मंगलवार, 21 जून 2016

मानव जाति के ​लिए वरदान है योग

शाश्वत भरद्वाज

आज दूसरा योग दिवस है। योग का मतलब मिलाना या जोड़ना होता है आपने इसी शब्द को आज दुनिया के सामने योग मिसाल बनाया है। स्वास्थ से बड़ा कोई धन नहीं है। इसीलिए हेल्थ इज वेल्थ की कहावत अंग्रेजी में प्रसिद्ध है। आधुनिक जीवन में स्वास्थ को बनाए रखना बहुत बड़ी चुनौती है। जबकि विडंबना

यह है कि हम प्रकृति से स्वयं को दूर रख रहे हैं। पेड़पौधे से युक्त वातावरण की कमी शहरी क्षेत्रों में है। वायु प्रदूषण के कारण आज स्वस्थ जीवन जी पाना चुनौती भरा है। फैक्ट्रियों निकलता धुआं या प्रदूषण फैलाते वाहन हमसे स्वस्थ जीवन को छीन रहे हैं। डायबटीज, ब्ल्ड प्रेशर, आखों की स़मस्या जैसी बीमारी हमें आजा के विदूषित जीवनशैली के कारण मिल रहा है। आज हम गिफ्ट के रूप में बीमारी आसानी से ले रहे है, क्या आपने सोचा है इसके लिए हम ही जिम्मेदार हैं। प्रकृति से हम दूर हो रहे हैं, हमारी दिनचर्या सूरज के रोशनी के मुताबिक नहीं है। देर तक सोना देर रात तक जागने के कारण हम बीमरियों को दावत दे रहे है। तनाव यानी माइग्रेशन जैसे समस्या पूरे विश्व में आम बात है। वहीं योग हमें जीवन को सही ढंग से जीने के लिए तैयार करता है, जहां बीमरियों से लड़ने की शक्ति शारीर के अंदर पैदा करती है। योग हमारे जीवनशैली को सहज और एनर्जी से भरपूर बनाता है। खानपान और जीवन को सही अर्थों में जीने की सीख देता हैयोग। नि:संदेह भारतीय संस्कृति  ने एक ऐसी जीवनशैली दी है जिसमें योग का बड़ा महत्व है। हमारे देश में समृद्धशाली जीवनशैली की परंपरा रही है। जहां पर ऋषियों ने वेदों के जरिये ज्ञान दिया है। इसी तरह आयुर्वेद, वैमानिकी जैसे सिद्धांत आदि का ज्ञान भारतीय परंपरा में हजारों वर्षों पहले हो गया था। पतंजलि को योग, जो स्वास्थ का आधार है। ये मानव जाति के लिए है, उनके स्वस्थ जीवन के लिए है। योग जाति धर्म में भेद नहीं करता है। योग की रचना मानव कल्याण के लिए ही है। 
अमेरिका में आधुनिक पश्चिमी विचारधारा में उपयोगितावाद के कारण केवल सुखीजीवन की कल्पना का आधार भौतिक वस्तुओं के उपभोग के लिए की गई है। यही कारण है कि वहां पर अनियमित जीवनशैली के कारण अमेरिकी लोग स्वास्थ समस्या के शिकार हैं। मोटापा, डायबटीज जैसी बीमारी के कारण अमेरिका परेशान है। जबकि ऐसे समय में योग का महत्व दुनिया के लागों को समझ में रहा है। 18वी शताब्दी के बाद से ही पश्चिमी देशों में भारतीय संस्कृति से लगाव रखने वाले विद्वानों यहां की प्रचीन जीवन शैली जिसमें योग, चिकित्सा पद्धति पर लगातार रिसर्च किया है। यहां की वेदों और अन्य प्राचीन पुस्तकों का अध्यययन किया। पश्चिमी देशा भारत की समृद्धशाली ज्ञान को अपनाने के लिए तैयार है। इस कड़ी में योग है जो पूरी दुनिया में मानव का कल्याण कर रही है। एक स्वस्थ जीवनशैली के लिए योग मानव जाति के लिए अनुपम देन है जो इस ग्रह यानी धरती से पैदा हुई है, क्या पता कल यहां किसी एलियन यानी परग्राही के लिए भी काम आये तो यह कल्पना मात्र नहीं है, योग धरती का विशिष्ट ज्ञान है। इसे हमें जाति,धर्म से परे होकर अपनाना होगा तकि मानव सभ्यता को स्वस्थ जीवन मिल सके। तन मन की दवा हैयोग। 

बुधवार, 15 जून 2016

परमाणु बम बनाने की होड़



दूसरे विश्व युद्ध में अमेरिका ने जापान पर परमाणु बम गिरया था। यह बम इतना शक्तिशाली था कि हीरोशिमा और नागाशाकी शहर पूरी त​रह से बर्बाद हो गया। ऐसा मंजर था जिसे देखने के बाद इसके भयावह को कोई बयान नहीं कर सकता है। मानव जाति पर पहली बार इस तरह का हथियार प्रयोग किया जो मानव का अस्तित्व ही मिटाने की क्षमाता रखता है। जापान की तबाही और उधर इससे पहले इटली और इसके बाद जर्मनी की हार के बाद मित्र देशों की जीत हुई। जर्मनी, जापान व इटली बुरी तरह से बर्बाद हो चुके थे। 1939 से 1945 तक चलने वाला दूसरा विश्व युद्ध ने मानव जाति को सोचने पर मजबूर किया कि समूल धरती का विनाश परमाणु बम है। लेकिन दुख तो तब होता है जब इस युद्ध के बाद पूरी दुनिया देशों में परमाणु हथियार संपन्नता होने की होड़ लग गई। अमेरिका ने परमाणु बम की ताकत पहले पा लिया था वही संयुक्त राष्ट्र शांति प्रयासों के बाद भी सोवियंत संघ भी कुछ वर्षों के बाद वह परमाणु से साधन संपन्न देशा बन गया है फिर तो ये होड़ लगी गई। ​भारत की उदारवादी व गुटनिपेक्ष की नीति ने दुनिया को नई दिशा दी। वहीं चाइना, ब्रिटेन आदि देशों ने बहुत पहले परमाणु शक्ति सम्पन्न देश बन गया।

मंगलवार, 14 जून 2016

उत्तर प्रदेश में किसकी बनेगी सरकार!



अभिषेक कांत पाण्डेय

इस बार उत्तर प्रदेश में किसकी सरकार बनेगी इसकी कवायद तेज होने लगी है। इधर इलाहाबाद में भाजपा कार्यकारणी की बैठक के बाद परिवर्तन रैली से पीएम मोदी ने अपने भाषण से जनता को संदेश दिया की उत्तर प्रदेश में भाजपा आएगी तो वह विकास करेगी। 50 साल का विकास वह पांच साल में करके दिखाएगी। उत्तर प्रदेश में कानून व्यव​स्था की खराब हालत के लिए सपा सरकार पर निशाना साधा। वहीं इलाहाबाद की रैली में भले भाजपा की तरफ से मुख्यमंत्री के लिए कोई चेहरा नहीं चुना गया लेकिन राजनाथ सिहं को सशक्त बताया, उत्तर प्रदेश में उनके राज को अब तक का बेहतर कार्यकाल बताकर नरेंद्र मोदी ने फिलहाल राजनाथ सिंह को उत्तर प्रदेश आगे रखा है। रैली में भीड़ को देखकर उत्साहित होने वाले ये अंदाजा लगा सकते हैं कि इस बार भाजपा उत्तर प्रदेश की सत्ता की प्रबल दावेदार है। लेकिन सही रणनीति बनाने में भाजपा अगर सफल रही तो आने वाले चुनाव से पहले वह मुद्दों को अपने पक्ष में कर सकती है, जिससे उसे चुनाव में फायदा मिलेगा।
वहीं इस रैली से ये बात जाहिर हो गई की भाजपा विकास के मुद्दे पर ये चुनाव लड़ेगी। जिस तरह से सपा सरकार अपनी उपलब्धियों के विज्ञापन दिखा रही है, इससे इस बात में दो राय नहीं है कि सपा भी जानती है कि विकास के कार्यों के बारे में उत्तर प्रदेश की जनता को बताने का वक्त आ गया है, इसलिए सपा सीधा मोदी सरकार पर निशान बना रही है और अच्छे दिन की बात याद दिला रही है। वही देखा जाए भले अच्छा दिन क्या है इसकी परिभाषा राजनीतिक रूप नहीं गढ़ी गई लेकिन उत्तर प्रदेश में कितना विकास हुआ है, इसका पैमाना जनता ढूंढ़ रही है। वह अन्य राज्यों से उत्तर प्रदेश की राजनीति से तुलना कर रही है। असम की ताजा जीत और सत्ता में लंबे अर्से के बाद भाजपा की वापसी, उत्तर प्रदेश में सत्ता पाने की के लिए यही जोश भाजपाई कार्यकर्ताओं में भरा हुआ है।
लेकिन सवाल उठता है कि सपा व बसपा के पारंपरिक वोट बैंक खिसक कर जब बीजेपी के खाते में आएगी तब ही भाजपा का निर्वाशन समाप्त होगा और सीटों का 265 प्लस का जादूई आकड़ा छू पाएगा। बडी बात की क्या जनता परिवर्तन चाहती है? क्या मथुरा कांड, कैमरन में पलायन और लॉ एंड आर्डर पर उठने वाले सवाल जनता का मूड बदल रही है। इस गुत्थी को इस तरह समझ सकते हैं, भले चुनाव 2017 में होंगे लेकिन जिस तरह से भाजपा की रणनीति के तहत पिछड़े व दलित चेहरों को पार्टी में जगह दी जा रही है, वहीं राम मंदिर जैसे ध्रुवीकरण करने वाले मुद्दों से मुह मोड़ रही है और अदालत में मामला होने की बात कह कर एक तरह से राम मंदिर मुद्दे के मामले को बैक फुट पर रखकर वह दोहरा फायदा लेने की रणनीति पर है। इसीलिए कांग्रेस भाजपा को विकास के मुद्दे से भटकाने की कोशिश भी करेगी लेकिन वही भाजपा की ​केंद्र में दो साल के विकास बात के रखकर 2017 के उत्तर प्रदेश की सत्ता के रासते से 2019 के लोकसभा चुनाव में दोबारा सरकार बनाने की जुगत मे लग गई है। भले ये दूसरे पार्टियों को सपना लगे लेकिन ऐसा होने की संभावना भी है, दरअ​सल लोकसभा 2014 के चुनाव में जिस तरह से भाजपा को यूपी से सीटें मिली, वहीं केंद्र में भाजपा के दो साल के कार्यकाल को कई सर्वे ने अच्छा बताया है तो जाहिर है उत्तर प्रदेश की जनता का मन बदल रहा है, जिसका फायदा बीजेपी को आने वाले समय मे मिल सकता है।
यूपी के चुनाव में विकास की बयार का आइना दिखाने की होड़ होगी, सपा और भाजपा में। जातिवाद की राजनीति से विकास की राजनीति के मुद्दे पर क्या उत्तर प्रदेश की जनता वोट देगी। इस सवाल का जवाब भले सीधे तौर पर न मिले लेकिन जिस तरह से गैर भाजपा सरकार का कार्यकाल उत्तर प्रदेश में रहा है, क्या उनके शासनकाल में सभी का विकास हुूआ है, ​बिजली,पानी, शिक्षा व बेरोजगारी जैसी समस्या अब भी बनी हुई है, वहीं जिस तरह से सपा और बसपा के पांच—पांच साल के अंतराल में सत्ता में आती हैं और एक दूसरे पर आरोप कर वोट बैंक बांट लेते हैं, वहीं विकास के दावे खोखले साबित हो रहे हैं। इसी के साथ जाति विशेष की राजनीति में चंद लोगों को फायदा होता है वहीं एक बड़ा तबका शिक्षा, बेरोजगारी, गरीबी, बिजली वितरण, पानी की उचित व्यवस्था, खराब सड़कें ​आदि की समस्या ग्रसित है तो वह तीसरे पार्टी की तरफ मुखातिब होगा। ऐसे में कांग्रेस की स्थिति जिस तरह से दो राहे में हैं तो सही विकल्प के रूप में जनता इस बार भाजपा को मौका दे सकती है। हलांकि अभी चुनाव में एक साल का समय है लेकिन ये कहना जल्दबाजी नहीं होगा की इस चुनाव में यूपी बदलाव चाहता है, वहीं विकल्प के रूप में इस बार जनता बसपा की जगह किसी तीसरे दल के हाथ में उत्तर प्रदेश की कमान सौंप सकती है, जाहिर है वह भाजपा हो सकती है!

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