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मे उनमे इनमे मै मे bindu (अनुस्वार) या chandrabindu (अनुनासिक) क्यों नहीं लगता

  Me, mai, inme, uname, Bindu ya chandrabindu kyon nahin lagta hai | मे उनमे इनमे मै मे बिन्दु (अनुस्वार))  या चन्द्रबिन्दु (अनुनासिक) क्यों नहीं लगता है। मे, मै मे चन्द्रबिंदु या बिंदु लगेगा? Hindi mein chandrabindu kab lagana chahie kab nahin? Hindi spelling mistake किसी भी शब्द के पंचमाक्षर पर कोई भी बिन्दी अथवा चन्द्रबिन्दी (Hindi Chandra bindi kya hai) नहीं लगती है। इसका कारण क्या है आइए विस्तार से हम आपको बताएं। क्योंकि ये दोनो अनुनासिक और अनुस्वार उनमे निहित हैं। हिंदी भाषा वैज्ञानिक भाषा है। इसके विज्ञान शास्त्र को देखा जाए तो जो पंचमाक्षर होता है उसमें किसी भी तरह का चंद्रबिंदु और बिंदु नहीं लगता है क्योंकि उसमें पहले से ही उसकी ध्वनि होती है। पांचवा अक्षर वाले शब्द पर चंद्रबिंदु और बिंदु नहीं लगाया जाता है। जैसे उनमे, इनमे, मै, मे कुछ शब्द है जिनमें चंद्र बिंदु बिंदु के रूप में लगाया जाता है लेकिन म पंचमाक्षर है।  Hindi main panchma Akshar kise kahate Hain? प फ ब भ म 'म' पंचमाक्षर pancman Akshar है यानी पांचवा अक्षर है। यहां अनुनासिक और अनुस्वार नहीं लगेगा। क्यो...

5०० साल बाद कैसा होगा धरती का भविष्य

क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि 5०० साल बाद हमारी धरती कैसी दिखेगी। कॉलिन एन्डेरसन जोकि पेशे से फोटोग्राफर हैं, उनकी ये काल्पनिक फोटो में मानव सभ्यता अंतरिक्ष से अनोखी तरह से दिख रही है। टॉवर के आकार की ऊंची-ऊंची बिल्डिंग से ढकी धरती का ये भविष्य है। कई वैज्ञानिकों और रिसचर्स ने आने वाले 5०० सालों में मानव सभ्यता में बदलाव के बारे में पूर्वानुमान लगाया है। क्या आप जानते हैं आसमान नीला क्यों दिखता है पढ़ने के लिए क्लिक करें   चारों तरफ होगा बर्फ ही बर्फ 26वीं शताब्दी में भले हम न रहें लेकिन धरती के वातावरण में बहुत बड़ा बदलाव आएगा। रिसर्च से ये बात सामने आई है कि 26वीं शताब्दी में ग्लोबल वार्मिंग के कारण धरती का तापमान बढ़ जाएगा। लेकिन उसके बाद धरती पर ठंड इतनी बढ़ जाएगी कि यहां हिम युग की शुरू हो जाएगा। कई रिसर्च से ये अनुमान लगाया गया है कि जब धरती पर मौजूद जीवाश्म ईंधन यानी पेट्रोल, कोयला का भंडार खत्म हो जाएगा तो धरती का वातावरण गर्म होना शुरू हो जाएगा। वैज्ञानिकों को कहना है कि धरती पर मौजूद जीवाश्म ईंधन का अधिक इस्तेमाल से कार्बनडाइऑक्साइड की मात्रा वा...

इन महिलाओं को मिला नोबेल प्राइज

नोबेल प्राइज हर साल रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेस, द स्वीडिश एकेडमी, द कारोलिस्का इंस्टीट्यूट एवं द नॉर्वेजियन नोबेल कमेटी द्बारा दिया जाता है। दुनिया का सबसे प्रतिष्ठित नोबेल पुरस्कार ऐसे लोगों या संस्था को दिया जाता है, जिन्होंने रसायनशास्त्र, भौतिकीशास्त्र, साहित्य, शांति, एवं औषधि विज्ञान (मेडिकल साइंस) के क्षेत्र में अद्बितीय योगदान दिया हो। नोबेल प्राइज के संस्थापक अल्फ्रेड नोबेल थ्ो। वहीं अर्थशास्त्र के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कारों की शुरुआत 1968 में स्वीडन की केंद्रीय बैंक स्वेरिज रिक्सबैंक द्बारा शुरू की गई। यह पुरस्कार अर्थशास्त्र के क्षेत्र में अद्बितीय कार्य करने वाले लोगों और संस्थाओं को हर साल दिया जाता है। हर कैटेगरी में पुरस्कार अलग-अलग समिति द्बारा दिया जाता है। नोबेल प्राइज विनर को एक मेडल, एक डिप्लोमा, एक मोनेटरी एवार्ड के साथ धनराशि भी दी जाती है। अब तक 48 महिलाओं को नोबेल पुरस्कार मिल चुका है। भौतिक विज्ञान में अब तक नोबेल प्राइज से सम्मानित महिलाएं मैडम क्यूरी जन्म: 7 नवंबर, 1867 मृत्यु: 4 जुलाई, 1934 पोलेंड की साइंटिस्ट मैडम क्यूरी को वर्ष 19०3 में भौतिक के क्ष...

मोहनदास करमचंद गांधी से महात्मा गांधी

कॉपी राइट अगर आपको यह आर्टिकल प्रकाशन के लिए उपयोग करना है तो मेरे मेल पर संपर्क ​कीजिए। abhishekkantpandey@gmail.com अभिषेक कांत पाण्डेय महात्मा गांधी के बारे में तुम बहुत कुछ जानते होगे कि उन्होंने हमारे देश की आजादी के लिए बहुत बड़े-बड़े आंदोलन किया। उनके मार्गनिर्देशन में ही आजादी का आंदोलन चला और उनके सत्य, अहिंसा और सत्याग्रह के कारण ही हमें अंग्रेजों से आजादी मिली। गांधी जयंती के अवसर पर आओ उनकी शिक्षाओं और उनके बारे में जानें- -------------------------------------------------------------------------------------- सत्य और अहिंसा का पाठ सीखाने वाले सदी के नायक का नाम कौन नहीं जानता है। अंग्रेजों से अहिंसा के बल पर भारत को आजादी दिलाने वाले महात्मा गांधी का नाम सारी दुनिया में जाना जाता है। मोहन करमचंद गांधी से महात्मा गांधी बनने की एक लंबी गाथा है। 2 अक्टूबर 1869 में गुजरात के पोरबंदर में जन्में गांधीजी अपने विद्यार्थी जीवन में एक औसत छात्र थे। लेकिन अपनी मेहनत और देश के प्रति प्रेम के कारण वे आाजादी के महानायक बनें। सत्य व अहिंसा का पाठ पढ़ाने वाले सबके प्यारे बापू आज भी हमा...

डिजिटल इन इंडिया से आइटी सेक्टर में बूम

सरकार के कदम डिजिटलाइजेशन की ओर बढ़ रहे हैं, 'मेक इन इंडिया’ के बाद 'डिजिटल इंडिया’ के कारण भारत के आइटी क्ष्ोत्र में नई नौकरियों के दरवाजे खुलने वाले हैं। यह महत्वाकांक्षी अभियान के जरिए देश के ढाई लाख गांवों को इंटरनेट से जोड़ना और सरकारी योजनाओं को गांव-गांव तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। कॅरिअर के लिहाज से कंप्यूटर कोर्स करने वाले युवाओं के लिए सरकारी संस्थानों से लेकर प्राइवेट क्ष्ोत्र में नौकरी मिलना आसान होगा। डिजिटल इंडिया क्या है और इसके मुताबिक अपने आपको कैसे करें अपडेट ताकी आने वाले समय में आप बेहतरीन जॉब हासिल कर सके। --------------------------------------------------------------------------------- ढाई लाख गांवों को इंटरनेट से जोड़ने के बाद आइटी सेक्टर में नौकरियां भी बढ़ेंगी। जिस तरह से भारत में लगातार इंटरनेट का उपयोग बढ़ता जा रहा है। सूचना के क्ष्ोत्र में भी ग्रोथ देखने को मिल रहा है। डिजिटल इंडिया के कारण कंप्यूटर एजुकेशन, एनजीओ, आइटी सेक्टर, सामुदायिक क्ष्ोत्र, ऑन लाइन एजुकेशन, ऑन लाइन शॉपिंग, वेबसाइट डेवलपिंग, कंटेंट राइटिंग, वेब डिजाइनिंग के क्ष्ोत्र में ढेर...

निबंध लेखन: खुद को आत्मनिर्भर बनाने की राह में महिलाएं

निबंध लेखन सीबीएसई बोर्ड अनुच्छेद लेखन एजुकेशनल निबंध लेखन: खुद को आत्मनिर्भर बनाने की राह में महिलाएं निबन्ध ( Essay ) लेखन कई परीक्षा में पूछा जाता है। अब अनुच्छेद लेखन पूछने की परंपरा 910 की कक्षा में शुरू हो गया है इसलिए यह छोटा निबंध अनुच्छेद लेखन जिसने मेरी सहायता करता। जाता है। किसी देश की तरक्की में महिलाओं का बहुत बड़ा योगदान होता है। परिवार को संभालने वाली महिला अब समाज और देश को नई दिशा दे रही हैं। ये सिलसिला आजादी के बाद से अब तक अनवरत चल रहा है। पुरुषों से कमतर समझे जाने वाली महिलाओं ने शिक्षा, विज्ञान, इंजीनियरिंग, मेडिकल और सेना जैसे क्षेत्र में खुद को साबित किया है। जहां कामयाबी पुरुषों का अधिकार समझा जाता था, वहीं महिलाओं ने इस भ्रम को तोड़ दिया है, वे कामयाबी की राह में आगे बढ़ रही हैं। चाहे जितनी मुश्किलें हो लेकिन आगे बढ़ने और खुद को स्थापित करने का जज्बा महिलाओं को कामयाब बना रहा है।  निबन्ध ( Essay ) writing 2021 new updatet in hindi.  ---------------------------------------------------------------------------------------- भारतीय समाज में महिलाओं का विशि...

बच्चे का मन तो नहीं है बीमार

पैरेंटिंग्स This article copy right If you want publish please cotact my mail abhishekkantpandey@gmail.com अभिषेक कांत पाण्डेय मां होने के नाते आप चाहती हैं कि आपका बच्चा हंसे, ख्ोले और स्वस्थ रहे। पर कभी-कभी हम अवसाद में घिरे बच्चे के मन को नहीं पढ़ पाते हैं। बच्चों का बदला-बदला व्यवहार जैसे, गुमसुम रहना, अकेले में समय बिताना, किसी से बात न करना और उसके चेहरे पर परेशानी दिख्ो तो जाइए कि आपके बच्चे का मन बीमार है। वह कोई मानसिक व्यथा से गुजर रहा है। ऐसे में मां होने के नाते आप बच्चों की उलझनों के बारे में जाने और उसकी काउंसिलिंग कराए ताकी आपका बच्चा फिर से हंसता-ख्ोलता नजर आए। ------------------------------------------------------------------------------------- रीता 11 साल की है। बार-बार अपनी मां को बताना चाहती है कि उसे ट्राली वाला गली तक छोड़ कर चला जाता है, 'मां ट्राली वाले से कहों की घर तक छोड़ दिया करे।’ लेकिन रीता की मां ने उसकी बात को अनसुना कर दिया और कहा कि सड़क से गली तक तो दो-मिनट का रास्ता है, थोड़ाè पैदल चलकर आजाया कर। रीता की मां अपने काम में लग जाती है, कुछ देर ...

आओ हम एक हो जाएं: नेक सलाह

आओ हम एक हो जाएं नेक सलाह अभिषेक कांत पाण्डेय आज भारत आजाद है, हम आजादी की सांस ले रहे हैं लेकिन हमने देश में ही मानव-मानव के बीच लंबी रेखाएं खींच रखी हैं। धर्म, जाति, संप्रदाय, अमीरी-गरीबी, गोरे-काले आदि की जबकि हम भारत के निवासी हैं, हम उस देश में रहते हैं, जहां विभिन्न प्रकार के लोग हैं। इनके बीच एकता स्थापित करना और एक देश के निवासी होने का गर्व हमारे मन में होना चाहिए। धर्म, देश, लोकतंत्र इक दूसरे के पर्याय हैं। धर्म का अर्थ मानव प्रेम और देश का अर्थ यहां रहने वाले लोगों में एकता और लोकतंत्र पर विश्वास रखना। लोकतंत्र का मतलब बराबरी से जीने का हक, कोई भ्ोद-भाव नहीं। क्या हम मानव जाति के कल्याण के लिए धर्म, देश और लोकतंत्र को एक दूसरे का पूरक नहीं बना सकते हैं। देश और लोकतंत्र दोनों शरीर और आत्मा है तो धर्म उसमें रहने वाले व्यक्ति के लिए आचरण, नैतिकता, कर्तव्य, विश्व बंधुता के भाव की धारा बहाती है। निश्चय ही देश बड़ा होता है, क्योंकि यह ही सभी देशवासियों को एक सूत्र में पिरोता है और मानव जाति को सुरक्षित और सम्मान से जीने का हक देता है। देश के प्रति हमारे कर्तव्य हैं, जिसके लिए...

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