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मे उनमे इनमे मै मे bindu (अनुस्वार) या chandrabindu (अनुनासिक) क्यों नहीं लगता

  Me, mai, inme, uname, Bindu ya chandrabindu kyon nahin lagta hai | मे उनमे इनमे मै मे बिन्दु (अनुस्वार))  या चन्द्रबिन्दु (अनुनासिक) क्यों नहीं लगता है। मे, मै मे चन्द्रबिंदु या बिंदु लगेगा? Hindi mein chandrabindu kab lagana chahie kab nahin? Hindi spelling mistake किसी भी शब्द के पंचमाक्षर पर कोई भी बिन्दी अथवा चन्द्रबिन्दी (Hindi Chandra bindi kya hai) नहीं लगती है। इसका कारण क्या है आइए विस्तार से हम आपको बताएं। क्योंकि ये दोनो अनुनासिक और अनुस्वार उनमे निहित हैं। हिंदी भाषा वैज्ञानिक भाषा है। इसके विज्ञान शास्त्र को देखा जाए तो जो पंचमाक्षर होता है उसमें किसी भी तरह का चंद्रबिंदु और बिंदु नहीं लगता है क्योंकि उसमें पहले से ही उसकी ध्वनि होती है। पांचवा अक्षर वाले शब्द पर चंद्रबिंदु और बिंदु नहीं लगाया जाता है। जैसे उनमे, इनमे, मै, मे कुछ शब्द है जिनमें चंद्र बिंदु बिंदु के रूप में लगाया जाता है लेकिन म पंचमाक्षर है।  Hindi main panchma Akshar kise kahate Hain? प फ ब भ म 'म' पंचमाक्षर pancman Akshar है यानी पांचवा अक्षर है। यहां अनुनासिक और अनुस्वार नहीं लगेगा। क्योंकि पं
आजादी का मतलब क्या है जिओ और जीने दो यह लोकतंत्र का मूल मन्त्र है शिक्षा स्वास्थ्य रोज़गार और भोजन सभी को  मिलाना उनका अधिकार है लेकिन आज भारत में गरीबो को उनका ये हुक नहीं मिल रहा है इसके लिए कौन जिम्मेदार है यह प्रश्न सभी के मन में कौंधता है और हम जानते है की कही न कही हम जिमेदार है भ्रष्टाचार के खिलाफ लोक पल बिल की मांग और आन्दोलन के बाद लोकतान्त्रिक तरीके से चुनाव लड़कर एस हक़ को पाने की बात अब चुनाव लड़ना एक मात्र विकल्प है  सही भी है अगर नेता सही चुने जाये तो देश तरक्की कर सकता है लेकिन सही लोगो को चुनाव लाकने के लिए आगे आने की जरूरत है आशा कारते है की आगामी चुनाव में देश के लिए कार्य करने वाले नेता चुने जायेंगे स्वंतंत्रता दिवस की हार्दिक बधाई 

मनरेगा मे केवल तीन दिन रोजगारॽ

अभिषेक कांत पाण्डेय मनरेगा मे केवल तीन दिन रोजगारॽ ग्रामीणों को सम्मान से जीने के लिए मनरेगा कानून के तहत १०० दिन के लिए काम मांगने पर काम देने की जिम्मेदारी संबधित अधिकारियों की है। लेकिन हकीकत इससे अलग है। खासतौर पर महिलाओं को मनेरेगा के तहत काम के समय कूल मजदूरों की संख्या के ३३ प्रतिशत की संख्या महिलाओं की होनी चाहिए     लेकिन इसके उलट यह संख्या केवल कागजों पर दिखाकर पूरी की जाती है। इस स्तर पर प्रधान रोजगार सेवक मिली भगत से उत्तर प्रदेश में मनरेगा में रूपयों का हेर–फेर हो रहा है। इस बाबत जब नारी संघ की महिला सदस्यों ने ग्राम प्रधान से कहा जता है तो प्रधान धमकी देकर मामला दबाने की कोशिश करता है। यह सब खेल वाराणासी के काशी विद्यापीठ ब्लाक के ग्राम पंचायतों में धड़ल्ले से चल रहा है। इस पर जब वहां की संगठित १० ग्राम पंचायत की महानारी संघ की महिलाओं ने इस बाबत ब्लाक में शिकायत की तो काम तो मिला केवल तीन दिन के लिए। इस तरह कई बार नारी संघ की  महिला सदस्यों ने इसके बारे में ब्लाक अधिकारी से शिकायत की तो भी को सार्थक हल नहीं मिला। वहीं महिलाओं ने काम के आवेद के बाद केवल तीन दिन क

और यूपी बोर्ड टापर को नहीं मिल पाएगा दिल्ली के टाप कालेज में प्रवेशॽ

उत्तर प्रदेश माध्यमिक बोर्ड का रिजल्ट आ गया है। अब स्नातक में प्रवेश के लिए छात्रों को विविश्विद्यालय के कट आफ मेरिट में अपना स्थान बनाना होगा। अगर बात करे तो दिल्ली विश्वविद्यालय ओर इसे संबधित मान्यता प्राप्त कालेज में प्रवेश के लिए यूपी बोर्ड का टापर अन्य बोर्ड सीबीसई व आइसीएससी बोर्ड के टापर से पिछड़ जाएगा। यह हम नहीं कह रहे हैं बल्कि हर बोर्ड के टापर की सूची पर नजर डाले तो यहां यूपी बोर्ड के टापर का प्रतिशत ९६ प्रतिशत के लगभग है जबकि अन्य बोर्ड के टापर ९९ प्रतिशत अंक पाकर सबसे आगे हैं। जाहीर है कि दिल्ली के कालेजों में स्नातक में प्रवेश का आधार केवल इंटरमीडिएट के प्रतिशत को देखकर काट आफ बनाया जाएगा तो ऐसे में यूपी बोर्ड का छात्र जो औसत पच्चासी प्रतिशत अंक पाने वाला लाख मेंहनत के बाद सीबीएसई के नब्बे प्रतिशत वालों के आगे उनका एडमिशन नहीं हो पाएगा चाहे वह जितने भी योग्य हो। यूपी बोर्ड लाख स्टेप मार्किंग का दावा कर ले लेकिन यहां से टाप करने वाला छा़त्र भी एकेडमिक मेरिट से प्रवेश व चयन में सीबीएसी आईसीएसइ बोर्ड के नब्बे प्रतिशत अंक पाए से पीछे रह जाएगा। वहीं सीबीएसई बोर्ड व आईसीए

टेट उतीर्ण और भर्ती प्रक्रिया में शामिल बेरोजगारों की सरकार अवेहलना कर रही

 खबरें आ रही हैं कि अगले सत्र में शिक्षा मित्रों की नियुक्‍ति होगी लेकिन ये तो पैराटीचर तो पहले से ही नियक्‍त हैं वो भी इण्‍टर पास  और सरकार इन्‍हें बीएड करा कर स्‍थाई नियुक्‍ति देगी। इधर आरटीई काबिल टीचर की बात करता है। तो हमारा संविधान सबकों एक समान  नजरिये से देखता है कि योग्‍यता के अनुसार नौकरी दी जाए। लेकिन  बीएड टेट उतीर्ण और भर्ती प्रक्रिया में शामिल बेरोजगारों की सरकार अवेहलना कर रही है। ६ लाख बीएड धारक और ३ लाख टीईटी पास  और लाखों लोग टीचर बनने के लिए बीएड करने की तैयारी अभी से कर रहे हैं इन्‍होंने वर्तमान सरकार को वोट दिया कि जल्‍द टीचर की भर्ती लोकतांत्रिक ढंग से शुरू होगी लेकिन वर्तमान सरकार चुनाव से पहले की परिस्‍थ्‍ितियों को भूल गया है। अब केवल एक ही दिशा में शिक्षा मित्रों की बात कर रहा है। इधर कंपटीशन से बीएड करने वाले और टीईटी मेरिट में से नियुक्‍ति का बात न करके इनको केवल टरकाया जा रहा है। संवैधानिक तरीके से हो रही भर्ती की प्रक्रिया को बदलने में ज्‍यादा रूचि दिखा रही है। बेरोजगारी भत्‍ते में भी सरकार का फैसला बिल्‍कुल अजीब है कैसे बेरोजगारी भत्‍ता के लिए सरकार बेर

उत्तर प्रदेश बाल मजदूरी में नंबर वन तब भी नहीं हो रही टीईटी मेरिट से चयन

उत्तर प्रदेश बाल मजदूरी में नंबर वन तब भी नहीं हो रही टीईटी मेरिट से चयन ग्रामीण क्षेत्रों में प्राथमिक विद्‍यालयों में पढाई नहीं होती है। प्राथमिक विद्‍यालय में मिड डे भोजन में पोषक तत्‍व गायबहैं। सरकारी प्राइमरी स्‍कूल में पढने में उच्‍च प्राथमिक विद्यालय के बच्‍चों को जोड घटाना नहीं आता है। हमारे सरकारी स्‍कूलोंकी स्‍थ्‍िति तब है जब आज छटा वेतन आयोग के अनुसार अच्‍छा वेतन सरकारी शिक्षक पा रहे हैं। अब सवाल उठता है कि अखिर यह स्‍थिति क्‍यों बनी हुई है। जाहिर है पिछले दशकों से शिक्षा के स्‍तर पर शिक्षकों के चयन में कोई अपेछ्‍ति सुधार नहीं हुआ है। आज जब मुफत शिक्षा अधिकार कानून की बात आती है तो भी इस कानून का पालन करने में राज्‍य सरकार सुस्‍त दिख रही है।उत्‍तर प्रदेश में यह स्‍थ्‍िाति और दयनीय है। और बात जब टीईटी यनी टीचर एजिबिलिटी टेस्‍ट के अनिवार्य करने के बाद आज भीमजाक बना हुआ है। जहां एक आज छात्र व शिक्षक अनुपात प्रथमिक स्‍तर पर एक शिक्षक पर ३० छात्र और उच्‍च प्राथमिक में ३५ छत्र होने चाहिए लेकिन आज जहां राज्‍य सरकारें टीचरों की भर्ती प्रक्रिया में उलझें और केवल नकल माफियों को फा
जिस तरह से टेट मेरिट से चयन के प्रति सरकार की हीलाहवाली चर रही है तो  उससे एक बात साफ है कि कोर्ट के हस्‍तक्षेप के बाद सरकार को जल्‍द ही चयन  हो गा। दीगर बात यह कि शिक्षा जैसे गंभीर मुददे में सरकार एक सही निर्णय नहीं  ले पा रही है जबकि आज हम गांवों में प्राथमिक विद्‍यालय की हालत देख सकते है। सर्वशिक्षा अभिया अशातित सफलता नहीं हासिल कर पा रहीं है। शायद इसका कारण हमारे पास सर्वविदित है कि पढाई का स्‍तर आज गिरा है। जिस  तेजी से हमारी दुनिया बदल रही है उस तेजी से प्राथमिक विद्‍यालय में गुणवत्‍तायुक्‍त शिक्षा की बात  नहीं हो रही है। अभी टीचरों की भरती के स्‍पष्‍ट मानक नहीं है। ऐकमेडिक के द्‍वारा चयन  का मानक आज अपनी प्रासंगीकता पर स्‍वयं ही प्रश्‍न पूछ रहा है। नकल एक बडी समस्‍या है और इसी नकल के वातावरण से अगर हम एकेडमिक मेरिट से टीचर चुन रहे हैं तो निश्‍चित  ही हम बच्‍चों के भविष्‍य के साथ खिलवाड कर रहे है। यहा एक बात है कि कंपटीशन या टीईटी मेरिट से चयन सर्वोत्‍तम है लेकिन सरकार यह विकासवादी निर्णय लेने में समय लगा रही है। 

बेसिक शिक्षा मंत्री के बयान ने

बेसिक शिक्षा मंत्री के बयान ने टीईटी उतीर्ण बेरोगारों के साथ धोखा किया जा रहा है। जिस तरह अखबार में टीईटी भर्ती के मामले में भ्रमित करने वाली खबरें आ रही है। अभी भी मीडिया टीईटी मेरिट के औचित्‍य पर कोई सार्थक लेख नहीं प्रकाशित कर रही है बल्‍कि इन सब मामलों में अपने पाठकों को भटका रही है। टीईटी मेरिट के संबंध में सरकार के साथ ही मीडिया भी अपने विचार खुल कर नहीं रख रही है शायद कारण साफ है कि इस  परीक्षा में धांधली के आरोप के चलते इस प्रक्रिया पर कुछ लिखने में असहज है लेकिन इतना बड़ा मुददा जोकि हमारी शिक्षा के बुनियादी ढांचे को फिर से खड़ा करने के लिए है। जहां आज नकल सबसे बड़ा नासूड है ऐसे में अगर अब टीईटी मेरिट या कंपटीशन चयन में अनिवार्य नहीं हुआ तो शिक्षा का स्‍तर नहीं सुधर सकता है।

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ईमेल लेखन कैसे करें | cbse class 10, 9 Email writing in hindi

  ईमेल लेखन कैसे करें cbse class 10, 9 Email writing in hindi CBSE बोर्ड की क्लास 9th और 10th में सेशन 2022 23 से ईमेल राइटिंग पर प्रश्न पूछा जाएगा। ईमेल राइटिंग जी का यह प्रश्न सीबीएसई बोर्ड क्लास 10th की बोर्ड परीक्षा में ढाई अंक का होगा। आपको बता दें कि क्लास 9th और 10th मे अनुच्छेद-लेखन Anuched Lekhan for class 10 and 9 , लघुकथा-लेखन , विज्ञापन-लेखन, संदेश-लेखन, संवाद-लेखन से प्रश्न भी पूछा जाता है इस पर आपको अधिक जानकारी चाहिए तो क्लिक करके पढ़ें… छात्रों ईमेल राइटिंग लिखना बहुत आसान है। ईमेल राइटिंग का प्रारूप और विषय आपको बस समझ में आना चाहिए। आपको यह बता दे कि आपकी परीक्षा में औपचारिक यानी कि फॉर्मल ईमेल राइटिंग ही पूछा जाएगा. औपचारिक ई मेल (Formal email) जैसे कि बैंक मैनेजर को  पासबुक जारी करने के लिए ई-मेल लिखना, आप एक लाइब्रेरियन है और किताब मगवाना चाहते हैं  तो बुक पब्लिशर को आप ईमेल लिखेंगे। ई-मेल की भाषा हिंदी | Email writing in hindi अगर आप ईमेल लिख रहे हैं तो उसकी भाषा हिंदी ही होनी चाहिए। प्रचलित का अंग्रेजी शब्दों का प्रयोग कर सकते हैं, जैसे स्कूल, बस

लघु-कथा' CBSE BOARD CLASS 9 NEW SYLLABUS LAGHU KATHS LEKHAN

'लघु-कथा' CBSE BOARD CLASS 9 NEW SYLLABUS LAGHU KATHA LEKHAN  लघु और कथा शब्द से मिलकर बना हुआ है। लघु का अर्थ होता है- छोटा और कथा का अर्थ होता है-कहानी। Laghu Katha ke Udharan class 9th hindi term-2 sylabuss 2022 hindi  न्यू सिलेबस सीबीएसई बोर्ड लघु कथा लेखन क्लास नाइंथ इस तरह लघुकथा का अर्थ हुआ कि 'छोटी कहानी'। the shrot story छात्रों हिंदी साहित्य को दो भागों में बाँटा गया है, पहला गद्य साहित्य (gadya sahitya)  और दूसरा काव्य साहित्य ।  गद्य साहित्य के अंतर्गत कहानी, नाटक, उपन्यास, जीवनी, आत्मकथा विधाएँ आती हैं। इसी में लघु-कथा विधा भी 'गद्य साहित्य' का एक हिस्सा है। कहानी उपन्यास के बाद यह विधा सर्वाधिक प्रचलित भी है। लघुकथा की महत्वपूर्ण बातें the important character of laghu katha in Hindi लघु कथा क्यों लिखी जाती है? 1.आधुनिक समय में इंसानों के पास समय का अभाव होने लगा और वे कम समय में साहित्य पढ़ना चाहते थे तो  'लघु-कथा' का जन्म हुआ। लघु कथा का जन्म कैसे हुआ? हमारी संस्कृति में लघु कथा का क्या-क्या रूप है? laghu Katha kya hota hai? 2.लघु कथा

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