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मे उनमे इनमे मै मे bindu (अनुस्वार) या chandrabindu (अनुनासिक) क्यों नहीं लगता

  Me, mai, inme, uname, Bindu ya chandrabindu kyon nahin lagta hai | मे उनमे इनमे मै मे बिन्दु (अनुस्वार))  या चन्द्रबिन्दु (अनुनासिक) क्यों नहीं लगता है। मे, मै मे चन्द्रबिंदु या बिंदु लगेगा? Hindi mein chandrabindu kab lagana chahie kab nahin? Hindi spelling mistake किसी भी शब्द के पंचमाक्षर पर कोई भी बिन्दी अथवा चन्द्रबिन्दी (Hindi Chandra bindi kya hai) नहीं लगती है। इसका कारण क्या है आइए विस्तार से हम आपको बताएं। क्योंकि ये दोनो अनुनासिक और अनुस्वार उनमे निहित हैं। हिंदी भाषा वैज्ञानिक भाषा है। इसके विज्ञान शास्त्र को देखा जाए तो जो पंचमाक्षर होता है उसमें किसी भी तरह का चंद्रबिंदु और बिंदु नहीं लगता है क्योंकि उसमें पहले से ही उसकी ध्वनि होती है। पांचवा अक्षर वाले शब्द पर चंद्रबिंदु और बिंदु नहीं लगाया जाता है। जैसे उनमे, इनमे, मै, मे कुछ शब्द है जिनमें चंद्र बिंदु बिंदु के रूप में लगाया जाता है लेकिन म पंचमाक्षर है।  Hindi main panchma Akshar kise kahate Hain? प फ ब भ म 'म' पंचमाक्षर pancman Akshar है यानी पांचवा अक्षर है। यहां अनुनासिक और अनुस्वार नहीं लगेगा। क्यो...

लाडली स्कीम दे रहा है ₹5000 इस योजना का फायदा उठाने के लिए पढ़े Ladli Scheme:

लाडली स्कीम  दे रहा है ₹5000 इस योजना का फायदा उठाने के लिए पढ़े Ladli Scheme:  बेटियों को प्रोत्साहित करने वाली  यह जो योजना है। Haryana Ladli Yojana 2020: महिला और बाल विकास मंत्रालय ( Ministry Of Women And Child Development ) के सहयोग से हरियाणा लाडली योजना  ( Haryana Ladli Yojana )  को शुरू किया गया है। Ladli Scheme: का  उद्देश प्रदेश में बेटियों के जन्म (Scheme For Daughter ) को  प्रोत्साहित  करने के लिए दिया जा रहा है। ताकि कोई भी अपनी बेटियों को बोझ ना समझे और उनके माता-पिता उनके अच्छे भविष्य के लिए इन पैसों का उपयोग कर सकें।  इस स्कीम के माध्यम से बालिकाओं को  शिक्षित और उनके जीवन को सशक्त बनाया जा सके। Haryana Ladli Yojana 2020: महिला और बाल विकास मंत्रालय ( Ministry Of Women And Child Development ) के सहयोग से हरियाणा लाडली योजना (Haryana Ladli Yojana ) की शुरूआत की गई थी।  इस योजना  का उद्देश प्रदेश में बेटियों के जन्म (Scheme For Daughter ) को प्रोत्साहित करना है। जहां आज के समय में ब...

कॉमेडी एक्टर कैसे बने, Comedy action

कॉमेडी एक्टर कैसे बने Comedy Actor बनने के लिए Tips कॉमेडियन यानि हँसाने वाली एक्टिंग करने वाले एक्टर को जब आप सिनेमा के पर्दे पर देखते हैं तो आप हंसने की मुद्रा में आ जाते हैं। किसी को हंसाना बहुत मुश्किल काम है। कुछ एक्टर इतने मझे हुए होते हैं कि उनकी हाव भाव में भी दर्शक को हंसी आ जाती है। सर चार्ल्स स्पेन्सर चैप्लिन इस कारण से भी बहुत फेमस हुए थे। हास्य-एक्टर यानि कॉमेडियन बनना आसान नहीं है। हिन्दी फिल्मों के जानेमाने हास्य अभिनेताओं  जैसे जानीवॉकर, जगदीप, असरानी इनकी बेजोड़ एक्टिंग पूरे फिल्मों में बेहद प्रभावशाली रहती थी। ऐसे कई मजेदार एक्टिंग और सिनेमा जगत के कई पहलूओं पर जानकारी देने के लिए हम लेकर आए हैं, जाने-माने एक्टर और लेखक ’आशीष कांत पांडेय’ जी को, जो आपको एक्टिंग व सिनेमा जगत से संबंधित खास जानकारी से रूबरू करवाएंगे, आज से लेख की एक सीरीज शुरू करने जा रहे हैं, इस कड़ी में पहला लेख हास्य एक्टिंग पर आधारित है, यानि एक अच्छा कॉमेडियन कैसे बने- Comedy Actor (resonators)  जीवन में खुश रहना है तो हँसना भी जरूरी है। लेकिन  टेंशन भरे इस दुनिया में हम...

Art integration cbse board project work class 9 cbse

हिन्दी प्रोजेक्टकार्य कक्षा-9 कला-एकीकरण अधिन्यास-कार्य (प्रोजेक्ट-कार्य) Art integration सत्र- 2020-21 माह कला -एकीकरण प्रोजक्टकार्य  सहभागिता टिप्पणी जुलाई दृश्य-कला प्रोजेक्टकार्य अरूणाचल प्रदेश एवं  मेघालय राज्य की हस्तशिल्प कला के बारे में चार्टपेपर पर लिखना है। प्रत्येक महत्वपूर्ण सूचनाएँ, चित्रों, त्रिआयामी-मॉडल के माध्यम से प्रस्तुत करना है।  विभिन्न वस्तुओं को दिखाने के लिए त्रिआयामी-मॉडल भी बनाना जरूरी है। व्यक्तिगत प्रोजेक्टकार्य विभिन्न रंगों एवं आरेखों के माध्यम से चार्टपेपर पर आकर्षित तरीके से प्रस्तुत करना है। चार्टपेपर एवं त्रिआयामी मॉडल के माध्यम से प्रस्तुतीकरण।  अगस्त संदेश लेखन-प्रोजेक्ट कार्य विद्यालय में आयोजित होने वाले कार्यक्रम की सूचना देने हेतु सूचना-लेखन कार्य या विभिन्न पर्व के अवसरों पर शुभकामना लेखन प्राजेक्ट-कार्य। सामूहिक कार्य कक्षा में पाँच-पाँच विद्यार्थियों का समूह संदेश-लेखन की योजना से लेकर प्रदर्शन कार्य की जिम्मेदारी का निर्वहन करेंगे।  कुछ समूह को इस माह में आयोजित होने वाले विद्यालय-कार्यक्रम की सूचनाओं को चार्टपे...

'असुर आदिवासी' पुस्तक असुर आदिवासी जनजाति जनजीवन और सामाजिक पहलुओं पर पड़ताल करती पुस्तक

https://amzn.to/2Y4Pc7N  हिन्दी साहित्य जगत के प्रख्यात लेखक व कवि  (एडवोकेट) श्रीरंग पांडेय जी की नयी  पुस्तक 'असुर आदिवासी' अमेजॉन पर ऑनलाइन उपलब्ध है। यह पुस्तक एक नया शोध का ऐसा दस्तावेज है, जो अब तक हाशिए पर रहे समाज की सच्ची दास्तां सुनाती है।  'असुर आदिवासी' किताब के जरिए उन असुर आदिवासी जनजातियों के बारे में इनके सही इतिहास को प्रस्तुत करने वाली इस तरह की पुस्तक की जरूरत हमेशा पाठकों और विद्वानजनों को रही है। इस पुस्तक में खो गए इन जातियों के ऐसे  सामाजिक परिदृश्य को सही ढंग से बताया गया है, जिसके इतिहास को लगभग भुला दिया गया है।   पाठकों और विद्वानजनों के  ज्ञान में यह पुस्तक अवश्य अभिवृद्धि करेगी।   'किताब एक सच्चा दोस्त होता है।" अमेजॉन पर पुस्तक ' असुर आदिवासी'   उपलब्ध है, अमेजॉन से ऑनलाइन पुस्तक मँगाने के लिए क्लिक करें असुर आदिवासी   पुस्तक को फ्लिपकार्ट से मँगाने के लिए यहाँ पर क्लिक करें  असुर आदिवासी पुस्तक के लेखक श्रीरंग पांडेय जी के फेसबुक वॉल पर जाने ...

Why read hindi sahitya

हिन्दी साहित्य क्यों जरूरी है * रचनात्मक तरीके से सीखने के लिए,  विश्लेषणात्मक, तर्कशक्ति और तुलनात्मक अध्ययन कर कहानी, कविताओं से भारतीय संस्कृति, इतिहास समाज पर पड़ने वाले साहित्य के प्रभाव के बारे में जानने के लिए साहित्य जरूरी है। 👉 समीक्षा, तर्कशक्ति व विश्लेषण की समझ विकसित करने के लिए साहित्य जरूरी है। 👉साहित्य कला व विज्ञान को समझने की शक्तिप्रदान करता है, उसके बारे में कहने की अभिव्यक्ति देता है। Hindi sahitya 👉साहित्य का इतिहास से कैसा नाता रहा? समाज से कैसा नाता रहा? साहित्य समाज का आईना होता है तो साहित्य पढ़ना जरूरी है। 👉भारत की आजादी में साहित्य का बहुत बड़ा योगदान रहा है। 👉 जनमानस को समझ में आने के कारण हिन्दी ने विशाल जनसंख्या को आजादी के समय जाग्रत किया है, अन्य भारतीय भाषाओं के साहित्य ने भी यह कार्य किया है। लेकिन राष्ट्रभाषा के रूप में इसकी पहचान इसलिए है कि  यह बड़े भूभाग में बोली और समझी जाती है। हिंदी भाषा का योगदान समाज में नई चेतना लाने के लिए रहा है, इसका सबसे बड़ा उदाहरण भक्ति आंदोलन था, जब धर्म जाति-भेदभाव, अंधविश्वास स्त्रियों पर अत्याचार के ख...

ऑनलाइन online डिजिटल वीडियो पाठ बनाने के टिप्स- अध्यापक के लिए वीडियो पाठ बनाते, समय निम्नलिखित बातों को ध्यान में रखना चाहिए

ऑनलाइन डिजिटल वीडियो पाठ बनाने के टिप्स- अध्यापक के लिए वीडियो पाठ बनाते, समय निम्नलिखित बातों को ध्यान में रखना चाहिए। प्रभावशाली video वीडियो पाठ lesson बनाने के लिए निम्नलिखित योजनाएँ-  #चयनित टॉपिक  पर अब तक यूट्यूब वीडियो (video) या और कहीं वीडियो है, उसे देखना समझना, उससे बेहतर बनाने की कोशिश करना। #ऑडियो (Audio), विजुअल (Visual) और ग्राफिक्स का सही उपयोग। #कॉपीराइट (copyright) को ध्यान में रखना। #रिसर्च (research) पर आधारित स्क्रिप्ट लेखन। #प्रभावशाली लेसन प्लान (lesson plane) बनाना। #इस्तेमाल होने वाले चित्र (photo) और ग्राफिक्स की सही एडिटिंग। #ऑडियो और वीडियो अच्छी क्वालिटी की होनी चाहिए नहीं तो डिस्टरबेंस होगा। #वीडियो एडिटिंग इसके अंतर्गत अनावश्यक बातें जो प्रस्तुति को खराब करती हैं, उन्हें काटकर अलग करना। #वीडियो और ऑडियो को सपोर्ट करने वाले चित्र और उदाहरण, रेखाचित्र आदि सही जगह पर वीडियो या ऑडियो पर सही तरीके से लगाना यानी एडिटिंग का एक हिस्सा है। #टीचर के ऑडियो और वीडियो को सपोर्ट करने वाले चित्र, उदाहरण, इनका  संयोजन 50: 50 के अनुप...

सीबीएसई बोर्ड ने लाक डाउन के इस समय को सही सदुपयोग करने के लिए छात्रों को पत्र के द्वारा संदेश दिया है

सीबीएसई बोर्ड ने लाक डाउन के इस समय को सही सदुपयोग करने के लिए छात्रों को पत्र के द्वारा संदेश दिया है प्रखर चेतना। प्रयागराज केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) के सचिव अनुराग त्रिपाठी ने छात्रों को लाक डाउन के इस समय का सही उपयोग करने के लिए छात्रों को पत्र लिखा है। इस पत्र में सचिव ने छात्रों को संदेश दिया है कि लाक डाउन का यह समय छात्रों के लिए शिक्षा का एक सुनहरा अवसर है। उन्होंने कहा कि शिक्षा के जरिए ही छात्र चाहे तो रोग, दुख, गरीबी, पाप, बेकारी, अभाव, अज्ञान, दुर्गुण, कुसंस्कार इत्यादि की दासता से मुक्ति पा सकता है। उन्होंने कहा कि शिक्षा आज 100 प्रतिशत अंक तो दिला देती है लेकिन छात्रों में कौशलता का विकास नहीं कर पा रही है। चरित्र निर्माण का प्रयास कर रही है लेकिन उसका बीजारोपण नहीं कर पा रही है। उन्होंने रचनात्मक विकास पर काफी बल दिया और कहा कि रचनात्मकता यानी क्रिएटिविटी बहुत जरूरी है, इसके अलावा उन्होंने कहा कि स्कूली शिक्षा और व्यावहारिक जीवन के बीच की खाई बढ़ती जा रही है। उन्होंने कहा कि लॉक डाउन का यह समय छात्रों के लिए शिक्षा के बेहतर संसाधन इस्तेमाल करने का ...

jane Keyon banaya gaya Lucknow ka bhulbhulaiya/ जानें क्यों बनाया गया लखनऊ का भूल भुलैया

 Jane Keyon banaya gaya Lucknow ka bhulbhuaiya/ जानें क्यों बनाया गया लखनऊ का भूल भुलैया LUCKNOW Bhulbhulaiya लखनऊ की भूलभुलैया भूलभुलैया के बारे में तो सुना ही होगा। अपने देश में लखनऊ का भूल भुलैया ( Lucknow ka Bhubhulaiya) फेमस है तो विदेशों में इजिप्शियन भूल भुलैया इटली  में ओसियन समाधि जैसे भूल भुलैया भी अनोखे हैं। आइए जानें इसके बारे में लखनऊ का बड़ा इमामबाड़ा पूरी दुनिया में फेमस है। इस इमामबाड़े में है, दिमाग को चकरा देने वाला भूलभुलैया । यह देश ही नहीं विदेश के लोग के भी आकर्षण का विषय है कि इसकी बनावट कैसे की गई होगी? jane Keyon banaya gaya Lucknow ka bhulbhulaiya/ जानें क्यों बनाया गया लखनऊ का भूल भुलैया?   कैसे एक बार आदमी इसमें जाता है तो उसी रास्ते से या आसानी से वापस नहीं आ पाता है। भूल भुलैया में ही जैसे गलियारे, एक ही जैसे दरवाजे हैं।  इसी से आदमी भ्रम में पड़ जाता है। भूलभुलैया के अंदर सैकड़ों सीढ़ियां है जो ऊपर भी जाती हैं और नीचे भी जाती हैं। इन्हीं पर से आगे बढ़ना होता है कभी-कभी यहां काफी भयानक हो जाता है जब कोई रास्ता भटक जाता है इस...

गांधी जी की 153वीं जयंती पर विशेष लेख: पर्यावरण के प्रति जागरूक थे| pradushan per gandhi ke thought| प्रदूषण पर गांधीजी के विचार | hindi nibandh

  गांधी जी की 153वीं जयंती पर विशेष लेख: पर्यावरण के प्रति जागरूक थे|  pradushan per gandhi ke thought| प्रदूषण पर गांधीजी के विचार | hindi nibandh प्रदूषण आज एक बड़ी समस्या है। इस पर कई परीक्षा में हिन्दी में निबंध पूछे जाते है। गांधी जी के पर्यावरण समस्या प्रदूषण पर उनके क्या विचार थे, आज के समय के लिए महात्मा गांधी जी ने अपने समय आने वाले समय पार्यावरण प्रदूषण पर चिंता व्यक्त की थी। पर्यावेरण समस्या पर अपने समय पर उठाए गए उनकी बातें आज सच हो रही है। प्रदूषण की समस्या से निजात पाने के लिए गांधी जी के विचारों को अपनाना भी जरूरी है। आज पर्यावारण प्रदूषण पर ये नये विचार वाला निबंध दिया जा रहा है। आशा है कि ये hidni nibandh आपके लिए उपयोगी है। कृपया हमें कमेंट करके जरूर बताएं। इस निबंध को जन जागरुकता के लिए सभी को शेयर करना न भलें।  thought of Gandhi jee on pollution in hindi nibhandh.    उपभोक्तावादी संस्कृति के कारण स्वार्थ और नैतिक पतन पर गांधी जी ने अपनी पुस्तक द हिंद स्वराज में उन्होंने लगातार हो रही खोजों के कारण पैदा हो रहे उत्पादों और सेवाओं को मान...

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