शनिवार, 11 जुलाई 2015

अच्छे वैवाहिक जीवन के लिए खुद को बदले

रिलेशनशिप

वैवाहिक जीवन सुखी बना रहे, इसके लिए आप हर तरह की कोशिशें करती हैं लेकिन कभी-कभी हम ईमानदारी से खुद से पूछें तो पाते हैं कि कहीं न कहीं रिश्ते को निभाने में चूक रहे हैं। क्या आपकी वैवाहिक जीवन की नैया डगमगा रही है, अगर ऐसा है तो संभलें और खुद पर गौर करें, बदलाव लाएं और अपनी मैरिज लाइफ को बचाएं।

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पिछले कुछ समय से हमारे देश में शादियां टूटने के मामलों में बेतहाशा वृद्धि हुई है। अग्नि को साक्षी मानकर जन्म-जन्मांतरों तक साथ रहने की कसमें खाने वाले जीवनसाथी आखिर क्यों साथ निभा नहीं पाते। कुछ स्थितियां हैं, जिनके कारण मैरिज लाइफ पर संकट आता है। इन्हें बस दूर करने की जरूरत है।

हमेशा खुद को सही न ठहराएं
शादी टूटने का ये भी एक कारण हो सकता है कि आप अपनी हर बात को सही साबित करने का प्रयास करें और दूसरे की भावनाओं की कद्र न करें। इस तरह से आप एकांगी सोच की तरफ झुक जाती हैं और पति आपकी इन आदतों से आहत होता हो इसीलिए इस पर गौर करें। जीवन साथी के बातों को भी सुनें और समझें।

पुरानी बातों को कुरेदना छोड़े
अगर आप बार-बार यह ताना देंगी कि पति के रिश्तेदार सही नहीं है या बात-बात पर ससुराल वालों को नीचा दिखाएंगी तो शर्तिया बहस शुरू होगी। इस वजह से दोनों एक-दूसरे को भला-बुरा कहना शुरू करेंगे, पुरानी बातें, गलतियों, आरोप-प्रत्यारोप से स्थिति और बिगड़ेगी। ऐसा बार-बार होता है तो आप ही समझने की कोशिश करें और इस तरह की बहस में न उलझें। जीवनसाथी की गलतियों को नजरअंदाज करें, हो सकता है कि उनमें सुधार आ रहा हो। दांपत्य जीवन में प्रेम का रस घुलेगा तो जीवनसाथी निश्चित ही अपनी गलतियों को दूर करने की भी कोशिश करेगा।

स्वयं बात करने की पहल करें
किसी बात को लेकर हुई नाराजगी के कारण आपका चुप्पी साध लेना, दांपत्य जीवन के लिए कतई सही नहीं है। कई दिनों तक बात न करना भी शादीशुदा रिश्तों के टूटने का बड़ा कारण बन सकता है। अगर आप एक-दूसरे से बोलेंगे नहीं, तो मन में एक-दूसरे के प्रति काल्पनिक नकारात्मक विचार पनपना शुरू होगा, इस कारण से आप मन की बात जीवनसाथी से शेयर नहीं कर पाएंगी। ऐसे में अच्छा यह है कि आप समझदारी दिखाएं और बात करने की पहल करें। यह कदम आपकी मैरिज लाइफ को बचा लेगा और रिश्तों को मजबूत बनाएगा।