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July, 2015 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

समझें आखों की भाषा

रिलेशनशिप
कई बार जो बात हम अपनी जुबान से नहीं कह सकते, हमारी आंखें बयान कर देती हैं या यूं कहें हम अपनी बातों को कई बार इशारों से भी बाखूबी कह सकते हैं। अकसर ऐसा भी होता है कि पति कुछ कह नहीं पाते लेकिन वे इशारों में ही बहुत कुछ कह देते हैं, जिसको समझना आना चाहिए।

आप अपने पति को अच्छी तरह से जानती हैं लेकिन कभी-कभी लगता है कि आप उन्हें बेहतर तरीके से नहीं जानतीं। ऐसा क्यों होता है? कभी-कभी दांपत्य जीवन में नीरसता आ जाती है। पति के व्यवहार में बदलाव को आप समझ नहीं पाती हैं। उसके पीछे छिपी कोई समस्या है, जिसे वे आपसे शेयर नहीं करना चाहते हैं। पति की इस तरह की मनोस्थिति को आप थोड़ा ध्यान दें तो आसानी से समझ सकती हैं। क्या है आंखों और इशारों की भाषा, यह जानकर आप अपने दांपत्य जीवन को सुखमय बना सकती हैं।

आंखों को पढ़ें
कहते हैं कि किसी भी इंसान के मन में क्या चल रहा है, यह जानना मुश्किल है लेकिन आंखों को देखकर कई बार पता चल जाता है। पति के मन में क्या चल रहा है, जो आपसे शेयर नहीं कर पा रहे हैं। ऐसी स्थिति में कोई धरणा न बनाएं, जब तक सच्चाई न पता चले। आप पति से बात करें, इस दौरान उनकी आंखों को दे…

अच्छे वैवाहिक जीवन के लिए खुद को बदले

रिलेशनशिप

वैवाहिक जीवन सुखी बना रहे, इसके लिए आप हर तरह की कोशिशें करती हैं लेकिन कभी-कभी हम ईमानदारी से खुद से पूछें तो पाते हैं कि कहीं न कहीं रिश्ते को निभाने में चूक रहे हैं। क्या आपकी वैवाहिक जीवन की नैया डगमगा रही है, अगर ऐसा है तो संभलें और खुद पर गौर करें, बदलाव लाएं और अपनी मैरिज लाइफ को बचाएं। ————————————————————————————————————————
पिछले कुछ समय से हमारे देश में शादियां टूटने के मामलों में बेतहाशा वृद्धि हुई है। अग्नि को साक्षी मानकर जन्म-जन्मांतरों तक साथ रहने की कसमें खाने वाले जीवनसाथी आखिर क्यों साथ निभा नहीं पाते। कुछ स्थितियां हैं, जिनके कारण मैरिज लाइफ पर संकट आता है। इन्हें बस दूर करने की जरूरत है।

हमेशा खुद को सही न ठहराएं
शादी टूटने का ये भी एक कारण हो सकता है कि आप अपनी हर बात को सही साबित करने का प्रयास करें और दूसरे की भावनाओं की कद्र न करें। इस तरह से आप एकांगी सोच की तरफ झुक जाती हैं और पति आपकी इन आदतों से आहत होता हो इसीलिए इस पर गौर करें। जीवन साथी के बातों को भी सुनें और समझें।

पुरानी बातों को कुरेदना छोड़े
अगर आप बार-बार यह ताना देंगी कि पति के रिश्तेदार सह…

सिंगल मदर कामयाब भी, अच्छी मां भी

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अभिषेक कांत पाण्डेय

आज महिलाएं खुद फैसले ले रही हैं और क्यों न लें, वे पढ़ी-लिखी हैं, कामयाब हैं, उन्हें अपनी जिंदगी अपनी आजादी से जीने का हक है। आज सिंगल मदर बिना पुरुषों के खुद घर और बाहर की जिम्मेदारी बाखूबी उठा रही हैं। ये जीवन में कामयाब हैं और एक अच्छी मां भी हैं, इन्हें पुरुषों के सहारे की जरूरत नहीं है।


हमारा समाज आज कितना भी आधुनिक हो गया हो, लेकिन भारत में सिंगल मदर होना आसान नहीं है। अकेले एक महिला का जीवन यापन करना और बच्चों की परवरिश करना मुश्किलों से भरा है। सिंगल मदर के लिए सर्वोच्च न्यायालय के हक में अहम फैसला आया है कि सिंगल मदर को अपने बच्चे का कानूनी अभिभावक बनने के लिए बच्चे के पिता का नाम या सहमति की कोई जरूरत नहीं है। यह फैसला ऐसी महिलाओं के लिए राहत भरा है, जो किन्हीं कारणों से सिंगल मदर के रूप में जीवन जी रही हैं। लेकिन आज भी हमारा समाज सिंगल मदर को अच्छी निगाहों से नहीं देखता है। सामाज के दकियानूसी खयाल वाले कुछ ठेकेदार, अकेले जीने वाली महिलाओं के हक की बात पर उनके राहों में हमेशा कांटे बोते रहे हैं। सवाल यह उठता है कि महिलाएं हमेशा पुरुषों के मुताबिक क्यों चले,…

आओ जानें डायनासोर की दुनिया

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अभिषेक कांत पाण्डेय
स्टीवन स्पीलबर्ग की जुरासिक पार्क फ्रेंचाइजी की नई फिल्म 'जुरासिक वर्ल्ड’ इन दिनों खूब धूम मचा रही है। इससे पहले भी एक फिल्म 'जुरासिक पार्क’ आई थी, जिसने पूरी दुनिया में डायनासोर नाम के जीव से परिचय कराया था। तुमने भी वह फिल्म देखी होगी, आखिर कहां चले गए ये डायनासोर, कैसे हुआ इनका अंत... इनके बारे में तुम अवश्य जानना चाहोगे।


कई तरह के थे डायनासोर

स्टीवन स्पीलबर्ग की जुरासिक पार्क फ्रेंचाइजी की नई फिल्म 'जुरासिक वर्ल्ड’ इन दिनों खूब धूम मचा रही है। इससे पहले भी एक फिल्म 'जुरासिक पार्क’ आई थी, जिसने पूरी दुनिया में डायनासोर नाम के जीव से परिचय कराया था। तुमने भी वह फिल्म देखी होगी, आखिर कहां चले गए ये डायनासोर, कैसे हुआ इनका अंत... इनके बारे में तुम अवश्य जानना चाहोगे।

डायनासोर की और बातें
.इनके अब तक 5०० वंशों और 1००० से अधिक प्रजातियों की पहचान हुई है।
.कुछ डायनासोर शाकाहारी, तो कुछ मांसाहारी होते थे जबकि कुछ डायनासारे दो पैरों वाले, तो कुछ चार पैरों वाले थे।
.डायनासोर बड़े होते थे, पर कुछ प्रजातियों का आकार मानव के बराबर, तो उससे भी छोटे होते…

मध्य प्रदेश शासन में बनें ग्रामीण उद्यान अधिकारी

एग्रीकल्चर या इसके समकक्ष ग्रेजुएशन की डिग्री आपके पास है तो मध्य प्रदेश व्यावसायिक परीक्षा मंडल के जरिए ग्रामीण उद्यान विस्तार अधिकारी और इसके समकक्ष कई पदों के लिए जॉब अप्लाई कर सकते हैं। फार्म भरने से लेकर तैयारी करने की सारी जानकारी यहां से लीजिए-
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परीक्षा पैटर्न
विभिन्न पदों के लिए 6 सितंबर को दो पलियों में परीक्षा आयोजित होगी। दोनों प्रश्न पत्र दो घंटे और 1००-1०० अंक के होंगे। यह परीक्षा ऑब्जेक्टिव टाइप का होगी।
पहला पेपर हायर सेकेंडरी लेवल का होगा। 1०० अंकों के प्रश्न पूछे जाएंगे, सही उत्तर को काले बाल प्वाइंट पेन से भरना है। दिए गए सिलेबस अनुसार सामान्य तार्किक योग्यता, सामान्य ज्ञान, सामान्य हिंदी, सामान्य अंग्रेजी, सामान्य गणित, सामान्य विज्ञान, सामान्य कंप्यूटर ज्ञान के विषयों से प्रश्न पूछे जाएंगे। इन सब्जेक्ट की तैयारी के लिए इंटर लेवल की बुक पढ़ें। इसके साथ सही फैक्ट वाले जनरल नॉलेज की बुक की स्टडी भी करना लाभदायी है। दूसरी पाली में दूसरा पेपर होगा, इसमें आपने जिस पद के लिए आवेदन किया है, उससे संबंधित 1०० अंक के ऑब्जे…

करें कंबाइड हायर सेकेंडरी लेवल एग्जामिनेशन 2०15 की तैयारी

कर्मचारी चयन आयोग केंद्रीय संस्थानों में ग्रुप सी कैटेगरी के कर्मचारियों की भर्ती करता है। कंबाइड हायर सेकेंडरी लेवल एग्जामिनेशन 2०15 के लिए असिस्टेंट, डाटा एंट्री ऑपरेटर व एलडीसी के 6578 पदों पर भर्ती की अधिसूचना जारी की गई है। सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे हैं तो यह बिल्कुल सही समय है। इन पदों के लिए आवेदन करने की अंतिम तारीख 13 जुलाई है। एलिजिबिलिटी, एग्जाम पैटर्न और प्रिपरेशन की सही जानकारी इस नौकरी को हासिल करने में मदद करेगी।
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कर्मचारी चयन आयोग देशभर में केंद्रीय कर्मचारियों की भर्ती करता है। कंबाइड हायर सेकेंडरी लेवल एग्जामिनेशन 2०15 के जरिए ग्रुप सी के पद पर ज्वाइन करने के बाद आप विभागीय परीक्षा देकर गजेटेड ऑफिसर की पोस्ट तक भी पहुंच सकते हैं। अपने मनपसंद विभाग में ऊंचे ओहदे पर काम करने का सपना साकार करने का यह शॉर्टकट तरीका है। बस आप में ध्ौर्य और सही रणनीति को फॉलो करने की समझदारी होनी चाहिए, फिर कामयाबी आपके हाथ में होगी।

एलिजिबिलिटी
1 अगस्त, 2०15 से पहले आपके पास 12वीं या इसके समकक्ष कोई योग्यता होनी चाहिए। आवेदन करने की आयु 18 से 27 वर्ष के बी…

इन महिलाओं ने बदला समाज का नजरिया

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इन महिलाओं ने बदला समाज का नजरिया
पुरुषों के क्षेत्राधिकार समझे जाने वाले पेशों को अपनाकर महिलाओं ने बुलंदी हासिल की है, इसके लिए उन्हें समाज की बंदिशों और महिला होने के कारण कमजोर समझी जाने वाली मानसिकता से भी लड़ना पड़ा। मुंबई की महिला जासूस रजनी पंडित हो या देश की पहली महिला फॉयर इंजीनियर हर्षिनी कान्हेकर हो या फिर वाइल्ड लाइफ फोटोग्राफर राधिका रामासामी, इन्होंने कठिन राह चुनी और सफल होकर दिखा दिया की महिलाएं किसी से कम नहीं हैं।
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महिलाएं कमजोर नहीं होती हैं, बल्कि उन्हें कमजोर बनाया जाता है। सामाजिक ताने-बाने में दकियानूसी विचारों को लपेटकर महिलाओं के पैरों में बेड़ियां डालने वाला पुरुष प्रधान समाज अब महिलाओं के हौसले और हिम्मत को नहीं रोक सकता है। अब महिलाएं तमाम मुसीबतों का सामना करते हुए और अपने डर से बाहर निकलकर पुरुषों के एकाधिकार समझे जाने वाले क्ष्ोत्रों में सफलता का परचम लहरा रही हैं। हालांकि वैज्ञानिक शोधों के अनुसार पुरुषों की तुलना में महिलाओं में शारीरिक शक्ति कम होती है, तो दूसरी ओर स्वयं महिलाएं भी अपनी शारीरिक शक्तियों के लि…