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मे उनमे इनमे मै मे bindu (अनुस्वार) या chandrabindu (अनुनासिक) क्यों नहीं लगता

  Me, mai, inme, uname, Bindu ya chandrabindu kyon nahin lagta hai | मे उनमे इनमे मै मे बिन्दु (अनुस्वार))  या चन्द्रबिन्दु (अनुनासिक) क्यों नहीं लगता है। मे, मै मे चन्द्रबिंदु या बिंदु लगेगा? Hindi mein chandrabindu kab lagana chahie kab nahin? Hindi spelling mistake किसी भी शब्द के पंचमाक्षर पर कोई भी बिन्दी अथवा चन्द्रबिन्दी (Hindi Chandra bindi kya hai) नहीं लगती है। इसका कारण क्या है आइए विस्तार से हम आपको बताएं। क्योंकि ये दोनो अनुनासिक और अनुस्वार उनमे निहित हैं। हिंदी भाषा वैज्ञानिक भाषा है। इसके विज्ञान शास्त्र को देखा जाए तो जो पंचमाक्षर होता है उसमें किसी भी तरह का चंद्रबिंदु और बिंदु नहीं लगता है क्योंकि उसमें पहले से ही उसकी ध्वनि होती है। पांचवा अक्षर वाले शब्द पर चंद्रबिंदु और बिंदु नहीं लगाया जाता है। जैसे उनमे, इनमे, मै, मे कुछ शब्द है जिनमें चंद्र बिंदु बिंदु के रूप में लगाया जाता है लेकिन म पंचमाक्षर है।  Hindi main panchma Akshar kise kahate Hain? प फ ब भ म 'म' पंचमाक्षर pancman Akshar है यानी पांचवा अक्षर है। यहां अनुनासिक और अनुस्वार नहीं लगेगा। क्यो...

समझें आखों की भाषा

रिलेशनशिप कई बार जो बात हम अपनी जुबान से नहीं कह सकते, हमारी आंखें बयान कर देती हैं या यूं कहें हम अपनी बातों को कई बार इशारों से भी बाखूबी कह सकते हैं। अकसर ऐसा भी होता है कि पति कुछ कह नहीं पाते लेकिन वे इशारों में ही बहुत कुछ कह देते हैं, जिसको समझना आना चाहिए। आप अपने पति को अच्छी तरह से जानती हैं लेकिन कभी-कभी लगता है कि आप उन्हें बेहतर तरीके से नहीं जानतीं। ऐसा क्यों होता है? कभी-कभी दांपत्य जीवन में नीरसता आ जाती है। पति के व्यवहार में बदलाव को आप समझ नहीं पाती हैं। उसके पीछे छिपी कोई समस्या है, जिसे वे आपसे शेयर नहीं करना चाहते हैं। पति की इस तरह की मनोस्थिति को आप थोड़ा ध्यान दें तो आसानी से समझ सकती हैं। क्या है आंखों और इशारों की भाषा, यह जानकर आप अपने दांपत्य जीवन को सुखमय बना सकती हैं। आंखों को पढ़ें कहते हैं कि किसी भी इंसान के मन में क्या चल रहा है, यह जानना मुश्किल है लेकिन आंखों को देखकर कई बार पता चल जाता है। पति के मन में क्या चल रहा है, जो आपसे शेयर नहीं कर पा रहे हैं। ऐसी स्थिति में कोई धरणा न बनाएं, जब तक सच्चाई न पता चले। आप पति से बात करें, इस दौरान ...

सिंगल मदर कामयाब भी, अच्छी मां भी

अभिषेक कांत पाण्डेय   आज महिलाएं खुद फैसले ले रही हैं और क्यों न लें, वे पढ़ी-लिखी हैं, कामयाब हैं, उन्हें अपनी जिंदगी अपनी आजादी से जीने का हक है। आज सिंगल मदर बिना पुरुषों के खुद घर और बाहर की जिम्मेदारी बाखूबी उठा रही हैं। ये जीवन में कामयाब हैं और एक अच्छी मां भी हैं, इन्हें पुरुषों के सहारे की जरूरत नहीं है। हमारा समाज आज कितना भी आधुनिक हो गया हो, लेकिन भारत में सिंगल मदर होना आसान नहीं है। अकेले एक महिला का जीवन यापन करना और बच्चों की परवरिश करना मुश्किलों से भरा है। सिंगल मदर के लिए सर्वोच्च न्यायालय के हक में अहम फैसला आया है कि सिंगल मदर को अपने बच्चे का कानूनी अभिभावक बनने के लिए बच्चे के पिता का नाम या सहमति की कोई जरूरत नहीं है। यह फैसला ऐसी महिलाओं के लिए राहत भरा है, जो किन्हीं कारणों से सिंगल मदर के रूप में जीवन जी रही हैं। लेकिन आज भी हमारा समाज सिंगल मदर को अच्छी निगाहों से नहीं देखता है। सामाज के दकियानूसी खयाल वाले कुछ ठेकेदार, अकेले जीने वाली महिलाओं के हक की बात पर उनके राहों में हमेशा कांटे बोते रहे हैं। सवाल यह उठता है कि महिलाएं हमेशा पुरुषों के मुताबिक ...

आओ जानें डायनासोर की दुनिया

अभिषेक कांत पाण्डेय स्टीवन स्पीलबर्ग की जुरासिक पार्क फ्रेंचाइजी की नई फिल्म 'जुरासिक वर्ल्ड’  खूब धूम मचाया। इससे पहले भी एक फिल्म 'जुरासिक पार्क’ आई थी, जिसने पूरी दुनिया में डायनासोर नाम के जीव से परिचय कराया था। तुमने भी वह फिल्म देखी होगी, आखिर कहां चले गए ये डायनासोर, कैसे हुआ इनका अंत... इनके बारे में तुम अवश्य जानना चाहोगे। कई तरह के थे डायनासोर स्टीवन स्पीलबर्ग की जुरासिक पार्क फ्रेंचाइजी की नई फिल्म 'जुरासिक वर्ल्ड’ आपनेे देखा होगा। इससे पहले भी एक फिल्म 'जुरासिक पार्क’ आई थी, जिसने पूरी दुनिया में डायनासोर नाम के जीव से परिचय कराया था। आपने भी वह फिल्म देखी होगी, आखिर कहाँ चले गए ये डायनासोर, कैसे हुआ इनका अंत... इनके बारे में आप अवश्य जानना चाहेंगे। डायनासोर की रो चक बातें -इनके अब तक 5०० वंशों और 1००० से अधिक प्रजातियों की पहचान हुई है। -कुछ डायनासोर शाकाहारी, तो कुछ मांसाहारी होते थे जबकि कुछ डायनासारे दो पैरों वाले, तो कुछ चार पैरों वाले थे। -डायनासोर बड़े होते थे, पर कुछ प्रजातियों का आकार मानव के बराबर, तो उससे भी छोटे होते थे।---कुछ ड...

करें कंबाइड हायर सेकेंडरी लेवल एग्जामिनेशन 2०15 की तैयारी

कर्मचारी चयन आयोग केंद्रीय संस्थानों में ग्रुप सी कैटेगरी के कर्मचारियों की भर्ती करता है। कंबाइड हायर सेकेंडरी लेवल एग्जामिनेशन 2०15 के लिए असिस्टेंट, डाटा एंट्री ऑपरेटर व एलडीसी के 6578 पदों पर भर्ती की अधिसूचना जारी की गई है। सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे हैं तो यह बिल्कुल सही समय है। इन पदों के लिए आवेदन करने की अंतिम तारीख 13 जुलाई है। एलिजिबिलिटी, एग्जाम पैटर्न और प्रिपरेशन की सही जानकारी इस नौकरी को हासिल करने में मदद करेगी। ————————————————————————————————— कर्मचारी चयन आयोग देशभर में केंद्रीय कर्मचारियों की भर्ती करता है। कंबाइड हायर सेकेंडरी लेवल एग्जामिनेशन 2०15 के जरिए ग्रुप सी के पद पर ज्वाइन करने के बाद आप विभागीय परीक्षा देकर गजेटेड ऑफिसर की पोस्ट तक भी पहुंच सकते हैं। अपने मनपसंद विभाग में ऊंचे ओहदे पर काम करने का सपना साकार करने का यह शॉर्टकट तरीका है। बस आप में ध्ौर्य और सही रणनीति को फॉलो करने की समझदारी होनी चाहिए, फिर कामयाबी आपके हाथ में होगी। एलिजिबिलिटी 1 अगस्त, 2०15 से पहले आपके पास 12वीं या इसके समकक्ष कोई योग्यता होनी चाहिए। आवेदन करने की आयु 18 से 27 वर्ष क...

फादर डे

फादर डे मैं जब भी देखता तो उसके पिताजी बड़े दिखते और मेरे पिताजी छोटे पिताजी ने हमें नाम दिया और उनके पिताजी ने उन्हें काम दिया वे वंशों वाले पिताजी हैं उनके। हमारे पिताजी मेहनतकश है। हमें मोमबत्ती में पढ़ाया इंसान बनाया। उनके पिताजी ने उन्हें ताज पहनाया चुनाव जीतवाया, हम हमारे पिताजी से कहते कि हमें कितना परिश्रम करना है हमारे पिताजी कहते तुम तुम हो सबसे अलग हो तुम ही बदल सकते हो दुनिया। मेरी बात समझ में है मेरे पिताजी ठीक कहते हैं उनके पिताजी उनके लिए चांदी के चम्मच बने। फिर भी मैं सोचता वंशों की बैशाखी पर उनके पिता ने बैठाया क्यों अपने बेटे को। मेरे पिताजी इंतजार कर रहे माली की तरह, बेटा- वंशों वाले बेटाओं से लड़ रहा है उनके पिताओं से और उनके बेटों से जिन्होंने लोकतंत्र को ढाल बनाया मैं और मेरे पिता, हम एक नई खोज में एक नये विचारों में चिंगारी पैदा कर रहें उनके पिता और बेटों के खिलाफ। अभिषेक कांत पाण्डेय

सकरात्मकता लाती है जीवन में जीवंतता

अभिषेक कांत पाण्डेय सकारात्मक सोच जीवन में रंग भरता है, वहीं नकारात्मक सोच जीवन में निराशा उत्पन्न करता है। क्या आपने कभी सोचा कि मन में सबसे अधिक नकारात्मक सोच क्यों आता है। थिंकिंग रिसर्च में भी यही प्रमाणित हुआ है कि हमारे कार्य नकारात्मक ऊर्जा से प्रेरित होते हैं। नकरात्मक सोच हमें आनंद और स्वस्थ जीवन से दूर ले जाती है। दिमाग को समझाएं और सकरात्मक सोच से प्रेरित रहें, देखिए जीवन में जीवंतता दौड़ी चली आएगी। ------------------------------ ------------------------------ ------------------ आप हमेशा सकारात्मक सोच वाले व्यक्ति को ही पसंद करते हैं। जब कोई व्यक्ति नया काम शुरू करता है तो सकारात्मक सोच लेकर चलता है। वहीं जब नकारात्मक सोच रखने वाला कोई व्यक्ति आपके कार्य की सफलता पर संदेह उत्पन्न करता है और कार्य को मुश्किल भरा बताता है तब आप उसके विचारों की नकारात्मक ऊर्जा से दूर रहने की कोशिश करते हैं। लेकिन उसके बाद आप में नकारात्मक सोच पैदा होने लगती है कि सफलता मिलेगी कि नहीं? ये संशय कैसे आता है, रिसर्चरों ने इस रहस्य से पर्दा उठाया है। यूएस नेशनल साइंस फाउंडेशन ने रिसर्च ...

मेटेरोलॉजिस्ट बन जानें मौसम का मिजाज

अभिषेक कांत पाण्डेय भारत में मानसून का पूर्वानुमान लगाना मौसम विभाग का काम है। कभी-कभी यह अनुमान गलत साबित हो जाता है। कई तरह के फैक्ट इंफॉर्मेशन और डेटा एनालिसिस करने के बाद ही मौसम का पूर्वानुमान लगाया जाता है। इस काम में लगे प्रोफशनल्स के लिए यह बहुत जिम्मेदारी भरा काम है। इस क्षेत्र में आज कॅरिअर के तमाम ऑप्शन मौजूद हैं। एरोप्लेन संचालन से लेकर खेल के मैदानों तक मौसम विज्ञान की भूमिका बढ़ी है। कॅरिअर के लिहाज से मौसम विज्ञानी बनना, आज सम्मानजनक और देश सेवा का काम है। ............................................................... सरकारी विभागों से लेकर मौसम विज्ञान की भविष्यवाणी करने वाली प्रयोगशालाओं, अंतरिक्ष विभाग और टेलीविजन चैनल पर मौसम विज्ञान एक अच्छे कॅरिअर के लिए आपको बुला रहा है। अगर आपको हवा, बादल, समुद्र, बरसात, धुंध-कोहरे, आंधी-तूफान और बिजली में दिलचस्पी है तो मौसम विज्ञान का क्षेत्र न केवल आपकी इन क्षेत्रों की जिज्ञासाओं की पूर्ति करेगा, बल्कि एक शानदार कॅरिअर भी प्रदान करेगा।  मौसम की हर तरह की जानकारी उपलब्ध कराने का यह क्षेत्र बहुत ही बड़ा है। इनमे...

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