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मे उनमे इनमे मै मे bindu (अनुस्वार) या chandrabindu (अनुनासिक) क्यों नहीं लगता

  Me, mai, inme, uname, Bindu ya chandrabindu kyon nahin lagta hai | मे उनमे इनमे मै मे बिन्दु (अनुस्वार))  या चन्द्रबिन्दु (अनुनासिक) क्यों नहीं लगता है। मे, मै मे चन्द्रबिंदु या बिंदु लगेगा? Hindi mein chandrabindu kab lagana chahie kab nahin? Hindi spelling mistake किसी भी शब्द के पंचमाक्षर पर कोई भी बिन्दी अथवा चन्द्रबिन्दी (Hindi Chandra bindi kya hai) नहीं लगती है। इसका कारण क्या है आइए विस्तार से हम आपको बताएं। क्योंकि ये दोनो अनुनासिक और अनुस्वार उनमे निहित हैं। हिंदी भाषा वैज्ञानिक भाषा है। इसके विज्ञान शास्त्र को देखा जाए तो जो पंचमाक्षर होता है उसमें किसी भी तरह का चंद्रबिंदु और बिंदु नहीं लगता है क्योंकि उसमें पहले से ही उसकी ध्वनि होती है। पांचवा अक्षर वाले शब्द पर चंद्रबिंदु और बिंदु नहीं लगाया जाता है। जैसे उनमे, इनमे, मै, मे कुछ शब्द है जिनमें चंद्र बिंदु बिंदु के रूप में लगाया जाता है लेकिन म पंचमाक्षर है।  Hindi main panchma Akshar kise kahate Hain? प फ ब भ म 'म' पंचमाक्षर pancman Akshar है यानी पांचवा अक्षर है। यहां अनुनासिक और अनुस्वार नहीं लगेगा। क्यो...
अभिषेक कांत पांडेय हम पिजड़ों में  हम सब ने एक नेता चुन लिया। उसने कहा उड़ चलो। ये बहेलिया की चाल है, ये जाल लेकर एकता शक्ति है। हम सब चल दिये नेता के साथ नई आजादी की तरफ हम उड़ रहें जाल के साथ। आजादी और नेता दोनों पर विश्वास हम पहुंच चुके थे एक पेड़ के पास अब तक बहेलिया दिखा नहीं, अचानक नेता ने चिल्लाना शुरू किया एक अजीब आवाज- कई बहेलिये सामने खड़े थे नेता उड़ने के लिए तैयार बहेलिये की मुस्कुराहट और नेता की हड़बड़हाट एक सहमति थी । हम एक कुटिल चाल के शिकार नेता अपने हिस्से को ले उड़ चुका था बहेलिया एक कुशल शिकारी निकला सारे के सारे कबूतर पिजड़े में, अब हम सब अकेले। इन्हीं नेता के हाथ आजाद होने की किस्मत लिए किसी राष्ट्रीय पर्व में बन जाएंगे शांति प्रतीक। फिर कोई नेता और बहेलिया हमें पहुंचा देगा पिजड़ों में।  यथार्थ वह दीवारों से निकल गई विचारों से लड़ रही सही मायने में मकानों को घरों में तब्दील कर रही यर्थाथ है उसका जीवन चूल्हों पर लिपी आंसू नहीं उर्ज़ा है अणु परमाणु की आसमान में बादलों की नीर नहीं  केंद्र बिदु है समाज की नजरें लटकती लाशें उस...

नोबेल पुरस्कार विजेता कैलाष सत्यार्थी और मलाला पर सवाल क्यों?

नोबेल पुरस्कार विजेता कैलाष सत्यार्थी और मलाला पर सवाल क्यों? अभिषेक कांत पाण्डेय नोबेल पुरस्कार और फिर इसमें राजनीति यह सब बातें इन दिनों चर्चा में है। देखा जाए तो विष्व के इतिहास में दूसरे विष्व युद्ध के बाद दुनिया का चेहरा बदला है। आज तकनीकी के इस युग में हम विकास के साथ अषांति की ओर भी बढ़ रहे हंै। विष्व के कई देष तरक्की कर रहे, तो वहीं अषांति चाहने वाले आज भी मध्ययुगीन समाज की बर्बबरता को आतंकवाद और नष्लवाद के रूप में इस धरती पर जहर का बीज बो रहे हैं। एषिया में बढ़ रहे आतंकवाद के कारण शांति भंग हो रही है। ऐसे में शंाति के लिए दिये जाने वाले नोबेल पुरस्कार को राजनीति के चष्में से देखना ठीक नहीं है। बहुत से लोग विष्व शांति के लिए आगे बढ़ रहे हैं। पाकिस्तान की मलाला यूसूफजई को उसके साहस और तालिबानी सोच के खिलाफ उसके आवाज को विष्व में सराहा गया है, ऐसे में मलाला यूसुफजई को दिया गया ष्शांति का नोबेल पुरस्कार की वह सही हकदार भी है। वहीं भारत के कैलाष सत्यार्थी को बेसहारा और गरीब बच्चों को षिक्षा और उनका हक दिलाने के लिए नोबेल का पुरस्कार दिया गया है। संयुक्त रूप से मिला यह नोबेल पुरस...

हम पिंजड़ों में

हम सब ने एक नेता चुन लिया उसने कहा उड़ चलो ये बहेलिया की चाल है ये जाल लेकर एकता शक्ति है। हम सब चल दिये नेता के साथ नई आजादी की तरफ हम उड़ रहे जाल के साथ आजादी और नेता दोनों पर विष्वास हम   पहुंच चुके थे एक पेड़ के पास अब तक बहेलिया दिखा नहीं अचानक नेता ने चिल्लाना शुरू किया एक अजीब आवाज - कई बहेलिये सामने खड़े थे नेता उड़ने के लिए तैयार बहेलिये की मुस्कुराहट और नेता की हड़बड़हाट एक सहमति थी । हम एक कुटिल चाल के षिकार नेता अपने हिस्से को ले उड़ चुका था बहेलिया एक कुषल षिकारी निकला सारे के सारे कबूतर पिंजड़े में , हम सब अकेले। इन्हीं नेता के हाथ आजाद होने की किष्मत लिए किसी राष्ट्रीय पर्व में बन जाएंगे शांति प्रतीक फिर कोई नेता और बहेलिया हमें पहुंचा देगा पिंजड़ों में।                   अभिषेक कांत पाण्डेय

अहिंसा और सादगी mahatma ghandhi jyanti

अहिंसा और सादगी   anuched hindi lekhan nibndh lekhan: 2 अक्टूबर महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री का जन्म दिवस है। एक अहिंसा और दूसरे सादगी के प्रणेता। सभ्य समाज में शांति का महत्व है, यह शांति समाजिक न्याय से आती है। शांति और सादगी दोनों एक दसरे से जुड़े हैं। जीवन में सादगी की जगह अगर हम दिखावा करने पर उतारू हो जाते हैं, तब हम दूसरों की शांति भंग करना शुरू कर देते हैं। खूब बड़ा बंगला, कार, हीरे जवाहरात, रूपयों की गड्डी और इस सब पाने के लिए झूठ और भ्रष्टाचार का सहारा लेना शुरू करते हैं।  गांधी जी एवं लाल बहादुर जी का व्यक्तिव्य विशाल है, जिसमें जीवन की सादगी, दया—करूणा के साथ हर इंसान के सुख—दुख की बात करता हमारे सामने है। अफसोस तब होता है जब आज के नेता का व्यक्तिव्य केवल सुख—सुवधिा के पीछे भागता है, सेवा भाव समाप्त और उपदेश देने के लिए सबसे आगे रहते हैं, चाहे वह जिस तकिए पर सो नहीं पाते हैं, वह महात्मा गांधी के चित्रांकित 500 व हजार की गड्डी वाली होती है। ऐसे में हाय कमाई करने वाले ऐसे लोग सही मायने में लोगों के हक को हड़प कर जाते है। जिस तरह से हर साल फोर्बस पत्र...

नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा की सफलता!

नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा की सफलता! अभिषेक कांत पाण्डेय न्यू इंडिया प्रहर डेस्क लखनऊ। चुनाव के वक्त नरेंद्र मोदी ने विकास का वायदा किया था, इस वायदे को पूरा करने और सबकों को साथ लेकर चलने की राह पर नरेंद्र मोदी का ऐजेण्डा सामने आ चुका है। एक सवाल उठता रहा कि क्या भारतीय जनता पार्टी में मुसलमानों को लेकर सोच मे बदलाव आया है कि नहीं? जब भाजपा के सांसद का लोकसभा में बयान के बाद हंगामा हुआ तब और अब जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने पहले इंटर नेष्नल इंटरव्यू में अलकायदा की चिंता को खारिज कर दिया और कहा कि अगर किसी को लगता है कि उनकी धुन पर भारतीय मुस्लिम नाचेंगे तो वह भ्रम है। भारत के मुसलामान देष के लिए जीएंगे और देष के लिए मरेंगे, वे कभी भारत का बुरा नहीं चाहेंगे। प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी का यह इंटरव्यू खास मायने रखती है, जिस तरह से एक समय था कि अमेरिका नरेंद्र मोदी को वीजा देने से इंकार कर दिया था। वहीं आज की परिस्थिति में विष्व के सामने नरेंद्र मोदी एक ऐसे लोकतांत्रिक देष का नेतृत्व कर रहे हैं, जहां पर हिंदू व मुस्लिम धर्म के लोग एक साथ रहते हैं। जाहिर है  कि भा...

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