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जनता के मन में मोदी



अभिषेक कांत पाण्डेय भड्डरी
उत्तर प्रदेश के विधान सभा चुनाव में भाजपा की शानदार जीत कई मायनों में अलग है। इस बार जनता ने जाति व धर्म से उपर उठकर वोटिंग किया। अब तक जिस तरह से जाति व धर्म के ध्रुवीकरण की गणित के जरिये किसी पार्टी के वोटर गिने जाते रहे हैं, वहीं उत्तर प्रदेश की जनता ने राजनैतिक पार्टियों को लोकतंत्र का सही मतलब बतला दिया। किसी खास जाति वर्ग के चंद लोगों को लाभ देकर, उस जाति वर्ग व धर्म को वोटबैंक समझने की सोच में जीने वाले नेताओं की सोच पर भी यूपी की जनता ने करारा जवाब दिया। इस चुनाव में जनता ने बता दिया कि जाति व धर्म में बांटकर राजनीति करनेवालों के लिए भारत की राजनीति में कोई जगह नहीं है। बीजेपी की तरफ हर वर्ग जाति व धर्म के लोगों का झुकाव इसलिए बढ़ा कि वे अब तक की जातिगत पॉलिटिक्स से उब चु​के थे। भारत की जनता नागरिक के तौर पर अब अपना अधिकार मांग रही है, उसे रोजगार, सड़क, बिजली, पानी, शिक्षा व सम्मान चाहिए। वे खुद को जाति में बंटना पसंद नहीं कर रही है। किसी राजनीति जाति के वोट बैंक की तरह खुद देखना पसंद नहीं करना चाहती है। सच में यह बदलाव बहुत बड़ी है लेकिन अफसोस है कि भारत की अधिकांश राजनीति पार्टी जनता के मन की बात नहीं समझ पाये। उत्तर प्रदेश के विधान सभा के चुनाव में यहां की जनता ने बात दिया कि चंद बुद्धिजीवी व पत्रकार जो राजनैतिक दल के पिछलग्गू बनकर जाति व धर्म की राजनीति को बढ़ावा देते हैं, उन्हें भी करारा जवाब दिेया है। जनता ने इस चुनाव में बता दिया कि जो काम करेगा, हम उसे चुनेंगे और जो काम नहीं करेगा उसे हम बाहर कर देंगे।
नोटबंदी जैसी साहसिक कदम को जनता ने हाथोहाथ लिया और इस साहस को उसने खुद के भले का फैसला पाया। यह समझ आसानी से उनके समझ आया कि नोटबंदी जैसे कदम उठाने के लिए बड़े राजनैतिक साहस की जरूरत होती है। इसका श्रेय प्रधान नरेंद्र मोदी को मिला जिससे उनके नेतृत्व् को जनता सही माना। वहीं नोटबंदी को लेकर विपक्ष का हमलावर होना जनता को रास नहीं आया। वहीं अखिलेश यादव ने ​को युवा होने के नाते उत्तर प्रदेश की जनता ने उन्हें मौका दिया लेकिन जातिवाद व तुष्टिकरण के चश्मे से वे वहीं पारम्परिक राजनीति ही की। केवल वर्ग विशेष की राजनीति के चलते, उनके काम को जनता ने नकार दिया। 2014 के लोकसभा चुनाव के परिणाम से ही पता चलता है कि अखिलेश यादव के काम को यूपी के जनता ने नकार दिया था। इसके बावजूद भी समाजवादी पार्टी रणनीति में कोई बदलाव नहीं हुआ। जाति और धर्म के चश्में में समाजवादी पार्टी व बहुजन समाजवादी पार्टी ने उत्तर प्रदेश का चुनाव ही लड़ा जिस कारण से उनकी सबसे बड़ी हार हुई। लोकसभा 2014 के चुनाव से भी इन्होंने सबक नहीं लिया। जाहिर है जनता अब खुद को जातिगत व धर्म के पैमाने पर खुद को नहीं बांटना चाहती है। उसे ऐसा नेतृत्व चाहिए जो सबकी विकास की बात करें। भाजपा के नरेंद्र मोदी के व्यक्तित्व को भारत की जनता के साथ पूरी ​दुनिया के लोगों ने भी पसंद किया है।

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ओले क्यों गिरते हैं?

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रिंकी पाण्डेय
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बच्चो, कई बार बारिश के दौरान अचानक पानी की बूंदों के साथ बर्फ के छोटे-छोटे गोले भी गिरते हैं। इन्हें हम ओले कहते हैं। ये ओले आसमान में कैसे बनते हैं और ओले क्यों गिरते हैं? तो आओ ओले के बारे में पूरी बात जानें।

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बच्चों, तुम जानते हो कि बर्फ पानी के जमने से बनता है। अब तुम्हारे मन में ये प्रश्न उठ रहा होगा कि आसमान में ये पानी कैसे बर्फ बन जाता है और फिर गोल-गोले बर्फ के टुकड़ों के रूप में ये धरती पर क्यों गिरते हैं? तुमने जैसा कि पढ़ा होगा कि पानी को जमने के लिए शून्य डिग्री सेल्सियत तापमान होना चाहिए, तुमने फ्रीजर में देखा होगा कि पानी के छोटे-छोटे बूंदें बर्फ के गोले के रूप में जम जाता है, ऐसा ही प्रकृति में होता है। हम जैसे-जैसे समुद्र के किनारे से ऊपर यानी ऊंचाई की ओर बढ़ते हैं, तब जगह के साथ ही तापमान धीरे-धीरे कम होता जाता है। तुम इसे ऐसे समझ सकते हो, लोग गर्मी के मौसम में पहाड़ों पर जाना पसंद करते हैं, क्यों? इसलिए कि पहाड़ पर तापमान कम होता है, यानी मैदान…

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बच्चो, इस धरती में कई तरह के पक्षी हैं, तुम्हें जानकर आश्चर्य होगा कि हमिंग बर्ड नाम की पक्षी किसी भी दिशा में उड़ती है, तो कुछ पक्षी ऐसे हैं, जो अपने कमजोर पंख की वजह से उड़ नहीं पाते हैं। चलते हैं पक्षियों के ऐसे अजब-गजब संसार में और जानते हैं कि ये पक्षी कौन हैं?
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हवा में उड़ते हुए तुमने सैकड़ों पक्षियों को देखा होगा। लेकिन कई ऐसे पक्षी भी हैं, जो उड़ नहीं सकते, तो कुछ किसी भी दिशा में उड़ सकते हैं। तुम्हें जानकर हैरानी होगी कि रेटाइट्स बर्ड परिवार से जुड़े विशालकाय पक्षी कभी उड़ा भी करते थे। पर समय गुजरने के साथ-साथ ये जमीन पर रहने लगे। इस कारण से इनका शरीर मोटा होता गया। उड़ान भरने वाले पंख बेकार होते गए और वो छोटे कमजोर पंखनुमा बालों में बदल गए। इनके बारे में तुम जानते हो, शतुर्गमुर्ग, जो ऑस्ट्रेलिया में पाया जाता है। यह उड़ नहीं सकता है लेकिन जमीन पर ये 7० किलोमीटर घंटे की गति से दौड़ सकता है। ऐसे ही कई रेटाइट्स बर्ड परिवार से जुड़े पक्षी की लंबी लिस्ट हैं, जिनमें पेंग्विन, इम्यू, कीवी, बतख आदि आते हैं।

पेंग्विन उड़त…

आओ जानें डायनासोर की दुनिया

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स्टीवन स्पीलबर्ग की जुरासिक पार्क फ्रेंचाइजी की नई फिल्म 'जुरासिक वर्ल्ड’ इन दिनों खूब धूम मचा रही है। इससे पहले भी एक फिल्म 'जुरासिक पार्क’ आई थी, जिसने पूरी दुनिया में डायनासोर नाम के जीव से परिचय कराया था। तुमने भी वह फिल्म देखी होगी, आखिर कहां चले गए ये डायनासोर, कैसे हुआ इनका अंत... इनके बारे में तुम अवश्य जानना चाहोगे।


कई तरह के थे डायनासोर

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डायनासोर की और बातें
.इनके अब तक 5०० वंशों और 1००० से अधिक प्रजातियों की पहचान हुई है।
.कुछ डायनासोर शाकाहारी, तो कुछ मांसाहारी होते थे जबकि कुछ डायनासारे दो पैरों वाले, तो कुछ चार पैरों वाले थे।
.डायनासोर बड़े होते थे, पर कुछ प्रजातियों का आकार मानव के बराबर, तो उससे भी छोटे होते…