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मे उनमे इनमे मै मे bindu (अनुस्वार) या chandrabindu (अनुनासिक) क्यों नहीं लगता

  Me, mai, inme, uname, Bindu ya chandrabindu kyon nahin lagta hai | मे उनमे इनमे मै मे बिन्दु (अनुस्वार))  या चन्द्रबिन्दु (अनुनासिक) क्यों नहीं लगता है। मे, मै मे चन्द्रबिंदु या बिंदु लगेगा? Hindi mein chandrabindu kab lagana chahie kab nahin? Hindi spelling mistake किसी भी शब्द के पंचमाक्षर पर कोई भी बिन्दी अथवा चन्द्रबिन्दी (Hindi Chandra bindi kya hai) नहीं लगती है। इसका कारण क्या है आइए विस्तार से हम आपको बताएं। क्योंकि ये दोनो अनुनासिक और अनुस्वार उनमे निहित हैं। हिंदी भाषा वैज्ञानिक भाषा है। इसके विज्ञान शास्त्र को देखा जाए तो जो पंचमाक्षर होता है उसमें किसी भी तरह का चंद्रबिंदु और बिंदु नहीं लगता है क्योंकि उसमें पहले से ही उसकी ध्वनि होती है। पांचवा अक्षर वाले शब्द पर चंद्रबिंदु और बिंदु नहीं लगाया जाता है। जैसे उनमे, इनमे, मै, मे कुछ शब्द है जिनमें चंद्र बिंदु बिंदु के रूप में लगाया जाता है लेकिन म पंचमाक्षर है।  Hindi main panchma Akshar kise kahate Hain? प फ ब भ म 'म' पंचमाक्षर pancman Akshar है यानी पांचवा अक्षर है। यहां अनुनासिक और अनुस्वार नहीं लगेगा। क्यो...

लिखने और बोलने में फ़र्क करता है द़िमाग

लिखने और बोलने में फ़र्क करता है द़िमाग क्या आपने कभी सोचा है कि कुछ लोग शुद्ध रूप से एक वाक्य भले ही न लिख पाए लेकिन बोलने में वे कोई अशुद्धि नहीं करते हैं। ऐसा क्यों? आइए हम बताते हैं कि हमारा दिमाग लिखने ओर बोलने के दो तरह के सिस्टम में बंटा हुआ है। भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद, इंदिरा गांधी के बचपन में देशभक्ति का जज्बा Bhagat Singh, Chandrashekhar Azad, Indira Gandhi's childhood patriotic spirit एक नये स्टडीज ने इस बात का खुलासा किया। अमेरिका की 'जॉन हापकिंस यूनिवर्सिटी' के प्रोफेसर तथा मेन रिसर्च 'ब्रेंडा रैप' ने बताया कि किसी व्यक्ति द्वारा कहने के लिए कोई और शब्द जबकि लिखने के लिए किसी और शब्द का इस्तेमाल बेहद चौंकाने वाला था। हमें इसकी उम्मीद नहीं थी कि वह लिखने में बोलने के लिए अलग-अलग शब्दों का इस्तेमाल करेंगे। ये उस तरह है, जैसे दिमाग में दो आधे-आधे स्वतंत्र भाषा प्रणाली यानी की लैंग्वेज सिस्टम काम करते हैं। शोधकर्ताओं ने (रिसर्चर) बताया कि यह इसलिए पॉसिबल है कि हमारा दिमाग का बोलने वाला हिस्सा क्षतिग्रस्त हो जाए तो लिखने वाला हिस्सा प्रभावशा...

बच्चों ने हर्षोल्लास के साथ मनाया बालदिवस

बच्चों ने हर्षोल्लास के साथ मनाया बालदिवस बालदिवस के अवसर पर क्राइस्ट ज्योति कॉन्वेंट विद्यालय के शिक्षक एवं शिक्षिकाओं ने रंगारंग सांस्कृतिक-कार्यक्रम प्रस्तुत कर बच्चों को भारत की संस्कृति व एकता से परिचय कराया। जवाहरलाल नेहरू जी के विचारों को भाषण व कविता के माध्यम से बच्चों के सामने प्रस्तुत किया। छोटी सी झपकी आपको बनाए फ्रेश प्रयागराज। मंदर मोड़ प्रयागराज स्थित क्राइस्ट ज्योति कॉन्वेंट स्कूल में वृहस्पतिवार को बालदिवस हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर शिक्षकों ने बच्चों के लिए रंगारंग सांस्कृतिक-कार्यक्रम प्रस्तुत किया। भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की जयंती के अवसर पर छात्रों को नेहरू जी के बारे में भाषण के माध्यम से और कविता के माध्यम से बताया गया। प्रधानाचार्य सिस्टर तेजस ने बच्चों को बधाई दी और कहा कि आज का दिन हमें याद दिलाता है कि हम बच्चों की शिक्षा एवं संरक्षण के लिए पहल करें। उन्होंने बच्चों के लिए शिक्षा जरूरी बताते हुए कहा कि नेहरू जी का एक सपना था कि हर बच्चा पढ़े-लिखे और देश समाज के काम आए। उन्होंने इस बात पर जोर देते हुए कहा बिना शिक्षा ए...

new hindi kavita

New Hindi kavita  मैं कविता क्यों लिखता हूं कि क्योंकि कविता ब्रह्म है, और मैं बार बार हर एक कविता में ब्रहमांड रचता हूं । उस रचनाकार के प्रति समर्पण है जिसने ब्रह्मांड की रचना की और इसलिए भी लिखता हूं कि कविता न सुख देती न दुख, लेकिन यह मेरे होने और मेरे हाथ, दिल, दिमाग और आत्मा के अस्तित्व को एक तारे के तरह बताती कोई कविता आपसे मिलती रहेगी । डर (कविता) एक खामोश समाज  उसमें चुप्पी साधे लोग पूरा शहर  तमाशा पढ़ता अखबारों में इन दिनों। अत्याधुनिक मोबाइल अत्याधुनिक सभ्यता अत्याधुनिक जीवनशैली लोकतंत्रवाला इंसान  चुपचाप। दरिंदा घूम रहा पूरब से पश्चिम  उत्तर से दक्षिण चारों तरफ से अबोध के साथ  हो रहें अत्याचार अमानवीय कृत्य  उसकी हर एक चींख खो जाती सन्नाटे में,  हर सन्नाटे का एक डर चीरता सन्नाटा  गली, मोहल्लों, पार्क स्कूल, सुनसान सड़क स्थानों का डर अख़बारों, फेसबुक की ख़बरों के साथ/ डर घरों तक तैर जाती डर जाते  नन्हें हाथों के खिलौने। अभिषेक कांत पाण्डेय *कविता* *प्रेम व ब्रह्मांड* (प्रेम को समझना ब्रह्मांड को समझने की तरह है,...

chamki bhukahar hindi kavita

चमकी के बुखार एक कविता कठिन दौर में बच्चे बच्चे सबसे कठिन दौर में  सबसे कठिन समय में  चुनौतियों का सामना कर रहें हम बस राजनीति करते  हम बस हाथ में हाथ धरे  किसी एक खेमे की राजनीति में चुप बच्चे कठिन दौर में जी रहें  घर के खिलौने  इंतजार कर रहें। अस्पताल की बेड में पड़े बच्चे   खिलौने इंतजार करते  नन्हे हाथों  के स्पर्श के लिए।  इधर अव्यवस्था, भ्रष्टाचार, बेईमानी  एक साथ खौफ़नाक  उफा़न में आधुनिकता का पोल खोलता बच्चे अस्पताल में लड़ रहें एक सैनिक की तरह।   सफे़दपोश आते  चले जाते  अनकहे जवाब इस वस्तु स्थिति पर  फेंक जातें टीवी से चलता पहुँचता  चाय की दुकानों से हर हाथों के मोबाइलों से होता हुआ विशेषज्ञों की  सूक्ष्म क्रिकेट टेक्निक से  पट जाता अखबार ख़बरों का अंबार टीवी चैनलों की आवाजें गुम हो जाती  बच्चों के लिए,   उनकी आवाजें। बच्चों के लिए अस्पताल की बेड पर  न  नाम, न जाननेवाले उस बुखा...

hindi poem for children day

hindi poem for children day जागो आया नया सवेरा नया हिंदुस्तान पुकार रहा।   जागो आया नया सवेरा नया हिंदुस्तान पुकार रहा , आओ बच्चो पढ़ लिखकर बनाए नया हिंदुस्तान प्यारा चारों तरफ फैले शिक्षा का उजाला हर बच्चों के चेहरे पर हो मुस्कान प्यारा। जागो आया नया सवेरा नया हिंदुस्तान पुकार रहा , रंग — विरंगी तितलियां उड़ रही आजाद भारत का यह उपहार प्यारा दुनिया में सबसे प्यारा , अपना हिंदुस्तान न्यारा। सबके प्यारे नेता सुभाष — गांधी — नेहरू इनके त्याग की धरती हर बच्चा जय हिंदुस्तान पुकार रहा। शानदार खड़ा हिमालय लहराता दक्षिण में सागर , जागो आया नया सवेरा विशाल हिंदुस्तान पुकार रहा। हिंदुस्तान का हर बालक पाये शिक्षा का वरदान नहीं रहे कोई भूखा अब नहीं रहे कोई दुखी लहलाती फसलें , कलकल बहती नदिया की धारा जागो आया नया सवेरा नया हिंदुस्तान पुकार रहा। कविता अभिषेक कांत पाण्डेय बालदिवस विशेष पर कविता children day speech in hindi आओ जाने डायनासोर के बारे  में पहचानिए...

School tips for annual function

School tips for annual function मैंने कई अमेरिकन शिक्षा संबंधित लेखो में पढा़ है कि वहां के स्कूलों में नेचुरल और प्रोफेशनल स्किल अकैडमी पढ़ाई के दौरान सिखाए जाते हैं।  यह भी पढ़ें छोटी सी झपकी आपको बनाए फ्रेश रिसर्च लिखने और पढ़ने में दिमाग अलग-अलग तरह से सोचता है मैथ का भूत हटाओ ये टिप्स अपनाओ मातापिता चाहते हैं कि उनका बच्चा अच्छी आदतें सीखें और अपने पढ़ाई में आगे रहें, लेकिन आप चाहे तो बच्चों में अच्छी आदत का विकास कर सकते .. School tips for annual function: जैसे, थिएटर-ड्रामा की जो बारीकियां हैं, वह बच्चे किसी एक प्रेजेंटेशन को तैयार करने से पहले होने वाले रिहल्सल व प्रैक्टिस में सालभर स्कूल सत्र ड्रामा क्लासेस के जरिए सीखते रहते हैं और फिर एनुअल फंक्शन में बिल्कुल प्रोफेशनल तरीके से प्रस्तुत करते हैं, इस प्रेजेंटेशन के पीछे उनकी वास्तविक मेहनत होती है, जैसे डायलॉग डिलीवरी के साथ अभिनय। कोई भी आवाज़ रिकॉर्डिंग नहीं होती, केवल ध्वनि-संगीत के अलावा। School tips for annual function अमेरिका से तुलना इसलिए जरूरी दृष्टांत (उदाहरण) मैंने दिया क्योंकि ज...

सन-बकेट sun bucket से खाना बनाना आसान

सन-बकेट sun bucket से खाना बनाना आसान यह भी पढ़ें छोटी सी झपकी आपको बनाए फ्रेश रिसर्च लिखने और पढ़ने में दिमाग अलग-अलग तरह से सोचता है मैथ का भूत हटाओ ये टिप्स अपनाओ मातापिता चाहते हैं कि उनका बच्चा अच्छी आदतें सीखें और अपने पढ़ाई में आगे रहें, लेकिन आप चाहे तो बच्चों में अच्छी आदत का विकास कर सकते .. एक ऐसा गांव जो समुद्र पर बसा है, जानने के लिए क्लिक करें बढ़ते प्रदूषण के कारण लोग परेशान हैं। ऐसे में इको फ्रेंडली  एनर्जी  के स्रोतों को खोजने के लिए और उनका प्रयोग करने के लिए बड़े स्तर पर काम हो रहा है। आपको बताने जा रहे हैं सौरऊर्जा का एक ऐसा प्रयोग जिससे कि आप अपने घर में खाना पका सकते हैं। सौरऊर्जा के प्रयोग द्वारा खाना पकाने के इस बात से आपके दिमाग में यह आ रहा होगा कि यह सोलरकुकर है, पर नहीं।  हम आपको बता दें कि यह सोलरकुकर नहीं बल्कि छोटा सन-बकेट sun bucket है। जी हां! सन-बकेट sun bucket आप अपनी छत पर लगा सकते हैं।  यह एक विशेष प्रकार की छतरी के द्वारा सूरज की रोशनी को उस सन-बकेट sun bucket में इकट्ठा करता है...

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