पाते हैं। चिता और बेचैनी का सामना बेहतर करते हैं तो हृदय रोग, मोटापा, ओस्टियोपोरोसिस, मधुमेह की आशंका कम होती है। हार्वर्ड स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ के अनुसार, आशावादी लोगों में हार्ट अटैक की संभावना कम होती है। 

आशावादी सोच से लाभ ही लाभ

साइकोलॉजी डिपार्टमेंट में प्रो. सुजेन ने छात्रों पर किए अपने अध्ययन में बताती हैं कि नकारात्मक विचार रखने वाले छात्रों की इम्यूनिटी कम होती है, वहीं आशावादी दृष्टिकोण से शरीर की ताकत बढ़ती है। सकारात्मकता ही सोचने-समझने की क्षमता को बढ़ाती है। आपकी नजर नए विकल्प और चुनावों पड़ती है, वहीं जब यह पता चलता है कि परेशानी उतनी नहीं है जितनी नकारात्मक सोच के कारण दिखती है तब समाधान के लिए आप पूरी स्पष्टता के साथ निर्णय व चुनाव कर पाते हैं। 


नकारात्मकता और सकारात्मकता के दो पहलू
-नकारात्मक विचार नया सीखने व नए संसाधन जोड़ने की क्षमता कम करते हैं। व्यक्ति में नकारात्मकता का स्तर अधिक होगा तो वह नए काम को सीख नहीं पाएगा, कॅरिअर में सफलता नहीं मिलेगी, सामाजिक संबंध भी नही बन पाएगा, इस तरह वह विकास की ओर नहीं बढ़ पाएगा।
- सकारात्मक दृष्टिकोण के कारण आप अपने ही समान दूसरे सकारात्मक लोगों और विचारों के साथ जुड़ते हैं। कई दोस्त और अच्छे संबंध बनते हैं। संबंधों के सकारात्मक पक्षों को देख पाते हैं, जिससे आपसी संबंध मजबूत होते हैं और ऐसे व्यक्ति कामयाबी की सीढ़ी पर चढ़ते हैं। अपने विचारों समझें और उन्हें सकारात्मक विचार से बदलें और नकारात्मक शब्दों की जगह सकारात्मक शब्द बोलें। 

मेटेरोलॉजिस्ट बन जानें मौसम का मिजाज


अभिषेक कांत पाण्डेय
भारत में मानसून का पूर्वानुमान लगाना मौसम विभाग का काम है। कभी-कभी यह अनुमान गलत साबित हो जाता है। कई तरह के फैक्ट इंफॉर्मेशन और डेटा एनालिसिस करने के बाद ही मौसम का पूर्वानुमान लगाया जाता है। इस काम में लगे प्रोफशनल्स के लिए यह बहुत जिम्मेदारी भरा काम है। इस क्षेत्र में आज कॅरिअर के तमाम ऑप्शन मौजूद हैं। एरोप्लेन संचालन से लेकर खेल के मैदानों तक मौसम विज्ञान की भूमिका बढ़ी है। कॅरिअर के लिहाज से मौसम विज्ञानी बनना, आज सम्मानजनक और देश सेवा का काम है।
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सरकारी विभागों से लेकर मौसम विज्ञान की भविष्यवाणी करने वाली प्रयोगशालाओं, अंतरिक्ष विभाग और टेलीविजन चैनल पर मौसम विज्ञान एक अच्छे कॅरिअर के लिए आपको बुला रहा है। अगर आपको हवा, बादल, समुद्र, बरसात, धुंध-कोहरे, आंधी-तूफान और बिजली में दिलचस्पी है तो मौसम विज्ञान का क्षेत्र न केवल आपकी इन क्षेत्रों की जिज्ञासाओं की पूर्ति करेगा, बल्कि एक शानदार कॅरिअर भी प्रदान करेगा। 
मौसम की हर तरह की जानकारी उपलब्ध कराने का यह क्षेत्र बहुत ही बड़ा है। इनमें परिचालन, अनुसंधान तथा अनुप्रयोग अर्थात ऑपरेशंस-रिसर्च या एप्लिकेशंस के क्षेत्र में बहुआयामी कॅरिअर अपनी रुचि के अनुसार आप बना सकते हैं। ऑपरेशंस के अंतर्गत मौसम उपग्रहों, राडार, रिमोट सेंसर और एयर प्रेशर, टेंप्रेचर, एनवायरमेंट, मिडिटी से रिलेटेड इंफॉर्मेशन को इकट्ठा कर मौसम की भविष्यवाणी की जाती है। 

क्या है मौसम विज्ञान
मौसम विज्ञान यानि मौसम से जुड़ी कई प्रक्रियाओं और उससे संबंधित पूर्वानुमानों का अध्ययन। मौसम की सही जानकारी देने के लिए तीन बातों आकलन, समझ और मौसम के अनुमान को शामिल किया जाता है। मेटेरोलॉजी (मौसम विज्ञान) व इससे जुड़े प्रोफेशनल्स को मेटेरोलॉजिस्ट (मौसम विज्ञानी) कहा जाता है। कुछ वर्षों से नई तकनीकों के आने से मौसम का पता लगाना काफी सरल और रोचक हो गया है। साथ ही इसमें कई तरह के अवसर भी सामने आए हैं। आज सैटेलाइट के जरिए दुनिया के किसी भी जगह के मौसम का पूर्वानुमान लगाना संभव हो पाया है, जबकि एडवांस कंप्यूटर और सुपर कंप्यूटर से डाटा एकत्र करने का कार्य किया जाता है। इस क्षेत्र के अंतर्गत मौसम, जलवायु की फिजिकल स्ट्रक्चर्स, डाइनेमिकल और केमिकल जैसे फैक्टर्स का सावधानी से अध्ययन किया जाता है। दरअसल मिलने वाले सही फैक्ट की अच्छी तरह से स्टडी और एनालिसिस के जरिए आने वाले मौसम का सटीक पूर्वानुमान लगाया जा सकता है।

मौसम विज्ञान की शाखाएं
क्लाइमेटोलॉजी: 
इस शाखा में किसी क्षेत्र या स्थान विशेष की जलवायु का अध्ययन किया जाता है, जो निर्धारित समय के भीतर ही किया जाता है।

सिनॉप्टिक मेटेरोलॉजी:
यहां पर कम दबाव के क्षेत्र, वायु, जल, अन्य मौसम तंत्र, चक्रवात, डिप्रेशन और इसमें एकत्र किए जाने वाले डाटा वेदर मैप (जो कि दुनिया के मौसम का सिनॉप्टिक व्यू बताता है) की जानकारी मिलती है।

डाइनेमिक मेटेरोलॉजी:
इसके अंतर्गत मैथमैटिक फार्मूला के जरिए वायुमंडलीय प्रक्रियाओं का अध्ययन किया जाता है। दोनों के साथ-साथ होने के कारण इसे न्यूमेरिक मॉडल भी कहा जाता है।

फिजिकल मेटेरोलॉजी:
इसमें वायुमंडल के फिजिकल प्रोसेस के अलावा सोलर रेडिएशन, पृथ्वी में विलयन और प्रकीर्णन, वायुमंडलीय व्यवस्था आदि को शामिल किया जाता है।

एग्रीकल्चर मेटेरोलॉजी:
यहां फसलों की पैदावार और उसके नुकसान में मौसम संबंधी सूचनाओं का आकलन किया जाता है।

एप्लायड मेटेरोलॉजी:
इसके अंतर्गत मेटेरोलॉजिस्ट किसी विशेष कार्य जैसे- एयरक्राफ्ट डिजाइन, वायु प्रदूषण पर नियंत्रण, आर्किटेक्चरल डिजाइन, अर्बन प्लानिग, एयरकंडीशनिग, टूरिज्म डेवलपमेंट आदि के प्रति थ्योरी रिसर्च करते हैं।

उपलब्ध कोर्स
मेटेरोलॉजी में कई तरह के अंडरग्रेजुएट कोर्स जैसे- बीएससी, बीटेक शामिल हैं। कई ऐसी यूनिवसिर्टी और आईआईटी/कॉलेज हैं, जो इससे संबंधित अंडरग्रेजुएट और पीजी कोर्स संचालित करते हैं। दो वर्षीय एमएससी और एमटेक में दाखिले के लिए बैचलर डिग्री होनी जरूरी है। अगर आप एमफिल या पीएचडी करना चाहते हैं तो मास्टर डिग्री हासिल करना जरूरी है।

संभावनाएं
नौकरी गर्वनमेंट सेक्टर में अधिक मिलती है, वहीं कुछ प्राइवेट कंपनियां भी एटमॉसफेरिक साइंटिस्टों को पर्यावरणीय प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए रखती हैं। मिलिट्री भी एयरोप्लेन फ्लाइट्स, मिसाइल लॉन्चिंग और शिप मूवमेंट आदि में मौसम संबंधी सूचना को वरीयता देती है और उसी के आधार पर समय-समय पर मेटेरोलॉजिस्ट रख्ों जाते हैं। स्पेस सेंटर में भी किसी सेटेलाइट की लॉन्चिंग के दौरान मौसम को जानने के लिए मेटेरोलॉजिस्ट की नियुक्ति की जाती है। पूरे भारत में इंडियन मेटेरोलॉजिकल डिपार्टमेंट की कई शाखाएं हैं, जिसमें मेटेरोलॉजिस्ट की डिमांड हमेशा बनी रहती है।

सैलरी
मेटेरोलॉजिस्ट अथवा साइंटिस्ट की सैलरी उसकी योग्यता और अनुभव पर निर्भर करती है। अगर आपमें क्षमता है, नॉलेज और एक्सपीरियंस रखते हैं तो आप विदेश में भी नौकरी पा सकते हैं और अच्छी सैलरी अचीव कर सकते हैं। सरकारी संस्थाओं में सैलरी सरकार द्बारा निर्धारित वेतनमान के अनुसार होती है। =

यहां से करें कोर्स

भरतियार यूनिवर्सिटी, कोयंबटूर
पंजाबी यूनिवर्सिटी, पटियाला
कोचीन यूनिवर्सिटी ऑफ 4साइंस एंड टेक्नोलॉजी, कोचीन
आईआईटी, दिल्ली
इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ 4ट्रॉपिकल मेटेरोलॉजी, पुणे 
शिवाजी यूनिवर्सिटी, विद्यानगर, कोल्हापुर, महाराष्ट्र 

शनिवार, 13 जून 2015

अनोख्ो होटल में स्वागत है

जानकारी


होटल का मतलब है, खाना-पीना, मौज-मस्ती और खूब आराम से जीना। लेकिन कुछ ऐसे अनोख्ो होटल हैं, जहां ठहरना किसी रोमांच से कम नहीं है। सीवेज पाइप में होटल, कुत्ते के आकार का होटल, समुद्र के अंदर होटल इस तरह के अनोख्ो होटल हैं, इनके बारे में जानकर तुम आश्चर्य में पड़ जाओगे।
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सीवेज पाइप में सोते हैं लोग
ऑस्टिàया में बहुत अजीब होटल है, यहां पर लोग सीवेज पाइप में सोने के लिए पैसे चुकाते है। यह होटल दास पार्क में है और इसका नाम सीवेज पाइप होटल है। 2 मीटर लंबे सीवेज पाइप में बने इस होटल में एक बेड, छोटी-सी आलमारी, स्लीपिग बैग होता है। इसमें लाइट की भी पूरी व्यवस्था है लेकिन इसमें खिड़कियां नहीं हैं, हवा छोटे से रोशनदान से आती है। होटल में रुकने वालों को बाथरूम और भोजन के लिए पार्क में बने रेस्तरां में जाना पड़ता है।

डॉग के मुंह में होटल
अमेरिका में है 'डॉग बार्क पार्क इन’ नाम का यह दुनिया का सबसे बड़ा डॉग की तरह दिखने वाला गेस्टहाउस है। यहां के रहने वाले लोग को 'स्वीट विली’ कहते हैं। लकड़ी से बना यह होटल 9 मीटर लंबा और 5 मीटर चौड़ा है। होटल के अंदर बेड, टेबल फर्नीचर ही नहीं, मेहमानों को सर्व किया जाने वाला खाना, यहां तक कि कुकीज भी डॉग-थीम पर आधारित होती हैं। यह किसी वंडरलैंड से कम नहीं है।


डारावना है यह होटल
'प्रोपेलर द्बीप सिटी लॉज’ जर्मनी में है। इस होटल के कई कमरों का फर्नीचर छत से झूल रहा है, हर चीज में रहस्य है। क्या तुम ताबूत की शेप के बेड में सोने की कल्पना कर सकते हो। यह बहुत रोमांचक है। ऐसे बेड वाले होटल की कल्पना जर्मन कलाकार लॉर्स स्ट्रोसचेन ने की थी। यहां ग्लास के बने 3० कमरे हैं। इनमें सोने के लिए ताबूत बेड हैं, जो आधे फर्श के भीतर धंसे हैं।

जादू की दुनिया से भरा होटल
'मैजिक माउंटेन लॉज’ चिली में है। जादू की कहानियों में मौजूद पिरामिड के आकार में बने, पेड़-पौधों से ढके और चोटी के ऊपर से बहते झरने वाले होटल में रहना रोमांच से कम नहीं। इसमें 5 मंजिले हैं, जिनमें 13 कमरे बने हैं। इस लॉज की छत पर खूब पेड़-पौधे हैं। यह लकड़ी और पत्थर से बना है। पहाड़नुमा इस होटल के चारों ओर लगे पेड़-पौधे और चोटी से बहता गर्म पानी का झरना, देखने में बहुत खूबसूरत लगता है। इस होटल तक पहुंचने के लिए झरने पर बने लकड़ी के पुल से रास्ता है, इसे पार करना रोमांच से कम नहीं है।



पानी के अंदर होटल
सोचो काश तुम समुद्र के अंदर मछलियों के साथ रह पाते तो कितना मजा आता। लेकिन एक होटल है, जो तुम्हें समुद्री जीवन का मजा दिला सकता है। अमेरिका में ऐसा एक होटल है जूल्स लॉज। यह समुद्र तल से नीचे 3० फीट गहरे पानी के अंदर बना है। तुम सोच रहे हो ऐसा कैसे संभव है, तो ऐसे की ये कमरे ग्लास के बने है और इसमें दो कमरे हैं। इसके अंदर बैठकर बाहरी समुद्री दुनिया का मजा ल्ो सकते हो। सबसे बड़ी बात इस लॉज तक पहुंचने के लिए मेहमानों को स्कूबा डाइविग करके ही जाना होता है। अगर उन्हें डाइविग नहीं आती है, तो वहां मौजूद ट्रेनर सिखाता है।





शुक्रवार, 5 जून 2015

धर्म सीखाता है पर्यावरण की रक्षा करना

आस्था
धर्म सीखाता है पर्यावरण की रक्षा करना
अभिषेक कांत पाण्डेय
धरती कभी आग का गोला था, पर्यावरण ने इसे रहने लायक बनाया और प्रकृति ने मुनष्यों सहित सारे जीवों, पेड़-पौधों का क्रमिक विकास किया। प्रकृति और जीव एक दूसरे के पूरक हैं। प्रकृति सत्य है, जो धर्म को धारण करती है, इसीलिए ब्रह्माण्ड में केवल धरती पर ही जीवन है। बिना प्रकृति के न तो जीवन उत्पन्न हो सकता है और न ही धर्म। इसीलिए धर्म मनुष्य को प्रकृति के रक्षा की सीख देता है।
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हमारा शरीर प्रकृति के पांच तत्त्वों से मिलकर बना है-
क्षितिज, जल, पावक, गगन, समीरा। पंच तत्व यह अधम शरीरा।
इन पंच तत्त्वों के उचित अनुपात से ही चेतना (जीवन) उत्पन्न होती है। धरती, आकाश, हवा, आग, और पानी इसी के संतुलित चक्र से ही धरती पर पर्यावरण निर्मित हुआ है, जो जीवन के मूल तत्त्व हैं। धर्म मे ही इन प्रकृति के तत्त्वों को पूजा, आराधना और तपस्या से जोड़ा गया है। हमारे शरीर और मन को प्रकृति ही नियंत्रित करती है। यह प्रकृति ही ईश्वर का स्वरूप है, यानी ईश्वर प्रकृति को संचालित करता है लेकिन जब मुनष्य स्वार्थवश प्रकृति के साथ खिलवाड़ करना आरंभ करता है तो प्रकृति का कूपित होना स्वाभाविक है। प्रकृति के किसी भी एक तत्व का संतुलन बिगड़ता है, तो इसका प्रभाव हमारे ऊपर पड़ता है। बाढ़, भूस्खलन, भूकंप, ज्वालामुखी उद्गार जैसी देवीय आपदा सामने आती हैं।

प्राकृतिक तत्त्वों में संतुलन की सीख देता धर्म

धमã हमें प्रकृति की रक्षा करना सीखाता है। धर्म हमें नैतिक, सद्विचार और विवेकशील प्राणी बनाता है। हम अच्छे काम तभी कर सकते हैं, जब हम प्रकृति की रक्षा करना सीख जाए। इसीलिए हर धर्म प्रकृति के साथ संतुलन बना कर रहने की सीख देता है। अप्राकृतिक यानी प्रकृति के साथ खिलवाड़ करना जैसा कोई भी कार्य धर्म के विपरीत है। सृष्टि में पदार्थों में संतुलन बनाए रखने के लिए यजुर्वेद में एक श्लोक वर्णित है-
ओम् द्यौ: शान्तिरन्तरिक्षँ शान्ति: पृथिवी शान्तिराप: शान्तिरोषधय: शान्ति:।
वनस्पतये: शान्तिर्विश्वे देवा: शान्तिर्ब्रह्म शान्ति: सर्वँ शान्ति: शान्तिरेव शान्ति: सा मा शान्तिरेधि।।
ओम् शान्ति: शान्ति: शान्ति:।।
इस श्लोक से ही मानव को प्राकृतिक पदार्थों में शांति अर्थात संतुलन बनाए रखने का उपदेश दिया गया है। श्लोक में पर्यावरण समस्या के प्रति मानव को सचेत आज से हजारों साल पहले से ही किया गया है। पृथ्वी, जल, औषधि, वनस्पति आदि में शांति का अर्थ है, इनमें संतुलन बने रहना। जब इनका संतुलन बिगड़ जाएगा, तभी इनमें विकार उत्पन्न हो जाएगा।

धर्म है पर्यावरण की रक्षा करना

सनातन धर्म में 'वृक्ष देवो भव, सूर्य देवो भव’ कहकर धर्म को प्रकृति से जोड़ा गया है। स्मृति ग्रंथों में नदियों, तालाबों में मल-मूत्र विसर्जन कर प्रकृति को विकृत करने को पांच महापापों की श्रेणी में रखा गया है। धर्म में प्रकृति का महत्व है, पर्वतवासिनी माता पार्वती, जो अन्नपूर्णा हैं, उनके हाथ में अस्त्र-शस्त्र और शास्त्र हैं। भगवान शंकर की जटाओं से गंगा निकलती है और वह गले में सर्पहार पहनते हैं। शेषनाग भगवान विष्णु जी की छत्र-छाया करते हैं, वह क्षीरसागर में विश्राम करते हैं। समस्त नवग्रह जो इस ब्रम्हाण्ड की देन है और अन्य ग्रहों व तारों की अपेक्षा हमसे नजदीक हैं। इसीलिए इनका प्रभाव धरती पर पड़ता है, जिसे धर्म इन प्राकृतिक घटनाओं जैसे सूर्यग्रहण और चंद्रग्रहण के धरती और मनुष्यों पर पड़ने वाले प्रभावों का विवेचन करता रहा है। भजनों में, कीर्तन में, जप, तप में हम जिस धर्म को धारण करते हैं और वास्तव में जिसकी प्रेरणा ईश्वर हमको देता है, उसका ही पता यही है कि वह धर्म है पर्यावरण की रक्षा करना।


पर्यावरण है धरती का सुरक्षा कवच
पर्यावारण इस धरती का रक्षा कवच है, सूर्य की हानिकारक पराबैगनी किरणों से आजोन गैस की परत ही बचाती है। दुर्गासप्तशती का प्रारंभ ही देवी कवच से होता है। इसमें समस्त देवियों से प्रार्थना होती है कि वह चारों दिशाओं में हमारी रक्षा करें। हर दिशा में हमारी रक्षा करें। अर्गलास्तोत्र में देवी से प्रार्थना होती है-
देहि सौभाग्यं आरोग्यम देहि मे परमां श्रियम।
संपूर्ण दुर्गासप्तशती में प्रत्येक प्राणी के स्वास्थ्य और श्रीवृद्धि की कामना है। देवी का अर्थ ही प्रकाश है। नवदुर्गा तो प्रकृति की पोषक शक्तियां हैं और कोई नहीं। दैहिक, दैविक और भौतिक को ही त्रिदेव यानी ब्रह्मा (सृष्टि), विष्णु (पालन) और महेश (संहार) हैं। तीन ही देवियां हैं। सभी का संदेश पर्यावरण की रक्षा है।


बॉक्स
प्रकृति ने दिया शरीर
आत्मा शरीर को धारण करता है, यह शरीर जो इस प्रकृति का दिया है, वह एक दिन नष्ट हो जाएगा। श्ोष रहेगा तो आत्मा, जिसे परमात्मा यानी ईश्वर में विलीन होना है। यह प्रकृति सत्य है इसीलिए मनुष्य को प्रकृति की रक्षा का कर्तव्य निभाना चाहिए, यह उसका मानवीय, धार्मिक कर्तव्य है। यही सच्चा धर्म है, धर्मग्रंथों में कहा गया है कि ब्रह्मा ने ही इस सृष्टि को बनाया है। इसीलिए प्रकृति की रक्षा करना हमारा कर्तव्य है और धर्म है। श्रीकृष्ण ने गीता में कहा कि इहलोक यानी इस धरती में मनुष्य शरीर रूपी कपडे को धारण किया है। वहीं परलोक जहां पर केवल आत्मा ही जा सकती है, भौतिक शरीर धरती पर ही नष्ट हो जाता है। हमारे अच्छे कर्म ही परमात्मा से साक्षात्कार कराता है। यानी हम प्रकृति से खिलवाड़ करना बंद करें और अच्छे कर्मों में जुड़ जाएं। आाओ अपनी धरती को बचाए।

सोमवार, 1 जून 2015

डाक विभाग में ढेरों वैकेंसी आर्इ् है

भारतीय डाक विभाग के उत्तर प्रदेश पोस्टल सर्किल में पोस्टमैन समेत कई पदों के लिए वैकेंसी आई है। डाक विभाग में स्थाई नौकरी पाने का यह सुनहरा अवसर है। आपकी सुविधा के लिए यहां फार्म भरने से लेकर तैयारी करने की पूरी जानकारी दी जा रही है।

परीक्षा की तैयारी
दो घंटे में 1०० अंकों का एक एप्टीटñूड पेपर ऑब्जेक्टिव टाइप का होगा। इसका स्तर हाईस्कूल लेवल का होगा। इस पेपर में चार पार्ट होंगे। हर पार्ट में 25 अंकों के 25 प्रश्न होंगे।
ए पार्ट: इस पार्ट में जनरल नॉलेज से रिलेटेड प्रश्न होंेगे जिनमें जियोग्रॉफी, इंडियन हिस्टàी, फ्रीडम स्टàल, कल्चर, जनरल पॉलिटी एंड कॉन्स्टिीट्यूशन ऑफ इंडिया, इकोनॉमिक्स, जनरल साइंस, करेंट से प्रश्न पूछे जाएंगे। इसका स्तर 1०वीं का होगा। इन टॉपिक से बनने वाले जनरल प्रश्न पर आप ध्यान दें और पाठñ पुस्तक से पढ़ें।
बी पार्ट: इस पार्ट में मैथमेटिक्स से रिलेटेड क्यूश्चन आएंगे। मैथ में नंबर सिस्टम, डेसिमल, फ्रैक्शन और फंडामेंटल मैथ को अच्छी तरह से समझ लें। छोटे-छोटे मैथ के रूल से बने सवालों की प्रैक्टिस करें।
पार्ट सी: इस पार्ट में दो सेक्शन हैं। पहली भाषा अंग्रेजी और दूसरी हिंदी दोनों के कुल मिलाकर 5० प्रश्न पूछे जाएंगे। इसमें अंग्रेजी और हिंदी भाषा की दक्षता का मूल्यांकन होगा। अगर आपका अंग्रेजी ज्ञान अच्छा है तो ज्यादा मेहनत नहीं करनी होगी लेकिन अंग्रेजी कमजोर है तो इस पार्ट में अधिक अंक लाने के लिए दिए सिलेबस के अनुसार आप तैयारी करें। आर्टिकल्स, प्रिपोजिशन, कंजेक्शन, टेंस, वर्ब, सिनोनिम्स एंड एन्टोनिम्स, वैकोबलरी, सेंटेंस आदि टॉपिक को अच्छे से कवर करें। हिंदी में स्वर, व्यंजन, समास, संधि, अलंकार, मुहावरा, वाक्य प्रयोग पर केंद्रित सवाल होंगे। आपने अगर हिंदी माध्यम से पढ़ाई की है तो यह सेक्शन आपको आसान लगेगा, लेकिन ऐसे में आपको अंग्रेजी सेक्शन पर खासा ध्यान केंद्रित करना होगा।
चयन प्रक्रिया
अंतिम चयन प्रक्रिया के तहत एप्टीटñूड पेपर की मेरिट में आने वाले कैंडिडेट को नौकरी दी जाएगी। हर पार्ट के अलग-अलग कटऑफ मार्क्स निर्धारित किया गए हैं। यानि की आपको हर पार्ट में अच्छे अंक लाना है।= 

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नये प्रयोग के रूप में मृच्छकटिकम् नाटक का सफल मंचन

रंगमंच नाटक समीक्षा- अभिषेक कांत पांडेय प्रयागराज। उत्तर मध्य सांस्कृतिक केंद्र के प्रेक्षागृह में  प्रख्यात  संस्कृत नाटक  'मृच्छकट...