New Gyan सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

संदेश

चर्चित पोस्ट

मे उनमे इनमे मै मे bindu (अनुस्वार) या chandrabindu (अनुनासिक) क्यों नहीं लगता

  Me, mai, inme, uname, Bindu ya chandrabindu kyon nahin lagta hai | मे उनमे इनमे मै मे बिन्दु (अनुस्वार))  या चन्द्रबिन्दु (अनुनासिक) क्यों नहीं लगता है। मे, मै मे चन्द्रबिंदु या बिंदु लगेगा? Hindi mein chandrabindu kab lagana chahie kab nahin? Hindi spelling mistake किसी भी शब्द के पंचमाक्षर पर कोई भी बिन्दी अथवा चन्द्रबिन्दी (Hindi Chandra bindi kya hai) नहीं लगती है। इसका कारण क्या है आइए विस्तार से हम आपको बताएं। क्योंकि ये दोनो अनुनासिक और अनुस्वार उनमे निहित हैं। हिंदी भाषा वैज्ञानिक भाषा है। इसके विज्ञान शास्त्र को देखा जाए तो जो पंचमाक्षर होता है उसमें किसी भी तरह का चंद्रबिंदु और बिंदु नहीं लगता है क्योंकि उसमें पहले से ही उसकी ध्वनि होती है। पांचवा अक्षर वाले शब्द पर चंद्रबिंदु और बिंदु नहीं लगाया जाता है। जैसे उनमे, इनमे, मै, मे कुछ शब्द है जिनमें चंद्र बिंदु बिंदु के रूप में लगाया जाता है लेकिन म पंचमाक्षर है।  Hindi main panchma Akshar kise kahate Hain? प फ ब भ म 'म' पंचमाक्षर pancman Akshar है यानी पांचवा अक्षर है। यहां अनुनासिक और अनुस्वार नहीं लगेगा। क्यो...

टेट उतीर्ण और भर्ती प्रक्रिया में शामिल बेरोजगारों की सरकार अवेहलना कर रही

 खबरें आ रही हैं कि अगले सत्र में शिक्षा मित्रों की नियुक्‍ति होगी लेकिन ये तो पैराटीचर तो पहले से ही नियक्‍त हैं वो भी इण्‍टर पास  और सरकार इन्‍हें बीएड करा कर स्‍थाई नियुक्‍ति देगी। इधर आरटीई काबिल टीचर की बात करता है। तो हमारा संविधान सबकों एक समान  नजरिये से देखता है कि योग्‍यता के अनुसार नौकरी दी जाए। लेकिन  बीएड टेट उतीर्ण और भर्ती प्रक्रिया में शामिल बेरोजगारों की सरकार अवेहलना कर रही है। ६ लाख बीएड धारक और ३ लाख टीईटी पास  और लाखों लोग टीचर बनने के लिए बीएड करने की तैयारी अभी से कर रहे हैं इन्‍होंने वर्तमान सरकार को वोट दिया कि जल्‍द टीचर की भर्ती लोकतांत्रिक ढंग से शुरू होगी लेकिन वर्तमान सरकार चुनाव से पहले की परिस्‍थ्‍ितियों को भूल गया है। अब केवल एक ही दिशा में शिक्षा मित्रों की बात कर रहा है। इधर कंपटीशन से बीएड करने वाले और टीईटी मेरिट में से नियुक्‍ति का बात न करके इनको केवल टरकाया जा रहा है। संवैधानिक तरीके से हो रही भर्ती की प्रक्रिया को बदलने में ज्‍यादा रूचि दिखा रही है। बेरोजगारी भत्‍ते...

उत्तर प्रदेश बाल मजदूरी में नंबर वन तब भी नहीं हो रही टीईटी मेरिट से चयन

उत्तर प्रदेश बाल मजदूरी में नंबर वन तब भी नहीं हो रही टीईटी मेरिट से चयन ग्रामीण क्षेत्रों में प्राथमिक विद्‍यालयों में पढाई नहीं होती है। प्राथमिक विद्‍यालय में मिड डे भोजन में पोषक तत्‍व गायबहैं। सरकारी प्राइमरी स्‍कूल में पढने में उच्‍च प्राथमिक विद्यालय के बच्‍चों को जोड घटाना नहीं आता है। हमारे सरकारी स्‍कूलोंकी स्‍थ्‍िति तब है जब आज छटा वेतन आयोग के अनुसार अच्‍छा वेतन सरकारी शिक्षक पा रहे हैं। अब सवाल उठता है कि अखिर यह स्‍थिति क्‍यों बनी हुई है। जाहिर है पिछले दशकों से शिक्षा के स्‍तर पर शिक्षकों के चयन में कोई अपेछ्‍ति सुधार नहीं हुआ है। आज जब मुफत शिक्षा अधिकार कानून की बात आती है तो भी इस कानून का पालन करने में राज्‍य सरकार सुस्‍त दिख रही है।उत्‍तर प्रदेश में यह स्‍थ्‍िाति और दयनीय है। और बात जब टीईटी यनी टीचर एजिबिलिटी टेस्‍ट के अनिवार्य करने के बाद आज भीमजाक बना हुआ है। जहां एक आज छात्र व शिक्षक अनुपात प्रथमिक स्‍तर पर एक शिक्षक पर ३० छात्र और उच्‍च प्राथमिक में ३५ छत्र होने चाहिए लेकिन आज जहां राज्‍य सरकारें टीचरों की भर्ती प्रक्रिया में उलझें और केवल नकल माफियों को फा...
जिस तरह से टेट मेरिट से चयन के प्रति सरकार की हीलाहवाली चर रही है तो  उससे एक बात साफ है कि कोर्ट के हस्‍तक्षेप के बाद सरकार को जल्‍द ही चयन  हो गा। दीगर बात यह कि शिक्षा जैसे गंभीर मुददे में सरकार एक सही निर्णय नहीं  ले पा रही है जबकि आज हम गांवों में प्राथमिक विद्‍यालय की हालत देख सकते है। सर्वशिक्षा अभिया अशातित सफलता नहीं हासिल कर पा रहीं है। शायद इसका कारण हमारे पास सर्वविदित है कि पढाई का स्‍तर आज गिरा है। जिस  तेजी से हमारी दुनिया बदल रही है उस तेजी से प्राथमिक विद्‍यालय में गुणवत्‍तायुक्‍त शिक्षा की बात  नहीं हो रही है। अभी टीचरों की भरती के स्‍पष्‍ट मानक नहीं है। ऐकमेडिक के द्‍वारा चयन  का मानक आज अपनी प्रासंगीकता पर स्‍वयं ही प्रश्‍न पूछ रहा है। नकल एक बडी समस्‍या है और इसी नकल के वातावरण से अगर हम एकेडमिक मेरिट से टीचर चुन रहे हैं तो निश्‍चित  ही हम बच्‍चों के भविष्‍य के साथ खिलवाड कर रहे है। यहा एक बात है कि कंपटीशन या टीईटी मेरिट से चयन सर्वोत्‍तम है लेकिन सरकार यह विकासवादी निर्णय लेने में समय लगा रही है। 

बेसिक शिक्षा मंत्री के बयान ने

बेसिक शिक्षा मंत्री के बयान ने टीईटी उतीर्ण बेरोगारों के साथ धोखा किया जा रहा है। जिस तरह अखबार में टीईटी भर्ती के मामले में भ्रमित करने वाली खबरें आ रही है। अभी भी मीडिया टीईटी मेरिट के औचित्‍य पर कोई सार्थक लेख नहीं प्रकाशित कर रही है बल्‍कि इन सब मामलों में अपने पाठकों को भटका रही है। टीईटी मेरिट के संबंध में सरकार के साथ ही मीडिया भी अपने विचार खुल कर नहीं रख रही है शायद कारण साफ है कि इस  परीक्षा में धांधली के आरोप के चलते इस प्रक्रिया पर कुछ लिखने में असहज है लेकिन इतना बड़ा मुददा जोकि हमारी शिक्षा के बुनियादी ढांचे को फिर से खड़ा करने के लिए है। जहां आज नकल सबसे बड़ा नासूड है ऐसे में अगर अब टीईटी मेरिट या कंपटीशन चयन में अनिवार्य नहीं हुआ तो शिक्षा का स्‍तर नहीं सुधर सकता है।

अच्‍छे शिक्षक ही देश के भाग्‍य निर्माता बनाते हैं।

आज हम इस मुकाम पर है जहां संघर्ष हमारे जीवन को बदल देगा। जाहीर है कि प्राइमरी शिक्षा के इतिहास में अनिवार्य निश्‍शुल्‍क शिक्षा के बाद टीईटी और इसके बाद इसकी मेरिट से चयन हम एक नए बदलाव की और बढ़ रहे हैं। निश्‍चित अब योग्‍य और कर्मठ शिक्षकों की चुनाव करना आसान होगा। और हर प्राथमिक स्‍कूल में गूणवत्‍तायुक्‍त शिक्षा मिलेगी। प्राथमिक शिक्षा का नजरिया बदलेगा लोग कहेंगे कि ये है टीईटी मेरिट वाले टीचर काश सरकार ने पहले ही इनकों नियुक्‍त किया हाता तो हम शिक्षा के क्षेत्र में बहुत आगे होते है। हमारे गांव की कायाकल्‍प हो जाती। लेकिन देर आये दुरूस्‍त वाली कहावत सही है। टीईटी मेरिट से चयनित टीचर शिक्षा के स्‍तर में अमूलचूल बदलाव लाने के लिए तैयार है और इस सपथ के साथ कि हमें न्‍याय मिला है तो हम बच्चों को भी गुणवत्‍तायुक्‍त शिक्षा देंगे। देश के विकास में भागीदारी बने और हमारे देश को निर्माण करेंगे। अच्‍छे शिक्षक ही देश के भाग्‍य निर्माता बनाते हैं।

हरियाणा में टीचर बनने का सपना हकीकत बनते नजर नहीं आ रही है

Hariyana me teacher banne ka spna hkikut bnate najar nahee a rhaee hai srkar tender par teacher rakhkar RTE ke uddeshya ko bhool rahee hai. Iska verodha karna jaroori hai. हरियाणा में टीचर बनने का सपना हकीकत बनते नजर नहीं आ रही है । यहां सरकार अब अनुंबध के आधार पर प्राथमिक टीचर की भर्ती करने का मन बना लिया है। वहीं हरियाणा राजकीय विद्यालय संघ ने इस व्यवस्था का पुरजोर विरोध किया है। शिक्षा की गुणवत्ता की बात की जाती है तो वहीं राज्य सरकार ऐसे निर्णय ले रहीं है जिससे निश्शुल्क अनिवार्य शिक्षा कानून के तहत अच्छी शिक्षा देने के उदृदेश्य से इतर कार्य कर रहीं है। अनुबंध आधार पर शिक्षकों की नियुक्‍ति कर सरकार शिक्षा की गुणवत्ता के साथ खिलावाड़ कर रही है। जब शिक्षक की नौकरी ही अस्थाई और कम वेतन पर रखे जाएंगे तो कैसे उम्मीद की जा सकती है कि प्रतिभावान शिक्षक मिलेंगे। जबकि अन्य सूचना प्रंबधन आदि में उच्च प्रतिभा पलायन करती है कारण साफ वहां पर अच्छा वेतन और सेवा शर्तें हैं। अगर राज्य सरकारे शिक्षा अधिकार कानून के महत्व नहीं समझेंगी और ऐसे निर्णय लेगी तो निश्चित यह कानून अपने लक्ष्य को प्राप्त नह...

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट