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मार्च, 2015 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

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मे उनमे इनमे मै मे bindu (अनुस्वार) या chandrabindu (अनुनासिक) क्यों नहीं लगता

  Me, mai, inme, uname, Bindu ya chandrabindu kyon nahin lagta hai | मे उनमे इनमे मै मे बिन्दु (अनुस्वार))  या चन्द्रबिन्दु (अनुनासिक) क्यों नहीं लगता है। मे, मै मे चन्द्रबिंदु या बिंदु लगेगा? Hindi mein chandrabindu kab lagana chahie kab nahin? Hindi spelling mistake किसी भी शब्द के पंचमाक्षर पर कोई भी बिन्दी अथवा चन्द्रबिन्दी (Hindi Chandra bindi kya hai) नहीं लगती है। इसका कारण क्या है आइए विस्तार से हम आपको बताएं। क्योंकि ये दोनो अनुनासिक और अनुस्वार उनमे निहित हैं। हिंदी भाषा वैज्ञानिक भाषा है। इसके विज्ञान शास्त्र को देखा जाए तो जो पंचमाक्षर होता है उसमें किसी भी तरह का चंद्रबिंदु और बिंदु नहीं लगता है क्योंकि उसमें पहले से ही उसकी ध्वनि होती है। पांचवा अक्षर वाले शब्द पर चंद्रबिंदु और बिंदु नहीं लगाया जाता है। जैसे उनमे, इनमे, मै, मे कुछ शब्द है जिनमें चंद्र बिंदु बिंदु के रूप में लगाया जाता है लेकिन म पंचमाक्षर है।  Hindi main panchma Akshar kise kahate Hain? प फ ब भ म 'म' पंचमाक्षर pancman Akshar है यानी पांचवा अक्षर है। यहां अनुनासिक और अनुस्वार नहीं लगेगा। क्यो...

क्या तुम जानते हो?

तूफान क्यों आते हैं? जब नमी से भरी हुई ढेर-सी गर्म हवा तेजी से ऊपर की ओर उठती है तब तूफान आते हैं। बच्चो, तुमने तूफान की शुरुआत से पहले हवा को तेज होते हुए देखा होगा। जब पानी वाले बादल बड़े होते जाते हैं और गहरे होते हुए आसमान में अंधेरा छाने लगता है। ये तूफान के लक्षण हैं। बादलों के अंदर पानी के कण तेजी से घूमते हैं, जो आपस में टकराते हैं और इससे बिजली बनती है। बिजली बनने का काम तब-तक चलता रहता है, जब तक वह बड़ी-सी चिगारी बन कर एक बादल से दूसरे बादल तक होती हुई धरती तक जोरदार चमक नहीं बन जाती। बिजली चमकते समय जब आकाश में बिजली इधर-उधर गुजरती है तो आस-पास की हवा गर्म हो जाती है। यह गर्म हवा तेजी से फैलती है तो गड़गड़ाहट की तेज आवाज सुनाई देती है।बिजली में गरज और चमक एक साथ होती है। चमक पहले दिखाई देती है और गरज बाद में सुनाई देती है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि प्रकाश की गति ध्वनि की गति से तेज होती है और चमक हमारे पास तक आवाज से पहले पहुंच जाती है। बिजली, पानी और तूफान से बचने के लिए किसी ऊंचे पेड़ के नीचे खड़ा हो जाना ठीक नहीं है, क्योंकि बिजली धरती पर गिरते समय अकसर किसी ऊंचे वृक्ष का स...

ओले क्यों गिरते हैं?

जानकारी रिंकी पाण्डेय ओले क्यों गिरते हैं? बच्चो, कई बार बारिश के दौरान अचानक पानी की बूंदों के साथ बर्फ के छोटे-छोटे गोले भी गिरते हैं। इन्हें हम ओले कहते हैं। ये ओले आसमान में कैसे बनते हैं और ओले क्यों गिरते हैं? तो आओ ओले के बारे में पूरी बात जानें। बच्चों, तुम जानते हो कि बर्फ पानी के जमने से बनता है। अब तुम्हारे मन में ये प्रश्न उठ रहा होगा कि आसमान में ये पानी कैसे बर्फ बन जाता है और फिर गोल-गोले बर्फ के टुकड़ों के रूप में ये धरती पर क्यों गिरते हैं? तुमने जैसा कि पढ़ा होगा कि पानी को जमने के लिए शून्य डिग्री सेल्सियत तापमान होना चाहिए, तुमने फ्रीजर में देखा होगा कि पानी के छोटे-छोटे बूंदें बर्फ के गोले के रूप में जम जाता है, ऐसा ही प्रकृति में होता है। हम जैसे-जैसे समुद्र के किनारे से ऊपर यानी ऊंचाई की ओर बढ़ते हैं, तब जगह के साथ ही तापमान धीरे-धीरे कम होता जाता है। तुम इसे ऐसे समझ सकते हो, लोग गर्मी के मौसम में पहाड़ों पर जाना पसंद करते हैं, क्यों? इसलिए कि पहाड़ पर तापमान कम होता है, यानी मैदानी इलाके की तुलना में पहाड़ों पर तापमान ठंडी होती है। अब तुम्हें समझ में आ गया ...

13 साल की साक्षी ने गोमूत्र से बनाई बिजली

13 साल की साक्षी ने गोमूत्र से बनाई बिजली साक्षी ने ऐसा कारनामा किया है, जो बड़े-बड़े नहीं कर पाते हैं। अपनी छोटी-सी उमर में गोमूत्र से बिजली बनाने की सफलता अर्जित की है। मई में जापान में होने वाले सेमीनार के आयोजनकर्ता ने उन्हें अपने प्रोजेक्ट की प्रदर्शनी के लिए बुलाया है और वहां पर साक्षी लेक्चर भी देंगी। --------------------------------------------------------------------------------------- 8वीं में पढ़ने वाली 13 वर्षीय साक्षी दशोरा के एक आइडिया ने उन्हें बड़ी सफलता दिलाई। बेकार समझी जाने वाली गाय के गोबर और गोमूत्र का साइंटिफिक यूज करके, इससे बिजली बनाने में कामयाबी मिली है। इस प्रोजेक्ट का नाम है- 'इम्पॉर्टेंस ऑफ काउब्रीड इन 21 सेंचुरी’। मिनिस्ट्री ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी के इंस्पायर अवार्ड ने उनके इस प्रोजेक्ट को अब इंटरनेशनल लेवल पर पहचान दिलाएगी। ये प्रोजेक्ट मई महीने में जापान मे होने वाली सात दिवसीय सेमिनार में प्रदर्शित होगा। वहां साक्षी लेक्चर भी देंगी। साक्षी ने यह प्रोजक्ट अगस्त 2०14 बनाया था, उदयपुर जिले में हुई प्रदर्शनी में छटी रैंक मिला। फिर सितम्बर में डूंगरपु...

एग्जाम से पहले करें सही तैयारी

बोर्ड एक्जाम स्पेशल पूनम रल्हन (स्टूडेंट काउंसलर) एग्जाम से पहले करें सही तैयारी आपके फाइनल एग्जाम के अब बहुत कम दिन बचे हैं। परीक्षा देते समय बहुत-सी गलतियां हो जाती हैं, जिससे हो सकता है कि आपके मार्क्स कम आए, इसीलिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि एग्जामिनेशन हॉल में क्यूश्चन पेपर को कैसे हल करें, एग्जाम से पहले क्या-क्या तैयारियां जरूरी है। इन तरीकों को अपनाकर आप एग्जाम में हाई मार्क्स ला सकते हैं। ------------------------------------------------------------------------------------------------------------- शुभांगी मिश्रा ने ट्वेल्थ के बोर्ड एग्जाम में 91 प्रतिशत मार्क्स लेकर स्कूल में टॉप रैंक प्राप्त किया, तो सभी को आश्चर्य हुआ। शुभांगी सामान्य तौर पर एक ऐवरेज स्टूडेंट के रूप में क्लास में जानी जाती थी। उससे बात करने पर पता चला कि बोर्ड एग्जाम में ऐपियर होने से पहले उसने स्कूल काउंसलर के दिए टिप्स का पूरी तरह से पालन किया था। आइए जानें बोर्ड एग्जाम में अधिक अंक स्कोर करने के लिए एग्जाम के दौरान छात्रों को किन-किन बातों का ध्यान रखना चाहिए। ध्यान से देखें एग्जाम टाइम टेबल छा...

क्या तुम जानते हो? कैसे बनती है नॉदर्न लाइट

कैसे बनती है नॉदर्न लाइट तुम जानते हो कि रात में आसमान काला दिखाई देता है लेकिन धरती में कुछ ऐसी जगह है, जहां पर रात में कुदरती रंगीन नजारा दिखता है। यहां रात के समय आसमान में हरा, पीला, नारंगी रंग वाली लाइट नजर आती है। ये अद्भुत घटना नॉर्दन लाइट्स के नाम से जानी जाती है। ऐसी घटना धरती के नॉर्वे, आइसलैंड, कनाडा में दिखाई देती है। आखिर इसका कारण क्या है, क्यों होती है नार्दन लाइट् की ये घटना? वास्तव में, नॉदर्न लाइट नेचर का एक ऐसा कारनामा है, जो धरती के गैसों के अणु और सूर्य के प्रकाश में मौजूद कण के बीच टकराव से पैदा होता है। इससे आसमान में कई रंगों का संयोजन होता है, जो अलग-अलग गैसों के प्रकृति और मात्रा पर निर्भर करता है। जब यह सूर्य के प्रकाश से टकराती है तो आसमान में कई रंगों की रंगीन लाइटें नजर आती हैं। इन नेचुरल रंगों में सबसे कॉमन रंग पीला-हरा होता है, जो धरती से 6० मील ऊपर ऑक्सीजन के अणुओं के टकराने से पैदा होती है। प्रेशर कुकर में खाना जल्दी क्यों बनता है?   जब भी तुम्हारी मम्मी खाना बनाती होंगी तो तुम सोचते होगे कि कैसे कुकर में वो जल्दी से चावल या दूसरी चीजें ...

रंग बदलने में चेंपियन

जानकारी रंग बदलने में चेंपियन बच्चों, इस दुनिया में रंगों का बहुत महत्व है, बिना रंग के इस धरती की कल्पना करना मुश्किल है। धरती में बहुत से ऐसे जीव हैं, जो रंग बदलने या अपने रंग के कारण ही इस प्रकृति में रह पाते हैं, आइए ऐसे ही कुछ जीवों की अनोखी दुनिया के बारे में जानते हैं- -------------------------------------------------------------------------------------------- रंग बदलने में उस्ताद बच्चों तुम्हें मालूम है कि गिरगिट अपना रंग बदल लेता है। तुम्हें ये बताया गया है कि सांप जैसे शिकारियों से बचने के लिए वे ऐसा करते हैं। लेकिन तुम्हें जानकर आश्चर्य होगा कि असल में अपनी अलग-अलग भावनाओं जैसे आक्रामकता, गुस्सा, दूसरे गिरगिटों को अपना मूड दिखाने और इस माध्यम से बातचीत करने के लिए भी गिरगिट रंग बदलते हैं। कई बार गिरगिट रंग नहीं केवल अपनी चमक बदल लेते हैं। खतरे की स्थिति में वह अपने रंग के साथ-साथ आकार भी बदल लेते हैं। फूल कर अपना आकार बड़ा कर लेना भी इनका एक तरीका है। गिरगिट के बहुत ज्यादा प्राकृतिक दुश्मन नहीं हैं। वह आराम से पेड़ों की टहनी पर बिना हिले बैठा रहकर अपने शिका...

बड़े काम का अविष्कार दूरबीन

बड़े काम का अवि ष्कार दूरबीन Doorbin बच्चों, कुछ अविष्कार ऐसे हैं जो दुनिया को बदल दिया, दूरबीन ऐसा ही अविष्कार है। यह दूर की चीजों को पास ले आती है और पास की चीजों को दूर दिखाती है। ऐसा जादू के कारण नहीं बल्कि विज्ञान के कारण होता है, दूरबीन आखिर बनी कैसे? आइए जानते हैं इसके बारे में- ------------------------------------------------------------------------------------- बच्चों, क्या तुमने कभी दूरबीन का इस्तेमाल किया है? बहुत काम की चीज है यह दूरबीन, जिससे देखने पर दूर आसमान के छोटे तारे भी साइज में बड़े और बेहद नजदीक नजर आने लगते हैं। शिकार के शौकीन लोगों, खगोलशास्त्री, नाविक, खारे जल की मछलियां पकड़ने वालों के लिए यह बड़ी उपयोगी चीज है। इतना ही नहीं, समुद्री और पहाड़ी क्षेत्रों में घूमने जाने वाले लोग अपने साथ दूरबीन रखना बहुत पसंद करते हैं। खास बात यह है कि बच्चे भी इसे आसानी से संभाल लेते हैं और उनके लिए अपने से बहुत दूर के दृश्यों को पास से देखना संभव हो जाता है। नई-नई तकनीक ने एक आम व्यक्ति के लिए भी इसे प्रयोग करना आसान बना दिया है। खेल—खेल में बनी पहली दूरबीन दूरबीन को बनाने व...

ऑस्ट्रेलिया की बेहतरीन चार यूनिवर्सिटी

एब्रॉड एजुकेशन अभिषेक कांत पाण्डेय ऑस्ट्रेलिया की बेहतरीन चार यूनिवर्सिटी ऑस्टलिया में इधर कुछ सालों से शिक्षा के लिए भारतीय छात्र का आकर्षण बढ़ा है, यहां यूरोप जैसी हाई क्वॉलिटी की एजुकेशन कम पैसे खर्च कर प्राप्त कर सकते हैं। ऑस्टàेलिया में बेहतरीन चार यूनिवर्सिटीज के बारे में जानकारी दी जा रही है, यहां पर पढ़ाई कर आप अपना भविष्य संवार सकते हैं। -------------------------------------------------------------------------------------- ऑस्ट्रेलिया दुनिया का सबसे छोटा महाद्बीप है, यहां की बेहतरीन यूनिवर्सिटीज में वर्तमान में 48००० भारतीय छात्र ऑस्ट्रेलिया में पढ़ रहे हैं। दुनिया की 1०० बेस्ट यूनिवर्सिटीज में ऑस्ट्रेलिया की कई यूनिवर्सिटीज शामिल हैं। अमेरिका और ब्रिटेन की तुलना में ऑस्ट्रेलिया में एडमिशन लेना आसान होता है। वोकेशनल कोर्सेज के साथ यहां कॉमर्स और आट्र्स के कोर्सेज के लिए छात्र आते हैं। ऑस्ट्रेलिया की चार बेहतरीन यूनिवर्सिटी जहां पर आप पढ़ाई कर सकते हैं। यहां की बेस्ट यूनिवर्सिटीज हैं- यूनिवर्सिटी ऑफ क्वींसलैंड, ऑस्ट्रेलियन नेशनल यूनिवर्सिटी, यूनिवर्सिटी ऑफ मेलबर्न, यूनिवर्सिटी...

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