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मानव जाति के ​लिए वरदान है योग

शाश्वत भरद्वाज

आज दूसरा योग दिवस है। योग का मतलब मिलाना या जोड़ना होता है आपने इसी शब्द को आज दुनिया के सामने योग मिसाल बनाया है। स्वास्थ से बड़ा कोई धन नहीं है। इसीलिए हेल्थ इज वेल्थ की कहावत अंग्रेजी में प्रसिद्ध है। आधुनिक जीवन में स्वास्थ को बनाए रखना बहुत बड़ी चुनौती है। जबकि विडंबना

यह है कि हम प्रकृति से स्वयं को दूर रख रहे हैं। पेड़पौधे से युक्त वातावरण की कमी शहरी क्षेत्रों में है। वायु प्रदूषण के कारण आज स्वस्थ जीवन जी पाना चुनौती भरा है। फैक्ट्रियों निकलता धुआं या प्रदूषण फैलाते वाहन हमसे स्वस्थ जीवन को छीन रहे हैं। डायबटीज, ब्ल्ड प्रेशर, आखों की स़मस्या जैसी बीमारी हमें आजा के विदूषित जीवनशैली के कारण मिल रहा है। आज हम गिफ्ट के रूप में बीमारी आसानी से ले रहे है, क्या आपने सोचा है इसके लिए हम ही जिम्मेदार हैं। प्रकृति से हम दूर हो रहे हैं, हमारी दिनचर्या सूरज के रोशनी के मुताबिक नहीं है। देर तक सोना देर रात तक जागने के कारण हम बीमरियों को दावत दे रहे है। तनाव यानी माइग्रेशन जैसे समस्या पूरे विश्व में आम बात है। वहीं योग हमें जीवन को सही ढंग से जीने के लिए तैयार करता है, जहां बीमरियों से लड़ने की शक्ति शारीर के अंदर पैदा करती है। योग हमारे जीवनशैली को सहज और एनर्जी से भरपूर बनाता है। खानपान और जीवन को सही अर्थों में जीने की सीख देता हैयोग। नि:संदेह भारतीय संस्कृति  ने एक ऐसी जीवनशैली दी है जिसमें योग का बड़ा महत्व है। हमारे देश में समृद्धशाली जीवनशैली की परंपरा रही है। जहां पर ऋषियों ने वेदों के जरिये ज्ञान दिया है। इसी तरह आयुर्वेद, वैमानिकी जैसे सिद्धांत आदि का ज्ञान भारतीय परंपरा में हजारों वर्षों पहले हो गया था। पतंजलि को योग, जो स्वास्थ का आधार है। ये मानव जाति के लिए है, उनके स्वस्थ जीवन के लिए है। योग जाति धर्म में भेद नहीं करता है। योग की रचना मानव कल्याण के लिए ही है। 
अमेरिका में आधुनिक पश्चिमी विचारधारा में उपयोगितावाद के कारण केवल सुखीजीवन की कल्पना का आधार भौतिक वस्तुओं के उपभोग के लिए की गई है। यही कारण है कि वहां पर अनियमित जीवनशैली के कारण अमेरिकी लोग स्वास्थ समस्या के शिकार हैं। मोटापा, डायबटीज जैसी बीमारी के कारण अमेरिका परेशान है। जबकि ऐसे समय में योग का महत्व दुनिया के लागों को समझ में रहा है। 18वी शताब्दी के बाद से ही पश्चिमी देशों में भारतीय संस्कृति से लगाव रखने वाले विद्वानों यहां की प्रचीन जीवन शैली जिसमें योग, चिकित्सा पद्धति पर लगातार रिसर्च किया है। यहां की वेदों और अन्य प्राचीन पुस्तकों का अध्यययन किया। पश्चिमी देशा भारत की समृद्धशाली ज्ञान को अपनाने के लिए तैयार है। इस कड़ी में योग है जो पूरी दुनिया में मानव का कल्याण कर रही है। एक स्वस्थ जीवनशैली के लिए योग मानव जाति के लिए अनुपम देन है जो इस ग्रह यानी धरती से पैदा हुई है, क्या पता कल यहां किसी एलियन यानी परग्राही के लिए भी काम आये तो यह कल्पना मात्र नहीं है, योग धरती का विशिष्ट ज्ञान है। इसे हमें जाति,धर्म से परे होकर अपनाना होगा तकि मानव सभ्यता को स्वस्थ जीवन मिल सके। तन मन की दवा हैयोग। 

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ओले क्यों गिरते हैं?

जानकारी

रिंकी पाण्डेय
ओले क्यों गिरते हैं?

बच्चो, कई बार बारिश के दौरान अचानक पानी की बूंदों के साथ बर्फ के छोटे-छोटे गोले भी गिरते हैं। इन्हें हम ओले कहते हैं। ये ओले आसमान में कैसे बनते हैं और ओले क्यों गिरते हैं? तो आओ ओले के बारे में पूरी बात जानें।

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बच्चों, तुम जानते हो कि बर्फ पानी के जमने से बनता है। अब तुम्हारे मन में ये प्रश्न उठ रहा होगा कि आसमान में ये पानी कैसे बर्फ बन जाता है और फिर गोल-गोले बर्फ के टुकड़ों के रूप में ये धरती पर क्यों गिरते हैं? तुमने जैसा कि पढ़ा होगा कि पानी को जमने के लिए शून्य डिग्री सेल्सियत तापमान होना चाहिए, तुमने फ्रीजर में देखा होगा कि पानी के छोटे-छोटे बूंदें बर्फ के गोले के रूप में जम जाता है, ऐसा ही प्रकृति में होता है। हम जैसे-जैसे समुद्र के किनारे से ऊपर यानी ऊंचाई की ओर बढ़ते हैं, तब जगह के साथ ही तापमान धीरे-धीरे कम होता जाता है। तुम इसे ऐसे समझ सकते हो, लोग गर्मी के मौसम में पहाड़ों पर जाना पसंद करते हैं, क्यों? इसलिए कि पहाड़ पर तापमान कम होता है, यानी मैदान…

जानो पक्षियों के बारे में

जानकारी


बच्चो, इस धरती में कई तरह के पक्षी हैं, तुम्हें जानकर आश्चर्य होगा कि हमिंग बर्ड नाम की पक्षी किसी भी दिशा में उड़ती है, तो कुछ पक्षी ऐसे हैं, जो अपने कमजोर पंख की वजह से उड़ नहीं पाते हैं। चलते हैं पक्षियों के ऐसे अजब-गजब संसार में और जानते हैं कि ये पक्षी कौन हैं?
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हवा में उड़ते हुए तुमने सैकड़ों पक्षियों को देखा होगा। लेकिन कई ऐसे पक्षी भी हैं, जो उड़ नहीं सकते, तो कुछ किसी भी दिशा में उड़ सकते हैं। तुम्हें जानकर हैरानी होगी कि रेटाइट्स बर्ड परिवार से जुड़े विशालकाय पक्षी कभी उड़ा भी करते थे। पर समय गुजरने के साथ-साथ ये जमीन पर रहने लगे। इस कारण से इनका शरीर मोटा होता गया। उड़ान भरने वाले पंख बेकार होते गए और वो छोटे कमजोर पंखनुमा बालों में बदल गए। इनके बारे में तुम जानते हो, शतुर्गमुर्ग, जो ऑस्ट्रेलिया में पाया जाता है। यह उड़ नहीं सकता है लेकिन जमीन पर ये 7० किलोमीटर घंटे की गति से दौड़ सकता है। ऐसे ही कई रेटाइट्स बर्ड परिवार से जुड़े पक्षी की लंबी लिस्ट हैं, जिनमें पेंग्विन, इम्यू, कीवी, बतख आदि आते हैं।

पेंग्विन उड़त…

आओ जानें डायनासोर की दुनिया

अभिषेक कांत पाण्डेय
स्टीवन स्पीलबर्ग की जुरासिक पार्क फ्रेंचाइजी की नई फिल्म 'जुरासिक वर्ल्ड’ इन दिनों खूब धूम मचा रही है। इससे पहले भी एक फिल्म 'जुरासिक पार्क’ आई थी, जिसने पूरी दुनिया में डायनासोर नाम के जीव से परिचय कराया था। तुमने भी वह फिल्म देखी होगी, आखिर कहां चले गए ये डायनासोर, कैसे हुआ इनका अंत... इनके बारे में तुम अवश्य जानना चाहोगे।


कई तरह के थे डायनासोर

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डायनासोर की और बातें
.इनके अब तक 5०० वंशों और 1००० से अधिक प्रजातियों की पहचान हुई है।
.कुछ डायनासोर शाकाहारी, तो कुछ मांसाहारी होते थे जबकि कुछ डायनासारे दो पैरों वाले, तो कुछ चार पैरों वाले थे।
.डायनासोर बड़े होते थे, पर कुछ प्रजातियों का आकार मानव के बराबर, तो उससे भी छोटे होते…