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क्या तुम जानते ह़ो?

क्या तुम जानते ह़ो?


आसमान नीला रंग का क्यों दिखाई देता है?
जब आप आसमान की ओर देखते हैं तो आसमान का रंग नीला दिखाई देता है, शायद इसीलिए लोग इस खास रंग को आसमानी रंग कहते हैं। आसमान नीला पृथ्वी के वातावरण के कारण दिखाई देता है। सूर्य का प्रकाश सात रंगों से मिलकर बना होता है, ये रंग हैं- बैंगनी, जामुनी, नीला, हरा, पीला, नारंगी और लाल। जब सूर्य का प्रकाश पृथ्वी के वातावरण में प्रवेश करता है तो वातावरण के कणों से टकराकर प्रत्येक दिशा में बिखर जाता है। इससे आसमान प्रदीप्त हो जाता है। प्रकाश के रंगों में नीला रंग के छितरने की क्षमता सबसे अधिक होती है। इसलिए आसमान में आने वाले रंगों में नीले रंग की मात्रा अधिक होती है, जिसके कारण आसमान नीला दिखाई देता है।

अंध महासागर का जल हरा क्यों दिखाई देता है?

सूर्य के प्रकाश में सात रंग होते हैं। कोई वस्तु किस रंग की दिखाई देगी, यह इस बात पर निर्भर करता है कि वह सूर्य के प्रकाश में मिले सात रंगों में से किस रंग को परावर्तित करती है।

यह उस वस्तु या पदार्थ की संरचना पर निर्भर करता है कि वह किस रंग को परावर्तित करेगी। सामान्यत: समुद्र के पानी की विशेषता होती है कि वह सिर्फ नीले रंग को ही परावर्तित करता है, इसलिए सभी समुद्रों का जल नीला दिखाई देता है। तो अंधमहासागर का जल आखिर हरा क्यों दिखाई देता है? इसका कारण यह है कि अंध महासागर की तलहटी में हरे पौधों की अधिकता है। इन पौधों के नष्ट होने से एक पीले रंग का पदार्थ इस सागर के पानी में घुलता रहता है। जब सूर्य का प्रकाश इस समुद्र पर पड़ता है तो पानी में उपस्थित नीले और पीले रंग दोनों ही परावर्तित हो जाते हैं। परावर्तित नीले और पीले रंगों का मिश्रण हमारी आंखों को हरा दिखाई देता है और यही कारण है कि अंध महासागर का रंग हरा दिखाई पड़ता है। पीले रंग के पदार्थ दूसरे सागरों के जल में मौजूद नहीं होने से इसके जल से केवल नीला रंग ही छितराता है। इसलिए अक्सर समुद्र का जल हमें नीला दिखाई देता है।
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चींटी एक लाइन में कैसे चलती हैं?


आपने चींटियों को अपने बिल से निकलते हुए या जाते हुए जरूर देखा होगा, गौर यह भी गौर किया होगा कि आखिर चींटियां एक लाइन में कैसे चल लेती हैं? असल में चींटियों में कुछ ऐसी ग्रंथियां होती हैं, जिनसे फैरोमोंस नामक रसायन निकलता है। इन्हीं के जरिए वो एक दूसरे के संपर्क में रहती हैं। चींटियों के दो स्पर्शश्रंगिकाएं या ऐंटिना होते हैं, जिनसे वो सूंघने का काम करती हैं। रानी चींटी भोजन की तलाश में निकलती है तो फैरोमोंस छोड़ती जाती है। दूसरी चीटियां अपने ऐंटिना से उसे सूंघती हुई, रानी चींटी के पीछे-पीछे चली जाती हैं। जब रानी चींटी एक खास फैरोमोन बनाना बंद कर देती है तो चीटियां, नई चींटी को रानी चुन लेती हैं। इस रसायन फैरोमोंस का उपयोग चींटियों और कई तरीके से करती हैं, जैसे अगर कोई चींटी कुचल जाए तो चेतावनी के लिए फैरोमोंस का रिसाव करती है, जिससे सभी चींटियां हमले के लिए तैयार हो जाती हैं। फैरोमोंस से यह भी पता चलता है कि कौन-सी चींटी किस कार्यदल का हिस्सा है।

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ओले क्यों गिरते हैं?

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रिंकी पाण्डेय
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बच्चो, कई बार बारिश के दौरान अचानक पानी की बूंदों के साथ बर्फ के छोटे-छोटे गोले भी गिरते हैं। इन्हें हम ओले कहते हैं। ये ओले आसमान में कैसे बनते हैं और ओले क्यों गिरते हैं? तो आओ ओले के बारे में पूरी बात जानें।

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बच्चों, तुम जानते हो कि बर्फ पानी के जमने से बनता है। अब तुम्हारे मन में ये प्रश्न उठ रहा होगा कि आसमान में ये पानी कैसे बर्फ बन जाता है और फिर गोल-गोले बर्फ के टुकड़ों के रूप में ये धरती पर क्यों गिरते हैं? तुमने जैसा कि पढ़ा होगा कि पानी को जमने के लिए शून्य डिग्री सेल्सियत तापमान होना चाहिए, तुमने फ्रीजर में देखा होगा कि पानी के छोटे-छोटे बूंदें बर्फ के गोले के रूप में जम जाता है, ऐसा ही प्रकृति में होता है। हम जैसे-जैसे समुद्र के किनारे से ऊपर यानी ऊंचाई की ओर बढ़ते हैं, तब जगह के साथ ही तापमान धीरे-धीरे कम होता जाता है। तुम इसे ऐसे समझ सकते हो, लोग गर्मी के मौसम में पहाड़ों पर जाना पसंद करते हैं, क्यों? इसलिए कि पहाड़ पर तापमान कम होता है, यानी मैदान…

जानो पक्षियों के बारे में

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बच्चो, इस धरती में कई तरह के पक्षी हैं, तुम्हें जानकर आश्चर्य होगा कि हमिंग बर्ड नाम की पक्षी किसी भी दिशा में उड़ती है, तो कुछ पक्षी ऐसे हैं, जो अपने कमजोर पंख की वजह से उड़ नहीं पाते हैं। चलते हैं पक्षियों के ऐसे अजब-गजब संसार में और जानते हैं कि ये पक्षी कौन हैं?
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हवा में उड़ते हुए तुमने सैकड़ों पक्षियों को देखा होगा। लेकिन कई ऐसे पक्षी भी हैं, जो उड़ नहीं सकते, तो कुछ किसी भी दिशा में उड़ सकते हैं। तुम्हें जानकर हैरानी होगी कि रेटाइट्स बर्ड परिवार से जुड़े विशालकाय पक्षी कभी उड़ा भी करते थे। पर समय गुजरने के साथ-साथ ये जमीन पर रहने लगे। इस कारण से इनका शरीर मोटा होता गया। उड़ान भरने वाले पंख बेकार होते गए और वो छोटे कमजोर पंखनुमा बालों में बदल गए। इनके बारे में तुम जानते हो, शतुर्गमुर्ग, जो ऑस्ट्रेलिया में पाया जाता है। यह उड़ नहीं सकता है लेकिन जमीन पर ये 7० किलोमीटर घंटे की गति से दौड़ सकता है। ऐसे ही कई रेटाइट्स बर्ड परिवार से जुड़े पक्षी की लंबी लिस्ट हैं, जिनमें पेंग्विन, इम्यू, कीवी, बतख आदि आते हैं।

पेंग्विन उड़त…

आओ जानें डायनासोर की दुनिया

अभिषेक कांत पाण्डेय
स्टीवन स्पीलबर्ग की जुरासिक पार्क फ्रेंचाइजी की नई फिल्म 'जुरासिक वर्ल्ड’ इन दिनों खूब धूम मचा रही है। इससे पहले भी एक फिल्म 'जुरासिक पार्क’ आई थी, जिसने पूरी दुनिया में डायनासोर नाम के जीव से परिचय कराया था। तुमने भी वह फिल्म देखी होगी, आखिर कहां चले गए ये डायनासोर, कैसे हुआ इनका अंत... इनके बारे में तुम अवश्य जानना चाहोगे।


कई तरह के थे डायनासोर

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डायनासोर की और बातें
.इनके अब तक 5०० वंशों और 1००० से अधिक प्रजातियों की पहचान हुई है।
.कुछ डायनासोर शाकाहारी, तो कुछ मांसाहारी होते थे जबकि कुछ डायनासारे दो पैरों वाले, तो कुछ चार पैरों वाले थे।
.डायनासोर बड़े होते थे, पर कुछ प्रजातियों का आकार मानव के बराबर, तो उससे भी छोटे होते…