गुरुवार, 6 अगस्त 2015

सोलर एनर्जी पर्यावरण का रक्षक

जानकारी



बच्चों, तुमने खबरों और टीवी चैनल में बढ़ते हुए प्रदूषण के बारे में समचार पढ़ा या देखा होगा। प्रदूषण के कारण कई शहरों में पानी, हवा, जमीन प्रदूषित हो गई है। सोचो, कुदरत ने हमें कई ऐसी चीजें दी हैं, जिसको अपनाकर हम पर्यावरण को बचा सकते हैं। उन्हीं में से है, सौर्य ऊर्जा। इसका इस्तेमाल कर हम धरती को प्रदूषित होने से बचा सकते हैं। आओ जानें, ये सौर्य ऊर्जा क्या है और इसके इस्तेमाल से हम अपनी धरती को कैसे बचा सकते हैं।
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तुम जानते हो कि पेट्रोलियम पदार्थ, कोयला के जलने से हमारी धरती लगातार गर्म हो रही है। जिसके कारण से ग्लोबल वर्मिंग का खतरा बढ़ रहा है। इस गर्मी में भी शहरों का तापमान इतना अधिक हो गया था कि बिना कूलर के जीना मुश्किल हो गया था। क्या तुम जानते हो कि अचानक तेज गर्मी, बारिश का कम होना, बाढ़ आना, ये सब लक्षण बताता है कि हमारी धरती बीमार हो रही है। लगातार धरती पर पेटàोल, कोयला आदि के जलने से अत्यधिक गर्मी और धुंआ पैदा हो रहा है। इस धुंए और गर्मी के कारण वायु जहरीली और गर्म हो रही है, इस कारण से धरती का पर्यावरण भी बिगड़ रहा है। अब तुम सोच रहे हो कि हम अपनी धरती को कैसे बचाए, तो इसके लिए हमें कुदरत के साथ जीना होगा। हम कुदरत में मिलने वाली चीजों का इस्तेमाल करें तो इस तरह हम अपनी धरती को बचा सकते हैं। हम जितना हो सके, सौर्य ऊर्जा का इस्तेमाल करें। सूरज से मिलने वाली गरमी धरती पर खूब आती है, इसकी गरमी का इस्तेमाल बिजली बनाने, खाना पकाने, मशीनों को चलाने में करना सही विकल्प है।

कैसे काम करता है सौर पैनल
कांच के बड़े-बड़े पैनल होते हैं, जिसे फोटोवोल्टिक पैनल कहते हैं। इसे छत या खुली जगह पर इस तरह रखा जाता है की सूरज की रोशनी इस पर पड़े। कांच के पैनल पर पड़ने वाली रोशनी विधुत ऊर्जा में परिवर्तित होकर, इससे जुड़ी बैटरी को चार्ज करती है। ठीक उसी तरह जैसे इनवर्टर की बैटरी बिजली से चार्ज होती है।

सौर ऊर्जा की कहानी
लियोनार्डो दा विन्सी, जो एक मशहूर चित्रकार थ्ो। इन्होंने सबसे पहले सूरज की रोशनी का उपयोग करने वाले चित्र बनाए। थे। 1515 ई. में लियोनार्डो ने चर्चित मिरर का स्केच बनाया था, जिससे सौर ऊर्जा का इस्तेमाल पानी गर्म करने के लिए किया जा सके। इसके बाद इनके चित्रों को देखकर कई वैज्ञानिकों को विचार आया कि सूरज की रोशनी का उपयोग ऊर्जा के लिए किया जा सकता है और वैज्ञानिक तकनीक खोजने में लग गए। सूरज की रोशनी को सौर ऊर्जा में बदलने वाली तकनीक 1767 में स्विस वैज्ञानिक हॉरेस डे सॉसे ने खोज निकाली। इस सोलर एनर्जी कलेक्टर को हॉट बॉक्स कहा गया। इस खोज से उन्हें खूब ख्याति मिली। बाद में ब्रिटिश एस्ट्रोनॉमर जॉन हर्श्ोल ने दक्षिण अफ्रीका में अपने अभियान के दौरान सॉसे की खोज पर आधारित एक हॉट बॉक्स का इस्तेमाल खाना बनाने के लिए किया। ब्रिटिश अधिकारी विलियम एडम्स ने 187० में भाप इंजन को पावर देने के लिए सूर्य से एनर्जी रूपांतरित करने के लिए मिरर का उपयोग किया। एडम्स की इस खोज का आज भी इस्तेमाल किया जाता है।

पहली बार सोलर एनर्जी से बनी बिजली
चाल्र्स फ्रिट्ज को पहली बार सोलर एनर्जी से बिजली बनाने के लिए जाना जाता है। 1883 में पहली बार फ्रिट्ज ने ही सोलर सेल ईजाद किया था। इसके बाद फ्रेंच इंजीनियर चाल्र्स टेलियर ने अपने घर में सोलर पावर्ड हॉट वाटर सिस्टम लगाकर सौर ऊर्जा की उपयोगिता को साबित कर दिखाया।

क्या है सीएसपी
संकेंद्रित सोलर पावर (एधnदद्गnप्न्थप्द्गद Sधद्यथन् घ्धबद्गन्) एक ऐसी तकनीक है, जो बिजली पैदा करती है। इसमें सैकड़ों मिरर की मदद से सूर्य की रोशनी को 4०० से 1००० डिग्री सेल्सियस के तापमान तक संकेंद्रित किया जाता है। इसे ऐसे समझों की मिरर को इस तरह से बनाया जाता है कि सूरज की रोशनी रिफलेक्ट होकर एक जगह इकट्ठी होती है और जिससे तापमान आधिक हो जाता है। अगर सीएसपी लगाए और बिजली का उत्पादन करें तो हम धरती को गर्म होने और प्रदूषित होने से बचा सकते हैं।

बॉक्स
सौर ऊर्जा के फायदे
सोलर पैनल लगाकर हम 47 दिनों में मरुस्थलों से इतनी सोलर एनर्जी ले सकते हैं, जोकि धरती के अंदर अब तक छिप्ो पेटàोलियम और कोयला के उर्जा भंडार से भी अधिक है।
4दुनिया के महान वैज्ञानिकों ने सदियों पहले सोलर एनर्जी की उपयोगिता को पहचान लिया था। यह बात अलग है कि हम आज भी उन तकनीकों का इस्तेमाल करते हैं, जो पर्यावरण को नुकसान पहुंचाती हैं। जबकि सौर ऊर्जा बिजली की जरूरतों को पूरा करने का सस्ता और सुलभ साधन बन सकती है।
4पहला कमर्शियल सीएसपी प्लांट स्पेन में सन् 2००7 में शुरू हुआ था। सोलर पावर प्लांट्स की संख्या लगातार बढ़ रही है। जलवायु परिवर्तन के इस दौर में सूर्य की गर्मी दुनिया को रोशन करने का एक बड़ा जरिया बन सकती है।
4 जापान में दुनिया का सबसे बड़ा तैरता हुआ सोलर प्लांट है। यह झील सोलर प्लांट से ढका हुआ है, इससे बनने वाली बिजली पर्यावरण के अनुकूल है।
 

क्लर्क बनने के लिए करें आईबीपीएस की तैयारी




बैंक में क्लर्क बनने का सपना साकार हो सकता है। 2० राष्ट्रीय बैंकों में क्लर्क के लिए 4० हजार पोस्ट खाली हैं, इन पदों को भरने के लिए इंस्टीट्यूट ऑफ बैंकिग पर्सनल सेलेक्शन (आईबीपीएस) संयुक्त परीक्षा कराने जा रही है। इस परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन कर आप भी क्लर्क बन सकते हैं। फार्म भरने से लेकर परीक्षा की तैयारी करने की जानकारी यहां दी जा रही है।



इंस्टीट्यूट ऑफ बैंकिग पर्सनल सेलेक्शन (आईबीपीएस) की एडक् एद्यद्गन्दद्मप-ठ्ठ परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन आपको बैंक में क्लर्क बनने का अवसर दे रहा है। स्टडी करते समय सही रणनीति और समय का सही प्रबंधन से आपको को सफलता जरूरी मिलेगी।

परीक्षा का पैटर्न
परीक्षा ऑनलाइन दो चरणों में होगी। प्रारंभिक परीक्षा 1०० अंकों की होगी। मुख्य परीक्षा 2०० अंकों की होगी। रीजनिग, अंग्रेजी, सामान्य ज्ञान, कंप्यूटर और क्वांटिटिव एप्टीट्यूड से आब्जेक्टिव प्रश्न होंगे। गलत उत्तर के लिए एक चौथाई अंक काटे जाएंगे। प्रारंभिक परीक्षा क्वॉलिफाई करने वाले कैंडिडेट को मुख्य परीक्षा के लिए बुलाया जाएगा। मुख्य परीक्षा के बाद इंटरव्यू 1०० अंकों का होगा। फाइनल स्कोर कार्ड में मुख्य परीक्षा और इंटरव्यू के अंक 8०:2० के अनुपात में जुड़ेंगे। यही स्कोर कार्ड 2० राष्ट्रीयकृत बैंक में 4० हजार क्लर्क के पोस्ट के चयन का आधार बनेगा।

परीक्षा की तैयारी
अंग्रेजी भाषा :
अंग्रेजी भाषा इस परीक्षा में महत्वपूर्ण सेक्शन है। अंग्रेजी भाषा पर अच्छी पकड़ होनी जरूरी है। अच्छा अंक लाने के लिए वर्ड पावर और ग्रैमेटिकल कॉन्सेप्ट को डेवलप करने का प्रयास करना चाहिए। इस सेक्शन में अक्सर पैसेज आधारित प्रश्न, सेंटेंस एरर, रैपिड फिलर्स, क्लोज टेस्ट आदि शामिल होते हैं।
संख्यात्मक योग्यता :
इस सेक्शन के लिए फंडामेंटल कैलकुलेशन एवं एप्रोक्सिमेशन का कॉन्सेप्ट होना चाहिए। इस योग्यता के कारण आप सीध्ो सही उत्तर को टिक करते हैं। क्यूश्चन को स्पीड से हल करने की प्रेक्टिस जरूरी है।
तार्किक अभिवृत्ति :
तर्क क्षमता वाले सेक्शन की तैयारी के लिए मानसिक सजगता और तार्किक कौशल जरूरी है।
पिछले साल के पूछे गए क्यूश्चन को साल्व करें, इससे पैटर्न समझ में आएगा।
सामान्य जागरूकता :
यह स्कोरिग सेक्शन है, इसके लिए बैंकिग उद्योग और अर्थव्यवस्था पर नजर रखनी चाहिए। बैंकिग-जागरूकता के साथ सामान्य जागरूकता अपेक्षित है। भारत की बैंकिग-प्रणाली, मुद्रा, बजट-निर्माण, वित्तीय योजना, राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय संगठन आदि टॉपिक शामिल हैं।

कंप्यूटर नॉलेज
कंप्यूटर नॉलेज सेक्शन भी स्कोरर सेक्शन है। इसके लिए कंप्यूटर का आधारभूत ज्ञान, नेटवîकग, इंटरनेट, कंप्यूटर लैंग्वेज, माइक्रोसाफ्ट ऑफिस और कम्यूनिकेशन के साथ इस क्षेत्र में होने वाले नए अनुसंधानों की जानकारी होना जरूरी है।



महत्वपूर्ण तिथियां
ऑनलाइन आवेदन: 11 अगस्त से 1 सितंबर तक
प्रारंभिक परीक्षा ट्रेनिंग कॉल लेटर: 3 नवंबर से 17 नवंबर तक
प्रारंभिक परीक्षा की ट्रेनिंग: 16 नवंबर से 21 नवंबर तक
प्रारंभिक परीक्षा कॉल लेटर: 18 नवंबर से
प्रारंभिक परीक्षा की तिथियां: 5, 6, 12 और 13 दिसंबर
योग्यता: 45 प्रतिशत अंकों के साथ ग्रेजुएशन की डिग्री और कंप्यूटर में कोई भी मान्यता प्राप्त डिग्री या डिप्लोमा होना चाहिए।
आयु: 1 अगस्त 2०15 को 2० साल से 28 साल के मध्य होनी चाहिए। अधिक जानकारी के लिए वेबसाइट www.ibps.in देखें.

गार्डन को बनाए सुंदर

गार्डन तभी सुंदर और मनमोहक हो सकता है, जब आप उसकी अच्छे से देखभाल करें। गार्डन
को बेहतर और आकर्षक बनाने के लिए कुछ टिप्स-

छोटा तालाब बनाएं

गार्डन में पानी का एक छोटा-सा तालाब हो तो गार्डन का नजारा बेहद खूबसूरत दिख्ोगा। इसके लिए छोटे आकार का चौकोर गड्ढा खोदें, उसे सिमेंट से पक्का करा लें या बड़े टब को मिट्टी में गाड़ दें और उसके किनारों को पत्थरों से छुपा दें। इस तरीके से एक छोटा-सा तालाब बन जाएगा। तालाब के लिए ऐसी जगह का चुनाव करें, जहां चार-पांच घंटे अच्छी धूप आती हो। इसमें कमल और जलीय पौध्ो उगा सकते हैं।

लॉन के लिए घास का चुनाव
गार्डन चाहें कितना भी छोटा हो, घास का मैदान उसकी शान है। इसलिए बगीचे में घास से सजा हुआ लॉन जरूर बनाएं ताकी यहां सुबह-शाम बैठने का आनंद ले सकें। घास कौन-सी लगानी चाहिए, इस बात को सोच समझकर तय करें। जहां घास लगाना है तो इन बातों का ध्यान रख्ों कि जगह धूप वाली है या छांव वाली है, जिससे सही किस्म की घास बाजार से खरीदी जा सके।

बढ़ाएं गमलों का सौंदर्य

कतार में रखे गमले और उसमें लगे फूल-पौधे गार्डन की शोभा बढ़ाते हैं। गमले को साफ रखने के लिए सफेद सिरका और पानी बराबर मात्रा में मिलाएं, इसे गमले के ऊपर चारों तरफ छिड़कें और प्लास्टिक के ब्रश से साफ कर दें। अगर मिट्टी के गमले हों तो उन्हें गेरू से रंगकर नया रूप दें।

निराई और गुड़ाई करें

खुरपी की सहायता से गमलों में 7 से 1० दिन के अंतराल पर गुड़ाई करके खर-पतवार निकाल देना चाहिए। पौधों की मिट्टी में हर 3०-6० दिनों में खाद अच्छी तरह से मिलाना चाहिए और पौधे की सूखी पत्तियों को साफ करना चाहिए।

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