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मे उनमे इनमे मै मे bindu (अनुस्वार) या chandrabindu (अनुनासिक) क्यों नहीं लगता

  Me, mai, inme, uname, Bindu ya chandrabindu kyon nahin lagta hai | मे उनमे इनमे मै मे बिन्दु (अनुस्वार))  या चन्द्रबिन्दु (अनुनासिक) क्यों नहीं लगता है। मे, मै मे चन्द्रबिंदु या बिंदु लगेगा? Hindi mein chandrabindu kab lagana chahie kab nahin? Hindi spelling mistake किसी भी शब्द के पंचमाक्षर पर कोई भी बिन्दी अथवा चन्द्रबिन्दी (Hindi Chandra bindi kya hai) नहीं लगती है। इसका कारण क्या है आइए विस्तार से हम आपको बताएं। क्योंकि ये दोनो अनुनासिक और अनुस्वार उनमे निहित हैं। हिंदी भाषा वैज्ञानिक भाषा है। इसके विज्ञान शास्त्र को देखा जाए तो जो पंचमाक्षर होता है उसमें किसी भी तरह का चंद्रबिंदु और बिंदु नहीं लगता है क्योंकि उसमें पहले से ही उसकी ध्वनि होती है। पांचवा अक्षर वाले शब्द पर चंद्रबिंदु और बिंदु नहीं लगाया जाता है। जैसे उनमे, इनमे, मै, मे कुछ शब्द है जिनमें चंद्र बिंदु बिंदु के रूप में लगाया जाता है लेकिन म पंचमाक्षर है।  Hindi main panchma Akshar kise kahate Hain? प फ ब भ म 'म' पंचमाक्षर pancman Akshar है यानी पांचवा अक्षर है। यहां अनुनासिक और अनुस्वार नहीं लगेगा। क्यो...

अच्‍छे शिक्षक ही देश के भाग्‍य निर्माता बनाते हैं।

आज हम इस मुकाम पर है जहां संघर्ष हमारे जीवन को बदल देगा। जाहीर है कि प्राइमरी शिक्षा के इतिहास में अनिवार्य निश्‍शुल्‍क शिक्षा के बाद टीईटी और इसके बाद इसकी मेरिट से चयन हम एक नए बदलाव की और बढ़ रहे हैं। निश्‍चित अब योग्‍य और कर्मठ शिक्षकों की चुनाव करना आसान होगा। और हर प्राथमिक स्‍कूल में गूणवत्‍तायुक्‍त शिक्षा मिलेगी। प्राथमिक शिक्षा का नजरिया बदलेगा लोग कहेंगे कि ये है टीईटी मेरिट वाले टीचर काश सरकार ने पहले ही इनकों नियुक्‍त किया हाता तो हम शिक्षा के क्षेत्र में बहुत आगे होते है। हमारे गांव की कायाकल्‍प हो जाती। लेकिन देर आये दुरूस्‍त वाली कहावत सही है। टीईटी मेरिट से चयनित टीचर शिक्षा के स्‍तर में अमूलचूल बदलाव लाने के लिए तैयार है और इस सपथ के साथ कि हमें न्‍याय मिला है तो हम बच्चों को भी गुणवत्‍तायुक्‍त शिक्षा देंगे। देश के विकास में भागीदारी बने और हमारे देश को निर्माण करेंगे। अच्‍छे शिक्षक ही देश के भाग्‍य निर्माता बनाते हैं।

हरियाणा में टीचर बनने का सपना हकीकत बनते नजर नहीं आ रही है

Hariyana me teacher banne ka spna hkikut bnate najar nahee a rhaee hai srkar tender par teacher rakhkar RTE ke uddeshya ko bhool rahee hai. Iska verodha karna jaroori hai. हरियाणा में टीचर बनने का सपना हकीकत बनते नजर नहीं आ रही है । यहां सरकार अब अनुंबध के आधार पर प्राथमिक टीचर की भर्ती करने का मन बना लिया है। वहीं हरियाणा राजकीय विद्यालय संघ ने इस व्यवस्था का पुरजोर विरोध किया है। शिक्षा की गुणवत्ता की बात की जाती है तो वहीं राज्य सरकार ऐसे निर्णय ले रहीं है जिससे निश्शुल्क अनिवार्य शिक्षा कानून के तहत अच्छी शिक्षा देने के उदृदेश्य से इतर कार्य कर रहीं है। अनुबंध आधार पर शिक्षकों की नियुक्‍ति कर सरकार शिक्षा की गुणवत्ता के साथ खिलावाड़ कर रही है। जब शिक्षक की नौकरी ही अस्थाई और कम वेतन पर रखे जाएंगे तो कैसे उम्मीद की जा सकती है कि प्रतिभावान शिक्षक मिलेंगे। जबकि अन्य सूचना प्रंबधन आदि में उच्च प्रतिभा पलायन करती है कारण साफ वहां पर अच्छा वेतन और सेवा शर्तें हैं। अगर राज्य सरकारे शिक्षा अधिकार कानून के महत्व नहीं समझेंगी और ऐसे निर्णय लेगी तो निश्चित यह कानून अपने लक्ष्य को प्राप्त नह...

शिक्षा अधिकार कानून के दो साल बाद भी नहीं चेती राज्य सरकारें

शिक्षा अधिकार कानून के दो साल बाद भी नहीं चेती राज्य सरकारें      हमारे देश की शिक्षा व्यवस्था हाशिए पर है। शिक्षा अधिकार कानून के लागू होने के दो साल बाद भी हमारी सरकारें सो रही हैं। शिक्षा की गुणवत्ता के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा का आयोजन करने का प्रावधान है। लेकिन अभी तक शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी टीईटी के बाद शिक्षकों का चयन नहीं हो पाया है। इससे पता चलता है कि राज्य सरकारें शिक्षा जैसे जरूरी मुद्दे पर सरकार मौन है। उत्तर प्रदेश में टीईटी परीक्षा और प्राईमरी शिक्षक भर्ती के विज्ञापन पर पेच उलझा हआ है। वहीं राजस्थान टीईटी और शिक्षक चयन में भी वहां की सरकार कोई ठोस पहल नहीं कर रही है। हरियाणा टीईटी और चयन प्रक्रिया को लेकर राज्य सरकार और छात्रों के बीच मतभेद है। राज्यों का हाल ये तब है जब एनसीटीई के गाइड लाइन के तहत प्राथमिक और उच्च प्राथमिक शिक्षकों की योग्यता स्पष्ट है। लेकिन राज्य सरकार की इच्छा शक्‍ति की कमी के चलते भर्ती प्रक्रिया बाधित है। भर्ती प्रक्रिया और चयन के मामलों का निपटारा अब कोर्ट के हाथों में है। शिक्षकों के चयन संबधित सरकार के उचित फैसला न ल...

अखिर कब होगा टीईटी मेरिट से चयनǃ

अखिर कब होगा टीईटी मेरिट से चयनǃ धोखाǃ धोखाǃ टीईटी पास करने वालों बेरोजगारों से। टीईटी से मेरिट को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी जहां हाईकोर्ट ने टीईटी मेरिट को अच्‍छी प्रक्रिया माना। टीईटी मेरिट से चयन के लिए धरना प्रदर्शन आंदोलन डण्‍डे बेरोजगारों को खाना पड़ा। मुख्‍यमंत्री का आश्‍वासन पाकर छात्र रूक गये लेकिन थके नहीं। आज जब यह रिपोर्ट आ रही है कि टीईटी को रद् कर दिया जाये और चयन का आधार हाईस्‍कूल इण्‍टरमीडिएट बीए के अंक से चयन होगा इसके लिए नियमों में परिवर्तन होगा। क्‍या टीईटी उतीर्ण करने वाले छात्र के साथ अन्‍याय नहीं हो रहा हैॽ आखिर ऐसी व्‍यवस्‍था पर मुहर क्‍यों लगाई जाएगी। जिससे केवल नकल माफियों को और नकल की प्रवृत्‍ति को बढ़ावा ही मिलेगा।  क्‍या सभी पहलुओं पर गौर हुआ हैॽ इस रिपोर्ट को तैयार करने में सभी पहलुओं पर ध्‍यान दिया गया हैॽ यह सवाल हर एक के मन में गूंज रहा है। क्‍या यह नहीं दिखता कि किस तरह से यूपी बोर्ड में धुंआधार नकल होती है। बीएड डिग्री कालेज भी चाहते है कि उनके कालेज में नंबर पाने के लिए हजारों रूपये देने वाले छात्र मिले। क्‍या सभी बोर्ड और यूनिवर्सिटी में ...

आखिर टीचर की नियुक्‍ति ही क्‍यों टीईटी मेरिट से

प्राथमिक टीचर की भर्ती टीईटी मेरिट से ही सही सरकारी स्‍कूलों की हालत क्‍यो खराबॽ इस समय उत्‍तर प्रदेश में प्राथमिक विद्‍यालय की हालत खस्‍ता है। कारण साफ है यहां बुनियादी सुविधा का अभाव है। भवन बेंच टायलेट आदि नहीं है। वहीं 50 छात्रों पर एक शिक्षक तैनात है। ऐसे में बताये कोई शिक्षक अपना बेस्‍ट परफारमेंस कैसे दे पायेगा। पढ़ाई का स्‍तर जाहिर है गिरेगा ऐसे में अंग्रेजी मीडियम तमगा लिये ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसे प्राइवेट स्‍कूल की बाढ़ आ गई है। प्राइवेट कान्‍वेंट स्‍कूल के दावे पर गौर करें तो यहां पर अच्‍छी फैकल्‍टी ट्रेंड टीचिंग स्‍टाफ और आधुनिक तकनीक से शिक्षा देने की बातें कहकर लोगों को आकर्षित किया जाता है जबकि इनके दावे कहां तक सच है। यह तो अपने बच्‍चों दाखिला दिलाने के बाद उनके अभिभावक अच्‍छी तरह से जानते है। टीईटी ने दिखाया सच मजेदार बात यह है कि इस समय देश में अनिवार्य शिक्षा कानून चौदह साल तक के बालकों के लिये मुफ्त में शिक्षा और गूणवत्‍तायुक्‍त शिक्षा की बात कहता है। जिसके तहत प्राइमरी और उच्‍च प्राइमरी में टीचरों की योग्‍यता के लिए एक पैमाना बनाया है। यहां प्रशिक्षित शिक्षक ...

प्राथमिक शिक्षक बनने का सपना संजोय लाखों लोग

प्राथमिक शिक्षक बनने का सपना संजोय लाखों लोग में बस यही बहस चल रहा है कि प्राथमिक टीचर की भर्ती की चयन प्रक्रिया क्‍या होनी चाहिए। इस पर कई लोगों के अपने अपने विचार हो सकते हैं लेकिन हम आज मौजूदा सरकारी स्‍कूलों की स्‍थिति पर ध्‍यान दें तो यह बात साफ हो कि इन स्‍कूलों में भौतिक सुविधाओं के अलावा गुणवत्‍ता युक्‍त शिक्षा भी एक बड़ी चुनौती है। अब फिर वह प्रश्‍न पूछता हूं कि प्राथमिक टीचर के चयन की प्रक्रिया क्‍या होनी चाहिएॽ जाहिर सी बात है किसी विद्‍यालय में एक अच्‍छा शिक्षक होना सबसे पहली शर्त है। अब प्रश्‍न उठता है कि अच्‍छा टीचर आएगा कैसे जब आज हमारी शिक्षा प्रणाली इतना जर्जर हो चुकी है कि आज बीएड कालेजों में नंबर की होड़ लगी है। कारण साफ है कि प्राथमिक विद्‍यालय में अभी तक अन्‍तिम चयन का आधार एकेडमिक मेरिट है। यह सुनने में अच्‍छा जरूर लगता है लेकिन ध्‍यान दें इस समय यूपी बोर्ड परीक्षा चल रही है और अखबारों में खबर रिकार्ड तोड़ हो रहा नकल। वहीं कई ऐसे बोर्ड है जहां ऐसे औसत छात्रों को भी 70 से 80 प्रतिशत नंबर आसानी से मिल जाता है जबकि यूपी बोर्ड में मेधावी छात्र भी इतना नंबर बड़ी मेंहन...

भ्रष्‍टाचार के खिलाफ अन्‍ना की मुहिम जारी

भ्रष्‍टाचार के खिलाफ अन्‍ना की मुहिम जारी अभिषेक कांत पाण्डेय भ्रष्‍टाचार की मुहिम जारी है। अन्‍ना का आन्‍दोलन इस बार सख्त तेवर में सामने आ रहा है। 25 तारीख को जंतर मंतर दिल्ली में भ्रष्टाचार के खिलाफ शहीद हुए परिजन के साथ यहां एक दिन का सांकेतिक अनशन किया गया। जिसका मकसद साफ था कि मजबूत जनलोकपाल को संसद में पारित करवाना। भ्रष्‍टाचार के खिलाफ लड़ाई हर हिन्‍दुस्‍तानी की है। आज हम जिस तरह से भ्रष्‍टाचार से दो–चार अपनी रोजाना कि जिंदगी में होते हैं लेकिन अन्‍ना के भ्रष्‍टाचार के खिलाफ मुहिम ने हमारी सोच को बदल दिया है। और हम भ्रष्‍टाचार के खिलाफ आज एक साथ खड़े हैं। मीडिया ने निभाई जिम्‍मेदारी एक आम भारतीय को दो वक्त की रोजी रोटी के लिए ही पूरी जिंदगी मेंहनत करने में लगा देता है। लेकिन सरकारी तंत्र में फैले भ्रष्ट ब्‍यूरोकेट्स और नेता आसानी से लाखों करोड़ों बना लेते है। हमें तो अब अश्‍चर्य करने की जरूरत भी नहीं कि देश में इतने घोटाले होते है। आश्चर्य तो यह है कि वास्तव में यह सिलसिला कब से चल आ रहा है। आखिर अब तक पता कैसे नहीं चला जाहिर हमारी मीडिया और जनता ने इस तरह के घोटालों क...

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